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बच्चों का निवाला बचाने के लिए कर्ज ले रहे गुरुजी, झारखंड के 57 स्कूलों में उधार के भरोसे मध्याह्न भोजन

Published: Fri, 16 Oct 2026 05:13 PM (IST)

सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के लिए राशि समय पर न मिलने से प्रधानाध्यापक परेशान हैं। गढ़वा के भवनाथपुर ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. मध्याह्न भोजन राशि न मिलने से प्रधानाध्यापक परेशान।

  2. दुकानदारों से उधार लेकर चल रहा स्कूलों का एमडीएम।

प्रदीप चौबे, भवनाथपुर (गढ़वा)। सरकारी व्यवस्था की लापरवाही का खामियाजा भवनाथपुर प्रखंड के सरकारी विद्यालयों को भुगतना पड़ रहा है। मध्याह्न भोजन योजना के संचालन के लिए राशि समय पर नहीं मिलने के कारण कई विद्यालयों में प्रधानाध्यापक स्थानीय दुकानदारों से उधार लेकर बच्चों का निवाला जुटा रहे हैं।

राजकीय प्राथमिक स्कूल अरसली उत्तरी, राजकीय प्राथमिक विद्यालय झुमरी, पीएमश्री उच्च विद्यालय घाघरा और उत्क्रमित विद्यालय दौंड़ खैरा समेत 57 विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था दुकानदारों के भरोसे चल रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि आर्थिक संकट के बावजूद विद्यालयों में नियमित रूप से मध्याह्न भोजन संचालित किया जा रहा है।

दो साल से विकास मद की राशि भी नहीं मिली

भवनाथपुर प्रखंड के 57 सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की राशि और विद्यालय विकास मद के भुगतान का संकट सामने आने के बाद भवनाथपुर प्रखंड के विद्यालयों की पड़ताल में भी ऐसी ही परेशानी उभरकर सामने आई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 से विद्यालयों को विद्यालय विकास मद की राशि नहीं मिलने की शिकायत है।

वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में मध्याह्न भोजन योजना के तहत अंडा और फल मद की राशि का भुगतान नहीं होने से विद्यालयों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रधानाध्यापकों को अपने स्तर से व्यवस्था बनाए रखने के लिए दुकानदारों से उधार लेना पड़ रहा है।

लाखों रुपये के कर्ज में दबे प्रधानाध्यापक

विद्यालयों की व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई प्रधानाध्यापक स्थानीय दुकानदारों से खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान उधार ले रहे हैं। कुछ प्रधानाध्यापकों पर लाखों रुपये का बकाया हो चुका है। बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाने के चक्कर में प्रधानाध्यापक खुद आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।

राशि का भुगतान कब होगा, इसे लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में दुकानदारों का बकाया चुकाना और आगे भी भोजन की व्यवस्था बनाए रखना उनके लिए चुनौती बन गया है।

बच्चों का निवाला बचाने की जद्दोजहद

विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बंद न हो, इसके लिए प्रधानाध्यापक लगातार प्रयास कर रहे हैं। लेकिन सरकारी मद की राशि समय पर उपलब्ध नहीं होने से व्यवस्था की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षकों का दायित्व पढ़ाई के साथ बच्चों के पोषण और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी साख और स्थानीय दुकानदारों के भरोसे पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

सरकार की मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ विद्यालयों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना है। ऐसे में राशि के भुगतान में देरी होने से योजना के संचालन में अनावश्यक दबाव पैदा हो रहा है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करे, ताकि प्रधानाध्यापकों को कर्ज लेकर विद्यालय चलाने की मजबूरी से राहत मिले और बच्चों को निर्बाध रूप से भोजन मिलता रहे। 

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