खसरा-रूबेला पर बड़ा अलर्ट, बिहार में 58 हजार बच्चे टीके से वंचित, 265 प्रखंडों में बढ़ी चिंता
बिहार में 58 हजार से अधिक बच्चे खसरा-रूबेला टीके से वंचित हैं, जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग 31 अगस्त तक विशेष ...और पढ़ें

इसमें एआई जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
बिहार में 58 हजार से अधिक बच्चे खसरा-रूबेला टीके से वंचित।
31 अगस्त तक सभी छूटे बच्चों का टीकाकरण लक्ष्य निर्धारित।
जनप्रतिनिधियों और धर्मगुरुओं की मदद से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
प्रकाश कुमार, समस्तीपुर। खसरा-रूबेला (एमआर) के उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण से छूटे बच्चों को चिह्नित कर रहा है। राज्य में एमआर-1 से वंचित 35 हजार 969 और एमआर-2 का टीका नहीं लेने वाले 22 हजार 33 बच्चे चिह्नित किए गए हैं।
कुल 58 हजार दो बच्चे खसरा-रूबेला के दोनों चरणों के टीके से वंचित हैं। राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी बच्चों का 31 अगस्त तक टीकाकरण पूरा कराने का निर्देश दिया है।
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को पत्र भेजकर नियमित टीकाकरण दिवस के अतिरिक्त विशेष सत्र का निर्देश दिया है।
छूटे बच्चों की पहचान के लिए सर्वे कर ड्यू लिस्ट तैयार की जाएगी। निर्देश के मुताबिक, नौ माह से पांच वर्ष तक की आयु के एमआर-1 और एमआर-2 टीके से छूटे बच्चों की सर्वे सूची के आधार पर दोबारा सर्वे व आकलन किया जाएगा।
छूटे बच्चों को ड्यू लिस्ट में शामिल करते हुए खसरा-रूबेला के निर्धारित टीके के साथ संबंधित सत्र की सूची में दर्ज किया जाएगा। ड्यू लिस्ट का प्रखंड स्तर से संकलन कर 14 अगस्त तक जिला और राज्य स्तर पर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
इसके बाद प्रखंड और जिला स्तर पर टीकाकरण की दैनिक प्रगति की समीक्षा होगी। 31 अगस्त तक शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए निगरानी एवं पर्यवेक्षण भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. विशाल कुमार ने बताया कि खसरा-रूबेला के उन्मूलन के लिए अभियान चलाकर वंचित बच्चों का शत प्रतिशत आच्छादन सुनिश्चित किया जा रहा है।
161 प्रखंडों में एमआर-1 की कवरेज 95 प्रतिशत से कम
जनवरी से जून, 2026 तक के टीकाकरण आंकड़ों की समीक्षा में राज्य के 161 प्रखंडों में एमआर-1 की कवरेज 95 प्रतिशत से कम पाई गई। वहीं, 104 प्रखंडों में एमआर-2 की कवरेज 95 प्रतिशत से कम रही। इन प्रखंडों में टीकाकरण से छूटे बच्चों की सूची तैयार कर विशेष अभियान चलाने को कहा गया है।
जनप्रतिनिधियों से लेकर धर्मगुरुओं तक की ली जाएगी मदद
छूटे बच्चों का टीकाकरण कराने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों, आइसीडीएस, जीविका समूहों, सिविल सोसायटी संगठनों और धर्मगुरुओं की मदद से अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य किसी भी पात्र बच्चे को टीकाकरण से वंचित नहीं रहने देना है। टीकाकरण के बाद बच्चों का डाटा एचएमआइएस और यू-विन पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी को दैनिक आच्छादन की रिपोर्ट राज्य स्तर पर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
