झारखंड में मिठाइयों में मिलावट का खेल बेखौफ, जांच के लिए सिर्फ एक लैब; रिपोर्ट आने में लग जाते हैं महीने
झारखंड में मिठाइयों में मिलावट का कारोबार बेखौफ जारी है, क्योंकि पूरे राज्य में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए ...और पढ़ें

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HighLights
झारखंड में खाद्य जांच के लिए सिर्फ एक प्रयोगशाला।
रिपोर्ट आने में महीनों लगते, मिलावटी मिठाई बिक जाती।
जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। मिठाई में मिलावट का खेल बेखौफ, खाद्य सुरक्षा का सरकारी पहरा लाचार! त्योहारों पर बाजार में बिकने वाली मिठाइयों की शुद्धता जांचने का तंत्र ही सवालों के घेरे में है। पूरे झारखंड में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए महज एक प्रयोगशाला है।
राज्यभर के सैंपलों का बोझ इसी केंद्र पर है, जहां अंतिम रिपोर्ट प्रमाणित करने वाला अधिकारी भी सिर्फ एक है। नतीजा, जांच से रिपोर्ट आने तक महीनों गुजर जाते हैं। तब तक मिलावटी मिठाइयां बाजार से बिक चुकी होती हैं और उपभोक्ता उन्हें खा चुके होते हैं। पलामू में भी जांच की रफ्तार सुस्त है।
विभाग सैंपल तो उठाता है, लेकिन रिपोर्ट आने तक मिलावट का कारोबार जारी रहता है। ऐसे में सवाल है कि जब मिलावट की पुष्टि ही महीनों बाद होगी, तो लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर समय रहते शिकंजा कैसे कसेगा?
स्थानीय स्तर पर मैदा, स्टार्च और प्रतिबंधित रंगों की जांच
खाद्य सुरक्षा विभाग के पदाधिकारी मिठाई दुकानों से सैंपल लेते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर मुख्य रूप से मैदा, स्टार्च और प्रतिबंधित रंगों की ही जांच होती है। अन्य मानकों की जांच के लिए सैंपल रांची स्थित प्रयोगशाला भेजना पड़ता है। वहां रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं।
ऐसे में त्योहार के दौरान लिए गए सैंपलों की जांच पूरी होने तक संबंधित मिठाइयां बाजार से बिक चुकी होती हैं। देरी के कारण मिलावट की पुष्टि के बाद भी तत्काल कार्रवाई का उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है।
मैदा की मिलावट पर कार्रवाई का कानूनी पेच
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी लव कुमार गुप्ता ने बताया कि मिठाई में मैदा या स्टार्च की मिलावट अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। इसलिए केवल मैदा या स्टार्च मिलने पर सीधे कड़ी कार्रवाई नहीं की जा सकती।
कार्रवाई तभी संभव है, जब सैंपल लेते समय दुकानदार यह घोषित करे कि संबंधित छेना, पनीर या खोया की मिठाई में मैदा नहीं मिलाया गया है और जांच में मैदा पाया जाए। ऐसी स्थिति में दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
जांच व्यवस्था में सुधार की जरूरत
त्योहारों में मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। लेकिन एक ही प्रयोगशाला पर पूरे राज्य का भार, रिपोर्ट में देरी और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया मिलावट पर नियंत्रण की राह में बाधा हैं।
जरूरत है कि जांच प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाई जाए, रिपोर्ट जारी करने की समयसीमा तय हो और खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी मजबूत की जाए, ताकि मिलावटखोरों पर समय रहते कार्रवाई हो सके।
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