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कभी अफीम की खेती के लिए चर्चा में था पलामू का मनातू, अब 70 एकड़ में मडुआ उगाकर बदलाव की नई कहानी लिख रही महिलाएं

Published: Thu, 29 Oct 2026 04:53 PM (IST)

पलामू के मनातू में 200 से अधिक महिलाएं 70 एकड़ से ज्यादा जमीन पर मडुआ की खेती कर रही हैं, ...और पढ़ें

मनातू में 200 से अधिक महिलाएं 70 एकड़ में मडुआ उगा रहीं। जागरण

मनातू में 200 से अधिक महिलाएं 70 एकड़ में मडुआ उगा रहीं। जागरण

HighLights

  1. पलामू के मनातू में 200 से अधिक महिलाएं 70 एकड़ में मडुआ उगा रहीं।

  2. कभी अफीम की खेती के लिए चर्चा में रहा मनातू अब बदलाव की राह पर है।

संवाद सूत्र, तरहसी (पलामू)। कभी नक्सलवाद और अफीम की खेती के लिए चर्चा में रहने वाले मनातू में अब बदलाव की नई कहानी लिखी जा रही है। जिन खेतों में कभी अवैध अफीम की खेती चुनौती बनी हुई थी, उन्हीं खेतों में आज मडुआ की बालियां महिलाओं के सपनों को आकार दे रही हैं।

मेहनत और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ यहां की महिलाएं खेती के जरिए अपने इलाके की पहचान बदलने में जुटी हैं। मनातू में 200 से अधिक महिलाएं 70 एकड़ से ज्यादा जमीन पर मडुआ की खेती कर रही हैं। यह पहल महिला सशक्तीकरण और वैकल्पिक आजीविका की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अफीम की चुनौती के बीच मडुआ से बदलाव की दस्तक

मनातू लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है। अफीम की खेती भी इस इलाके के सामने गंभीर चुनौती रही है। अब मोटे अनाज की खेती के जरिए ग्रामीण परिवारों को वैकल्पिक आजीविका से जोड़ने की पहल की जा रही है।

मडुआ की खेती इस बदलाव का नया चेहरा बन रही है। खेतों में लहलहाती फसल महिलाओं को भरोसा दे रही है कि मेहनत और सही अवसर मिलें, तो गांवों की पहचान बदली जा सकती है।

अरहर-मक्का से आगे बढ़ीं सरिता, मडुआ में देख रहीं सुनहरा भविष्य

मनातू के उरुर गांव की महिला किसान सरिता देवी पहले अरहर और मक्का की खेती करती थीं। इस बार उन्होंने मडुआ की खेती अपनाई है। उनके लिए यह नई फसल बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर आई है। सरिता देवी कहती हैं, 'मडुआ काफी महत्वपूर्ण और पौष्टिक अनाज है।

इस बार इसकी खेती कर रही हूं। पहले अरहर और मक्का उगाती थी। लोगों का परंपरागत खेती से जुड़ना अच्छी बात है। इससे हमारे इलाके की पहचान बदल सकती है।' सरिता की पहल उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेती के जरिए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहती हैं। मडुआ की खेती से उन्हें आय का नया विकल्प मिलने की उम्मीद है।

बीज से बाजार तक महिलाओं को जोड़ने की तैयारी

जेएसएलपीएस की मनातू प्रखंड की ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर कुमारी नम्रता के अनुसार, सुदूरवर्ती क्षेत्र की महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को वैकल्पिक आजीविका से जोड़ने के उद्देश्य से मडुआ की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। फिलहाल 200 से अधिक महिलाएं इस पहल से जुड़ी हैं। आने वाले समय में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की योजना है। 

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