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AMU की बड़ी उपलब्धि, नोबेल विजेता प्रो. हाल्जेन के आइस क्यूब सहयोग का हिस्सा बने तीन शोधार्थी

By Digital Desk Edited By: Prateek Gupta
Published: Wed, 07 Oct 2026 07:12 PM (IST)

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के तीन पीएचडी शोधार्थी प्रतिष्ठित आइसक्यूब सहयोग परियोजना का हिस्सा बने हैं। यह परियोजना नोबेल पुरस्कार विजेता ...और पढ़ें

AMU के तीन शोधार्थियों को नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. फ्रांसिस हाल्जेन के साथ काम करने का अवसर मिला है।

AMU के तीन शोधार्थियों को नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. फ्रांसिस हाल्जेन के साथ काम करने का अवसर मिला है।

HighLights

  1. परियोजना प्रमुख प्रो. हाल्जेन को 2026 का भौतिकी नोबेल मिलेगा।

  2. यह उपलब्धि एएमयू के न्यूट्रिनो भौतिकी शोध को पहचान दिलाती है।

जागरण संवाददाता, अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के तीन पीएचडी शोधार्थी अनुज कुमार उपाध्याय, गोपाल गर्ग और कृष्णमूर्ति जयकुमार प्रतिष्ठित आइसक्यूब सहयोग परियोजना के सदस्य हैं। परियोजना के प्रमुख और वैचारिक वास्तुकार प्रो. फ्रांसिस हाल्जेन को वर्ष 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिलने से एएमयू के न्यूट्रिनो भौतिकी शोध से जुड़े इस सहयोग को भी विशेष पहचान मिली है।

प्रो. हाल्जेन की दूरदर्शी सोच ने खगोल विज्ञान की नई शाखा ‘न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान’ की नींव रखी। उन्होंने दक्षिणी ध्रुव के नीचे मौजूद विशाल हिमनद बर्फ को न्यूट्रिनो जैसे सूक्ष्म उपपरमाण्विक कणों के प्राकृतिक संसूचक के रूप में उपयोग करने की परिकल्पना की थी। इसी अवधारणा से आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला विकसित हुई, जिसने दूरस्थ ब्रह्मांड से आने वाले न्यूट्रिनो का पता लगाने और उनका अध्ययन करने की नई राह खोली।

अंटार्कटिका के भौगोलिक दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ की गहराई में निर्मित आइसक्यूब वेधशाला उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो के अध्ययन की दुनिया की प्रमुख वैज्ञानिक सुविधाओं में शामिल है। इसके निर्माण की शुरुआत करीब 17 वर्ष पहले हुई थी और यह एक दशक से अधिक समय से आंकड़े एकत्र कर रही है। आइसक्यूब के आंकड़ों के विश्लेषण से आकाशगंगा के बाहर से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो के प्रवाह का अध्ययन संभव हुआ है।

शोधकर्ताओं ने इनके संभावित स्रोतों की पहचान की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है। इनके संकेत कुछ सक्रिय आकाशगंगाओं में अतिविशाल ब्लैक होल के आसपास मौजूद घने क्षेत्रों की ओर इशारा करते हैं, जिन्हें शक्तिशाली ब्रह्मांडीय त्वरक माना जा रहा है। भौतिकी विभाग के अध्यक्ष एवं न्यूट्रिनो भौतिकी विशेषज्ञ प्रो. मोहम्मद सज्जाद अथर के मार्गदर्शन में तीनों शोधार्थी शोध कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने इस उपलब्धि पर शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान एएमयू के न्यूट्रिनो भौतिकी कार्यक्रम के लिए विशेष महत्व रखता है। साथ ही, यह आधुनिक कण भौतिकी के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विश्वविद्यालय की निरंतर भागीदारी को रेखांकित करता है।