विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ना खुदाई ना खनन! स्टील के कचरे से बन गई 1.85 KM लंबी सड़क, गिनीज रिकॉर्ड में छाई जिंदल स्टील

Published: Mon, 14 Sep 2026 08:50 AM (IST)

जिंदल स्टील ने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में स्टील कचरे (स्टील स्लैग) का 100% उपयोग कर 1.85 किलोमीटर लंबी 4-लेन सड़क ...और पढ़ें

पुरस्कार प्राप्त करते चेयरमैन नवीन जिंदल। जागरण

पुरस्कार प्राप्त करते चेयरमैन नवीन जिंदल। जागरण

HighLights

  1. स्टील स्लैग से बनी 1.85 किमी लंबी 4-लेन सड़क।

  2. दुनिया की सबसे लंबी स्टील स्लैग सड़क, गिनीज रिकॉर्ड में।

  3. प्राकृतिक खनन पर निर्भरता कम, लागत में 40% बचत।

संवाद सूत्र, भुरकुंडा (रामगढ़)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में जिंदल स्टील ने देश के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी ने फैक्ट्रियों से निकलने वाले स्टील कचरे (स्टील स्लैग) का 100 प्रतिशत इस्तेमाल करके 1.85 किलोमीटर लंबी 4-लेन सड़क बनाई है।

पूरी तरह से प्रोसेस किए गए स्टील स्लैग से बनी यह दुनिया की सबसे लंबी सड़क है, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड्स में शामिल किया गया है। कचरे से कंचन (वेस्ट टू वेल्थ) का सपना साकार करने वाली इस सड़क के निर्माण में लगभग दो लाख टन प्रोसेस्ड स्टील स्लैग का इस्तेमाल हुआ है। इससे प्राकृतिक पत्थरों की खुदाई और खनन पर निर्भरता खत्म हुई है।

यह सड़क सिर्फ दिखाने के लिए नहीं, बल्कि भारी कामर्शियल गाड़ियों की आवाजाही को ध्यान में रखकर बेहद मजबूत बनाई गई है। इससे पैसे और संसाधनों की बचत होगी। पारंपरिक सड़कों के मुकाबले यह सड़क लगभग 35 प्रतिशत पतली है। इसे बनाने में करीब 40 प्रतिशत लागत की बचत हुई है।

जिंदल स्टील ने सीएसआईआर और सड़क अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर इस स्लैग को वैज्ञानिक प्रक्रिया (क्रशिंग, मेटल निकालना और ग्रेडिंग) के जरिए सड़क बनाने लायक पत्थरों में बदला और सड़क की सबसे निचली परत से लेकर ऊपरी डामर (बिटुमिन) की परत तक इसी का इस्तेमाल किया। सभी कड़े पर्यावरणीय परीक्षणों के बाद ही इसे मंजूरी दी गई है।

जिंदल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल ने इस अवसर पर कहा कि भारत की तरक्की ऐसे नए प्रयोगों से होनी चाहिए जो पर्यावरण को बचाते हुए देश को फायदा पहुंचाएं। यह तकनीक दिखाती है कि कैसे उद्योग का कचरा देश निर्माण का जरिया बन सकता है।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डा जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह प्रोजेक्ट 'वेस्ट टू वेल्थ' (कचरे से संपत्ति) के सपने को साकार करता है।

यह साबित करता है कि हमारी स्वदेशी तकनीक से देश की बड़ी समस्याओं का हल निकाला जा सकता है। जिंदल स्टील ने इस प्रोसेस्ड स्लैग का नाम स्टील ग्रिट रखा है। इसका लोगो आज लोकार्पित किया गया। इस तकनीक को देश भर में बाकी सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल करने के लिए एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। 

यह भी पढ़ें- रांची की मेकॉन ने फिर दिखाया दम! नगरनार के 2 MTPA प्लांट में शुरू हुई अहम प्रक्रिया

यह भी पढ़ें- रांची की कंपनी को मिली बड़ी जिम्मेदारी, भिलाई स्टील प्लांट के मेगा प्रोजेक्ट में DECS और PMCS सेवा देगी मेकॉन