दहेज हत्याकांड में जेठ-जेठानी को राहत, झारखंड हाई कोर्ट ने किया बरी
झारखंड हाई कोर्ट ने दहेज हत्या मामले में जेठ गौतम बाउरी और जेठानी चिंता देवी को बरी कर दिया है।

झारखंड हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)
HighLights
हाई कोर्ट ने दहेज हत्या मामले में बरी किया।
जेठ-जेठानी को सात साल की सजा हुई थी रद्द।
सबूतों के अभाव में संदेह का लाभ मिला।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस पीके श्रीवास्तव की अदालत में दहेज हत्या मामले में जेठ गौतम बाउरी और उनकी पत्नी चिंता देवी को बड़ी राहत देते हुए उनकी सात साल की सजा रद कर दी है।
खंडपीठ ने दोनों को बरी करते हुए कहा कि उनके खिलाफ दहेज की मांग करने, प्रताड़ित करने या हत्या में शामिल होने का कोई ठोस और विशिष्ट साक्ष्य नहीं है।
अदालत ने कहा कि संदेह चाहे कितना भी मजबूत क्यों न हो, वह कानूनी सबूत की जगह नहीं ले सकता। ऐसे में दोनों को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए।
मामले के अनुसार, रिंकू देवी की शादी वर्ष 2010 में रतन बाउरी से हुई थी। 22 मई 2012 को हुई घटना को लेकर रिंकू की मां के बयान पर धनबाद के निरसा थाना में मामला दर्ज किया गया था।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि 50 हजार रुपये और मोटरसाइकिल की दहेज मांग पूरी नहीं होने पर सास ने रिंकू देवी पर केरोसिन डाल दिया और पति ने माचिस से आग लगा दी।
गंभीर रूप से झुलसी रिंकू को बोकारो जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
इस मामले में धनबाद की अदालत ने 13 सितंबर 2017 को पति के साथ उनके बड़े भाई गौतम बाउरी और भाभी चिंता देवी को दोषी करार देते हुए सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।
वहीं, रिंकू के पति रतन बाउरी को 10 साल की सजा मिली थी, जिसे वह पूरी कर चुका है। इस कारण उसकी अपील 14 सितंबर 2026 को निस्तारित कर दी गई थी।
दोनों की घटना में कोई विशिष्ट भूमिका नहीं
अपील पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि गौतम बाउरी और चिंता देवी पर केवल घटना के समय मौजूद रहने और रिंकू को बचाने की कोशिश नहीं करने का आरोप था।
जबकि केरोसिन डालने और आग लगाने का सीधा आरोप सास बिजली देवी और पति रतन बाउरी पर लगाया गया था। दोनों अपीलकर्ताओं की घटना में कोई विशिष्ट भूमिका सामने नहीं आई।
हाई कोर्ट ने कहा कि दोनों अपीलकर्ताओं के खिलाफ दहेज की मांग करने या रिंकू को प्रताड़ित करने का कोई स्पष्ट और विशिष्ट आरोप नहीं है। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं।
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