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26 साल तक BIT मेसरा में झाड़ू-पोछा करती रहीं मां, संघर्ष के दम पर बेटी ने हासिल की इंजीनियरिंग में PhD

By Mansi KumariEdited By: Mansi Kumari
Published: Sun, 11 Oct 2026 10:25 AM (IST)Updated: Sun, 11 Oct 2026 11:35 AM (IST)

BIT मेसरा में 26 साल तक सफाईकर्मी के रूप में काम करने वाली रानू देवी की बेटी आरती कुमारी ने ...और पढ़ें

आरती कुमारी ने BIT मेसरा से इंजीनियरिंग में PhD की। जागरण

आरती कुमारी ने BIT मेसरा से इंजीनियरिंग में PhD की। जागरण

HighLights

  1. मां के 26 साल के संघर्ष के बाद बेटी ने BIT Mesra से हासिल की PhD।

  2. उनकी मां ने 26 साल तक बीआईटी मेसरा में सफाई की।

डिजिटल डेस्क, रांची। मां के हाथों में झाड़ू-पोछा था, लेकिन आंखों में बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना। आर्थिक तंगी थी, जिम्मेदारियां थीं और पति को खोने का दर्द भी। इसके बावजूद रानू देवी ने हार नहीं मानी। पिछले 26 वर्षों से बीआईटी मेसरा में सफाई का काम कर वह अपने परिवार का भरण-पोषण करती रहीं।

उनकी मेहनत का एक ऐसा नतीजा सामने आया है, जो संघर्ष, त्याग और लगन की मिसाल बन गया है। उनकी बेटी आरती कुमारी ने उसी बीआईटी मेसरा से इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की है, जहां उनकी मां वर्षों से काम कर रही हैं।

रांची के तुरुप गांव की रहने वाली आरती अपने गांव की पहली महिला हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। बीआईटी मेसरा के दीक्षांत समारोह में जब उन्हें यह उपलब्धि मिली, तो इसके पीछे मां के उन अनगिनत दिनों का संघर्ष भी था, जिनमें उन्होंने अपनी जरूरतों से पहले बच्चों की पढ़ाई को महत्व दिया।

सप्ताह के 400 रुपये से शुरू हुआ मां का संघर्ष

रानू देवी ने जब बीआईटी मेसरा में काम करना शुरू किया था, तब उन्हें एक सप्ताह के केवल 400 रुपये मिलते थे। आज उन्हें 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। पति के निधन के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी अकेले उनके कंधों पर आ गई थी। सीमित आमदनी में घर चलाना और बच्चों की पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके।

उनकी मेहनत का उद्देश्य सिर्फ परिवार का खर्च चलाना नहीं, बल्कि बच्चों को पढ़ाकर उनके लिए बेहतर भविष्य की राह तैयार करना भी था। सफाई का काम करते हुए उन्होंने बच्चों की परवरिश की और उनकी शिक्षा में कोई बाधा न आए, इसके लिए लगातार प्रयास करती रहीं।

छात्रवृत्ति ने आसान की उच्च शिक्षा की राह

तीन भाई-बहनों में मझली आरती के लिए कमजोर आर्थिक स्थिति के बीच उच्च शिक्षा हासिल करना आसान नहीं था। ऐसे समय में बीआईटी मेसरा और सरकार की ओर से मिली छात्रवृत्ति ने उनकी पढ़ाई में काफी मदद की।

आरती ने आरटीसी से बीटेक और बीआईटी मेसरा से एमटेक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने शोध कार्य जारी रखा और इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की।

आरती की यह उपलब्धि उनकी अपनी मेहनत और लगन का परिणाम है, लेकिन इसके पीछे मां रानू देवी के 26 वर्षों के संघर्ष की भी अहम भूमिका रही है। जिस संस्थान में मां ने मेहनत करके परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं, उसी संस्थान से बेटी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की। आरती की सफलता उनकी मां के त्याग और बेटी के सपनों को पूरा करने के दृढ़ संकल्प की कहानी है। 

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