विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चेहरे पर लाल चकत्ते को न समझें सिर्फ एलर्जी, रूबेला के हो सकते हैं संकेत; ऐसे करें पहचान

Published: Thu, 24 Sep 2026 08:45 AM (IST)

रूबेला एक वायरल संक्रमण है जिसके लक्षण चेहरे और गाल पर लाल चकत्ते के रूप में दिख सकते हैं, जो ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।

एआई जेनरेटेड इमेज।

HighLights

  1. रूबेला और मिजल्स अलग-अलग वायरल संक्रमण हैं, लक्षणों में भिन्नता।

  2. गर्भवती महिलाओं के लिए रूबेला संक्रमण अजन्मे बच्चे को गंभीर खतरा।

जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। चेहरे और गाल पर अचानक लाल चकत्ते दिखाई दें तो इसे सामान्य एलर्जी समझकर नजरअंदाज न करें। यह रूबेला का लक्षण भी हो सकता है। मिजल्स (खसरा) और रूबेला (जर्मन खसरा)दोनों वायरल संक्रमण हैं और दोनों में शरीर पर लाल चकत्ते निकलते हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग वायरस से होने वाली बीमारियां हैं।

सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव के अनुसार मिजल्स मॉरबिलीवायरस से, जबकि रूबेला रूबेला वायरस से होता है। रूबेला सामान्य तौर पर हल्का संक्रमण होता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए इसका संक्रमण गंभीर हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान रूबेला होने पर अजन्मे बच्चे में जन्मजात समस्याओं का खतरा रहता है, जिसमें सुनने की क्षमता प्रभावित होना और हृदय संबंधी दोष शामिल हैं।

जानें क्या है मिजल्स और रूबेला में अंतर?

मिजल्स में तेज बुखार, सूखी खांसी,नाक बहना और आंखों में लालिमा व पानी आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। मुंह के अंदर सफेद कोप्लिक स्पॉट्स भी इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। मिजल्स के चकत्ते आमतौर पर कानों के पीछे से शुरू होकर शरीर के अन्य हिस्सों में फैलते हैं।

वहीं रूबेला में चकत्ते अक्सर चेहरे और गाल से शुरू होकर शरीर के अन्य हिस्सों तक फैलते हैं और सामान्यतः हल्के होते हैं। रूबेला में मिजल्स की तरह मुंह के अंदर कोप्लिक स्पॉट्स नहीं होते।

C-353-1-RCH1794-445288

खांसने-छींकने से फैलता है संक्रमण

रूबेला संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली श्वसन बूंदों के संपर्क में आने से फैल सकता है। संक्रमित गर्भवती महिला से उसके अजन्मे बच्चे में भी संक्रमण पहुंच सकता है। इसलिए संक्रमण की आशंका होने पर विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं से दूरी रखना जरूरी है।

रूबेला होने पर क्या करें?

  • पर्याप्त आराम करें और पानी व अन्य तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में लें।
  • बुखार या जोड़ों के दर्द के लिए डॉक्टर की सलाह से ही दवा लें।
  • संक्रमित व्यक्ति को, विशेषकर गर्भवती महिलाओं से, अलग रखें।
  • बच्चों को नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोने की आदत डालें।
  • खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें तथा स्वच्छता का ध्यान रखें।
  • लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लें और स्वयं दवा लेने से बचें। 

यह भी पढ़ें- झारखंड के सिमडेगा में मिला रूबेला वायरस का पहला केस, बच्चों के लिए शुरू हुआ विशेष टीकाकरण अभियान

यह भी पढ़ें- खसरा-रूबेला पर बड़ा अलर्ट, बिहार में 58 हजार बच्चे टीके से वंचित, 265 प्रखंडों में बढ़ी चिंता