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पलामू के इस देवी मंदिर में वर्ष 1887 से लग रहा मेला, जिन्न बाबा की मजार पर भी होती है चादरपोशी

Published: Tue, 13 Oct 2026 06:00 AM (GMT+05:30)

हैदरनगर के प्रसिद्ध सिद्धपीठ देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र पर भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां 1887 से मेला लगता ...और पढ़ें

हैदरनगर सिद्धपीठ देवी मंदिर। (एआई जेनरेटेड इमेज)

हैदरनगर सिद्धपीठ देवी मंदिर। (एआई जेनरेटेड इमेज)

HighLights

  1. हैदरनगर सिद्धपीठ देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र पर भारी भीड़।

  2. 1887 से चली आ रही मेले की परंपरा, दूर-दूर से श्रद्धालु।

संवाद सूत्र, हैदरनगर (पलामू)। हैदरनगर स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। वर्ष 1887 से यहां चैत्र और शारदीय नवरात्र पर मेले की परंपरा चली आ रही है। बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन और मन्नत मांगने पहुंच रहे हैं।

मान्यता है कि मंदिर में पूजा-अर्चना करने से भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है और संतान की प्राप्ति होती है। मंदिर परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों के साथ जिन्न बाबा की मजार भी है। यहां पुजारी पूजा-पाठ कराते हैं, वहीं मुस्लिम मौलवियों की मौजूदगी में फातेहा और चादरपोशी की परंपरा भी निभाई जाती है। धार्मिक आस्था के साथ आपसी सद्भाव की यह परंपरा मंदिर को विशिष्ट पहचान देती है।

छोटे मंदिर से विकसित हुआ सिद्धपीठ

76 वर्षीय समाजसेवी पंडित कुंडल तिवारी बताते हैं कि पहले यहां कच्चे और छोटे कमरे में छोटी मां की मूर्ति स्थापित थी। समय के साथ मंदिर का विस्तार हुआ। कभी यहां रामलीला मंडली की प्रस्तुतियां भी होती थीं। सुप्रसिद्ध व्यास नागा बाबा के कार्यकाल में मंदिर का काफी विकास हुआ।

Palamu Mandir

बाद में मुनी बाबा ने लंबे समय तक पूजा-अर्चना कराई। भाजपा कार्यसमिति सदस्य रविन्द्र कुमार सिंह के अनुसार, विशाल गुंबदनुमा देवी मंदिर के अलावा राम-जानकी मंदिर, शिव-पार्वती मंदिर और विशाल पीपल का पेड़ भी श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। यहां चीनी से बनी मिठाई मुख्य प्रसाद है। श्रद्धालु नारियल, सिंदूर और चुनरी चढ़ाकर माता से मन्नत मांगते हैं।

रविन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि उपायुक्त दिलीप सिंह शेखावत की पहल पर चार वर्ष बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए शौचालय का निर्माण कराया गया है। इसके लिए मंदिर समिति ने प्रशासन के प्रति आभार जताया है। 

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