विधायक श्वेता सिंह के आंदोलन से बोकारो स्टील प्लांट बंद होने की नौबत: पिघल जाता 12 हजार टन स्टील, हाई कोर्ट सख्त
झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो स्टील प्लांट के गेट बंद करने के मामले में सुनवाई की, जहां विधायक श्वेता सिंह ...और पढ़ें

कोर्ट ने बोकारो के उपायुक्त व एसपी कहा- भविष्य में न हो ऐसी घटना की पुनरावृत्ति।
HighLights
हाई कोर्ट ने बोकारो स्टील प्लांट गेट बंद मामले में सुनवाई की।
विधायक श्वेता सिंह के नेतृत्व में विस्थापितों ने किया था प्रदर्शन।
कोर्ट के आदेश पर सभी गेट खोले गए, अगली सुनवाई 28 अक्टूबर।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एस एन प्रसाद की अदालत में रविवार को स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के बोकारो स्टील प्लांट के सभी गेटों को बंद किए जाने के मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने अदालत को भरोसा दिलाया कि बोकारो प्लांट के सभी गेट खोलवा दिए गए हैं।
भविष्य में ऐसा न हो, अदालत ने इसे सुनिश्चित करने का कहा है। बोकारो की विधायक श्वेता सिंह के नेतृत्व में आंदोलनकारियों ने विस्थापितों के मुद्दे पर प्रदर्शन करते हुए प्लांट के सभी गेट बंद कर दिए थे, जिससे कर्मचारी प्लांट के अंदर फंस गए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने पूजा अवकाश के दौरान विशेष रूप से बेंच का गठन करते हुए सुनवाई की। बोकारो के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में उपस्थित हुए।
उपायुक्त ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सभी प्रभावी कदम उठाए गए हैं और भविष्य में किसी भी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि गेट नंबर एक सहित सभी 11 गेटों को फिर से खोल दिया गया है और फंसे हुए कर्मचारियों को उनके घर जाने की अनुमति दी गई है।
याचिकाकर्ता के वकील इंद्रजीत सिन्हा और विभाष सिन्हा ने भी पुष्टि की कि सभी 10 अन्य गेट भी खोल दिए गए हैं और
कर्मचारियों का आवागमन सुचारू रूप से हो रहा है। हालांकि, उन्होंने भविष्य में फिर से ऐसी घटना होने की आशंका व्यक्त की। कोर्ट ने उपायुक्त द्वारा दिए गए भरोसे के आधार पर फिलहाल गृह सचिव को नहीं बुलाया।
मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी। कोर्ट ने उपायुक्त और एसपी बोकारो को अगली सुनवाई से पहले अपने बयानों का शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का संदर्भ
याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के दो आदेशों का हवाला दिया। पांच मार्च 2008 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बोकारो स्टील प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण किए गए विस्थापित परिवारों के एक सदस्य को रोजगार देने का इरादा था।
लेकिन यह अनिश्चितकाल तक लाभ बांटने का इरादा नहीं था। 27 सितंबर 2019 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले को अब विश्राम दिया जाना चाहिए।
एमएलए श्वेता सिंह ने बंद कराया था गेट, प्लांट में फंसे थे तीन हजार कर्मी
बोकारो स्टील प्लांट के गेटों पर प्रदर्शन करते हुए स्थानीय विधायक श्वेता सिंह और विस्थापित अपरेंटिस संघ के समर्थकों ने 16 अक्टूबर की सुबह से सभी गेटों को बंद कर दिया था।
इसके कारण लगभग 3,500 कर्मचारी और श्रमिक प्लांट के अंदर फंस गए थे। उन्हें न तो भोजन मिल रहा था, न पानी और न ही दवाई। कर्मचारी 36 से 48 घंटे तक लगातार ड्यूटी पर थे।
प्लांट बंद होने का खतरा
याचिका में बताया गया कि प्लांट अपनी स्थापना के बाद से कभी बंद नहीं हुआ। अगर इसे जबरन बंद किया जाता है तो ब्लास्ट फर्नेस में लगभग 12,000 टन पिघला हुआ स्टील जम सकता है, जिससे हजारों करोड़ रुपये के उपकरणों को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा पर्यावरणीय खतरा और मानव जीवन को गंभीर खतरा भी है।
सीआइएसएफ की सीमित भूमिका
प्लांट परिसर के अंदर सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल तैनात है, लेकिन उनके पास प्लांट की सीमा या गेटों से बाहर जाने का अधिकार नहीं है। प्लांट परिसर के बाहर कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से जिला प्रशासन के अधीन है।
