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महात्मा गांधी के पलामू दौरे की अनसुनी कहानी, पुस्तकालय के रजिस्टर में आज भी सुरक्षित हैं उनके हस्ताक्षर

Published: Thu, 01 Oct 2026 12:58 PM (IST)

जनवरी 1927 में महात्मा गांधी ने तीन दिवसीय पलामू (डालटनगंज) का दौरा किया था, जहाँ उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों का हौसला ...और पढ़ें

जनवरी 1927 में महात्मा गांधी का तीन दिवसीय डालटनगंज दौरा।

जनवरी 1927 में महात्मा गांधी का तीन दिवसीय डालटनगंज दौरा।

HighLights

  1. जनवरी 1927 में महात्मा गांधी का तीन दिवसीय डालटनगंज दौरा।

  2. गांधीजी ने स्वतंत्रता सेनानियों से मिलकर उनका हौसला बढ़ाया था।

जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। पलामू की धरती भी उस ऐतिहासिक दौर की साक्षी रही है, जब देश को आजादी दिलाने के लिए महात्मा गांधी जनजागरण अभियान में जुटे थे। जनवरी 1927 में गांधीजी तीन दिवसीय दौरे पर पलामू पहुंचे थे।

उस समय जिला मुख्यालय डालटनगंज में उनका प्रवास छेदीलाल सर्राफ के बगान में हुआ था। यह पलामू के इतिहास का वह अध्याय है, जिसकी स्मृतियां आज भी पुराने दस्तावेजों और स्थानीय परिवारों के पास सुरक्षित हैं।

11 जनवरी 1927 को हुआ था अभिनंदन

पलामू प्रवास के दौरान 11 जनवरी 1927 का दिन खास रहा। डालटनगंज म्यूनिसिपल बोर्ड की ओर से महात्मा गांधी को अभिनंदन पत्र सौंपकर उनका स्वागत किया गया था।

वहीं तत्कालीन नागरिक मंच के अध्यक्ष स्व. जयवंश सहाय के नेतृत्व में नागरिकों ने भी गांधीजी का अभिनंदन किया और उन्हें स्मारपत्र सौंपा था। गांधीजी के पलामू आगमन का यह दस्तावेजी पक्ष उस समय के सामाजिक और राजनीतिक माहौल की झलक देता है।

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मारवाड़ी पुस्तकालय में दर्ज हुई गांधीजी की स्मृति

गांधीजी ने 11 जनवरी को डालटनगंज स्थित मारवाड़ी पुस्तकालय का भी अवलोकन किया था। पुस्तकालय के रजिस्टर में उन्होंने अपने हाथों से पुस्तकालय के उज्ज्वल भविष्य की कामना दर्ज की थी। गांधीजी के हस्तलिखित विचारों वाला यह रजिस्टर आज उस ऐतिहासिक यात्रा की महत्वपूर्ण स्मृति माना जाता है।

स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े लोगों से की थी मुलाकात

पलामू प्रवास के दौरान गांधीजी ने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्थानीय लोगों से मुलाकात की थी। छेदीलाल सर्राफ के बगान में ठहरने के दौरान वह आंदोलन के सहयोगियों से मिलते और उनका उत्साह बढ़ाते थे। उनका दौरा केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं था, बल्कि स्थानीय स्तर पर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े लोगों को प्रेरित करने का भी माध्यम बना था।

सहाय परिवार के पास सुरक्षित हैं स्मृतियां

तत्कालीन नागरिक मंच के अध्यक्ष स्व. जयवंश सहाय के पौत्र और स्वतंत्रता सेनानी स्व. नीलकंठ सहाय के पुत्र अमित सहाय के अनुसार, गांधीजी के पलामू आगमन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण स्मृतियां परिवार से जुड़ी रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके दादा जयवंश सहाय के नेतृत्व में नागरिक मंच ने गांधीजी का अभिनंदन किया था और उन्हें स्मारपत्र सौंपा था।

अमित सहाय बताते हैं कि गांधीजी के पलामू प्रवास के दौरान उनका ठहराव छेदीलाल सर्राफ के बगान में हुआ था। यहां वह स्वतंत्रता संग्राम के सहयोगियों से मिलकर उनका हौसला बढ़ाते थे।

इतिहास के पन्नों में दर्ज है पलामू से गांधीजी का जुड़ाव

आजादी के आंदोलन का इतिहास जब राष्ट्रीय स्तर पर पढ़ा जाता है तो गांधीजी के देशव्यापी दौरों का उल्लेख मिलता है। पलामू भी उस यात्रा का हिस्सा रहा है।

जनवरी 1927 में गांधीजी का डालटनगंज आना इस बात का प्रमाण है कि स्वतंत्रता आंदोलन की राष्ट्रीय चेतना पलामू तक पहुंच चुकी थी। म्यूनिसिपल बोर्ड का अभिनंदन पत्र, नागरिक मंच का स्मारपत्र और मारवाड़ी पुस्तकालय के रजिस्टर में दर्ज गांधीजी की शुभकामना-ये सभी उस दौर की ऐतिहासिक कड़ियों को जोड़ते हैं। 

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