4 महीने से नहीं मिली मध्याह्न भोजन की राशि, उधार की दाल-चावल से बच्चों का पेट भर रहे कोडरमा के सरकारी स्कूल
कोडरमा के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है, जहां कुकिंग कॉस्ट की राशि ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।
HighLights
कोडरमा स्कूलों में मध्याह्न भोजन का बजट ऋणात्मक।
कुकिंग कॉस्ट की राशि छह माह से बकाया।
जागरण संवाददाता, कोडरमा। कोडरमा जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही है। एक ओर मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना के तहत कुकिंग कास्ट की राशि पिछले करीब चार महीने से बकाया है।
वहीं दूसरी ओर भुगतान की नई व्यवस्था और जीएसटी बिल की अनिवार्यता ने विद्यालयों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। स्थिति यह है कि कई स्कूलों का बजट डेढ़ से तीन लाख रुपये तक ऋणात्मक हो गया है। प्रधानाध्यापक और विद्यालय प्रबंधन समितियां स्थानीय दुकानदारों से उधार लेकर बच्चों के भोजन की व्यवस्था कर रही हैं।
राशि के अभाव में शिक्षकों को अपनी जेब से खर्च करने की नौबत भी आ रही है। इस मामले में अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने बकाया राशि के तत्काल भुगतान और शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव रोकने की मांग की है।
बताया जाता है कि कुछ समय पहले आवंटन आया था, लेकिन पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण राशि वापस हो गई। हालांकि, इस संबंध में विभागीय पुष्टि और वर्तमान भुगतान स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
अप्रैल से चल रहा है राशि बकाया
वित्तीय वर्ष 2026-27 में मध्याह्न भोजन संचालन के लिए कुकिंग कॉस्ट की राशि विद्यालयों की सरस्वती वाहिनी संचालन समितियों के खातों में उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।
संघ के अनुसार, अधिकांश विद्यालयों में अप्रैल, मई और जून से ही राशि के अभाव में भोजन संचालन प्रभावित होने लगा था। जिन स्कूलों में पूरक पोषाहार मद में राशि उपलब्ध थी, वहां उससे भोजन संचालित किया गया। लेकिन यह राशि समाप्त होने के बाद कई विद्यालयों के सामने भोजन व्यवस्था जारी रखना मुश्किल हो गया।
बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी के कारण प्रधानाध्यापक स्थानीय दुकानदारों से उधार पर दाल, तेल, मसाला, सब्जी और अन्य खाद्य सामग्री खरीद रहे हैं। लगातार भुगतान नहीं होने से दुकानदारों की पूंजी फंस रही है।
ऐसे में स्कूलों पर बकाया बढ़ता जा रहा है। त्योहारों के दौरान दुकानदारों की ओर से भुगतान का दबाव बढ़ने से विद्यालय प्रबंधन की परेशानी और गहरा गई है।
अंडा-फल की राशि मिली, दाल-तेल का इंतजार
विद्यालयों को उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अंडा एवं फल मद की राशि दिसंबर तक माता समितियों के खातों में भेजी गई थी। हालांकि, दाल, तेल, मसाला, सब्जी और कुकिंग गैस जैसी आवश्यक सामग्रियों के लिए राशि का भुगतान लंबित बताया जा रहा है। इससे भोजन की व्यवस्था के लिए स्कूलों की स्थानीय दुकानदारों पर निर्भरता बढ़ गई है।
शिक्षकों पर दबाव बनाने का आरोप, संघ ने उठाई आवाज
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के सचिव राममूर्ति ठाकुर ने विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया है कि राशि उपलब्ध नहीं होने के बावजूद जिला और प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों ने प्रधानाध्यापकों पर किसी भी परिस्थिति में मध्याह्न भोजन बंद नहीं करने का दबाव बनाया।
संघ के अनुसार, शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर भयभीत किया गया। राशि के अभाव की लिखित सूचना देने वाले कुछ प्रधानाध्यापकों से स्पष्टीकरण मांगने और वेतन रोकने जैसी कार्रवाई का दबाव बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है।
एसएनए स्पर्श प्रणाली के बकाये से समायोजन की चुनौती
संघ ने कहा है कि वर्तमान में एसएनए स्पर्श वित्तीय प्रणाली के तहत भुगतान सीधे आपूर्तिकर्ताओं के माध्यम से किए जाने का प्राविधान है। ऐसे में अप्रैल से सितंबर 2026 तक तथा उसके बाद खर्च की गई राशि का समायोजन करना कठिन हो सकता है।
संघ ने बकाया राशि की गणना कर संबंधित प्रधानाध्यापकों को भुगतान करने की मांग की है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर सीमित अवधि के लिए प्रधानाध्यापकों को वेंडर मानकर भुगतान की संभावना पर विचार करने का सुझाव दिया है।
विद्यालय विकास मद की राशि का इंतजार भी स्कूलों की परेशानी बढ़ा रहा है। संघ के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के विद्यालयों को यह राशि नहीं मिली थी। चालू वित्तीय वर्ष में भी अक्टूबर तक राशि मिलने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे साफ-सफाई, मरम्मत, रंगाई-पुताई और शैक्षणिक सामग्री की खरीद जैसे नियमित खर्च प्रभावित हो रहे हैं।
