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पाकुड़: छात्रा की मौत के बाद छात्रावास की व्यवस्था पर सवाल, बीमार बच्ची को अस्पताल क्यों नहीं ले गए?

Published: Wed, 14 Oct 2026 02:48 PM (IST)

Pakur Rajni Pahadin Death: लिट्टीपाड़ा के एक छात्रावास में छात्रा रजनी पहाड़िन की संदिग्ध मौत के बाद बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पढ़ाई पर सवाल उठे हैं।

लिट्टीपाड़ा के बांडू स्थित मिशन इंडिया मूवमेंट छात्रावास की छात्रा रजनी पहाड़िन की माैत की जांच करती पुलिस और जुटे लोग। (फोटो जागरण)

लिट्टीपाड़ा के बांडू स्थित मिशन इंडिया मूवमेंट छात्रावास की छात्रा रजनी पहाड़िन की माैत की जांच करती पुलिस और जुटे लोग। (फोटो जागरण)

संवाद सूत्र, लिट्टीपाड़ा (पाकुड़)। झारखंड के पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा के बांडू स्थित मिशन इंडिया मूवमेंट छात्रावास में छात्रा रजनी पहाड़िन की संदिग्ध परिस्थिति में मौत के बाद वहां रहने वाले बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और पढ़ाई की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रबंधन के अनुसार, छात्रावास में पाकुड़ और साहिबगंज जिले के 80 बच्चे रहते हैं, जबकि उनका नामांकन आसपास के सरकारी विद्यालयों में कराया गया है।

घटना के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि छात्रावास का संचालन निर्धारित नियमों के अनुरूप हो रहा है या नहीं, बच्चों की देखरेख की क्या व्यवस्था है और तबीयत बिगड़ने पर समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए क्या इंतजाम हैं।

बच्ची काे बीमार होने की स्थिति में उसे सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय झोला छाप ग्रामीण चिकित्सक के पास क्यों ले जाया गया। हालांकि जिला प्रशासन ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

रविवार की देर रात हुई थी माैत 

बांडू स्थित मिशन इंडिया मूवमेंट हास्टल (छात्रावास) में रविवार की देर रात छात्रा रजनी पहाड़िन की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी। स्वजन छात्रावास पहुंचकर जानकारी ली। स्वजनों का गुस्सा फूट पड़ा।

पुलिस निरीक्षक अनुप रोशन भेंगरा, अंचलाधिकारी पवन कुमार, थाना प्रभारी नागेंद्र कुमार दलबल के साथ छात्रावास पहुंच स्थिति को नियंत्रण में किया। मृतक छात्रा साहिबगंज जिले के तालझारी थाना क्षेत्र के बेहड़ा पहाड़ गांव निवासी जबरा पहाड़िया की पुत्री है।

पिता जबरा ने बताया कि उनकी बेटी पिछले नौ माह से उक्त छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही थी। जबरा ने बताया कि छात्रावास प्रबंधन ने शुरुआत में कहा था कि वे बच्ची को अपने पास रखकर बेहतरीन शिक्षा देंगे, लेकिन बाद में छात्रावास पहुंचने पर पता चला कि बच्ची का नामांकन पास के ही एक सरकारी स्कूल में करा दिया गया है।

सरकारी स्कूल छात्रावास से करीब तीन किलोमीटर दूर है। जबरा ने बताया कि छात्रावास प्रबंधन से बेटी की मौत का कारण पूछने पर बीमारी का हवाला दिया। इधर, मिशन इंडिया मूवमेंट के मैनेजर सुलेमान मालतो ने बताया कि छात्रावास वर्ष 2024 से संचालित हो रहा है।

उन्होंने बताया कि रविवार की शाम रजनी की तबीयत बिगड़ गई थी। उसका इलाज रांगा के ग्रामीण चिकित्सक से कराया। रात्रि करीब 10 बजे रजनी की मौत हो गई। इसकी सूचना रात में ही स्वजनों को दे दी गई थी।

पहले भी छात्रा की मौत पर उठे थे सवाल

तीन साल पूर्व लिट्टीपाड़ा के लबदा घाटी स्थित आवासीय मिशन स्कूल में छात्रा 14 वर्षीय पहाड़िया छात्रा मनीषा मालतो की मौत के बाद भी परिजनों ने स्कूल प्रबंधन और चंद्रगोड़ा मिशन अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया था।

उस समय दो अन्य छात्राएं 14 वर्षीय सबीना मालतो और 12 साल की रेबिका पहाड़िन भी बीमार हुई थीं। स्कूल प्रबंधक बरनाबास हांसदा के अनुसार, पेट दर्द की शिकायत के बाद छात्राओं को अस्पताल ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान मनीषा की मौत हो गई थी।

घटना के बाद छात्रा की मौत के कारणों को लेकर अलग-अलग आशंकाएं सामने आई थीं। प्रारंभ में विषाक्त पदार्थ के सेवन की आशंका जताई गई थी, जबकि चिकित्सक की ओर से जहरीले जीव के काटने की संभावना की बात भी सामने आई थी।

तत्कालीन एसडीपीओ ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव को कब्र से निकालकर दुमका अस्पताल में पोस्टमार्टम व फारेंसिक जांच करायी गई थी।

ताजा घटना ने एक बार फिर से आवासीय विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, बीमारी की स्थिति में समय पर उपचार और मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच की जरूरत को रेखांकित करते हैं।

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बच्ची की मौत किन कारणों से हुई, इसकी जांच कराई जाएगी। कहीं कोई लापरवाही तो नहीं हुई, इसकी भी पड़ताल होगी। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

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मेघा भारद्वाज, उपायुक्त,पाकुड़