कोचिंग छात्रा ने लगाया कई बार यौन शोषण किए जाने का आरोप, कोडरमा से सिविल सर्जन डॉ अनिल गिरफ्तार
कोडरमा के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार यादव को 16 वर्षीय नाबालिग के यौन शोषण के गंभीर आरोप में गिरफ्तार ...और पढ़ें

इलाज के सिलसिले में संपर्क में आने के बाद छात्रा से शोषण का आरोप।
HighLights
कोडरमा सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार यादव गिरफ्तार।
16 वर्षीय नाबालिग से यौन शोषण का गंभीर आरोप।
पीड़िता ने महिला थाना में कई बार शोषण का बयान दिया।
संवाद सूत्र, कोडरमा। कोडरमा के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार यादव पर 16 वर्षीय नाबालिग के यौन शोषण का गंभीर आरोप लगा है। मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सिविल सर्जन को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता हजारीबाग जिले की रहने वाली है और बरही के आसपास एक कोचिंग संस्थान में पढ़ाई करती है।
जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात पीड़िता का बयान कोडरमा महिला थाने में दर्ज किया गया। जिले के वरीय अधिकारियों और महिला पुलिस की उपस्थिति में उसका बयान लिया गया। मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण जिले के अधिकारी इस मामले में खुलकर बोलने से बच रहे हैं।
महिला थाना सूत्रों के अनुसार, पीड़िता ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि डॉ. अनिल कुमार यादव ने कई बार उसका यौन शोषण किया। बताया जाता है कि पीड़िता इलाज के सिलसिले में सिविल सर्जन के संपर्क में आई थी।
इसी दौरान उसे कथित तौर पर झांसे में लेकर यह कृत्य किए जाने का आरोप है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोडरमा महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज की।

निजी क्लिनिक भी संचालित, जेल भेजने की तैयारी
उल्लेखनीय है कि सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार यादव का कोडरमा में निजी क्लिनिक भी संचालित है। सेवाकाल के अधिकांश दिनों तक कोडरमा व इसके आसपास के क्षेत्रों में ही पदस्थापित रहे 65 वर्षीय डॉक्टर अनिल कुमार यादव की सास स्वर्गीय डॉ. उर्मिला चौधरी भी कोडरमा की सिविल सर्जन रह चुकी हैं।
अपने संपर्कों के कारण वह कोडरमा क्षेत्र में काफी प्रभाव रखते हैं। तिलैया डैम के किनारे उनका निजी क्लिनिक के साथ रिसॉर्ट संचालित होने की भी जानकारी है। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक न्यायिक प्रक्रिया पूरी कर उन्हें जेल भेजने की तैयारी की जा रही है।
जिले में मामले की चर्चा
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ पदाधिकारी पर नाबालिग से यौन शोषण के आरोप के बाद से यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। सार्वजनिक पद पर आसीन अधिकारी के विरुद्ध इस तरह के गंभीर आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, आरोपों की सत्यता पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्री से प्रशस्ति पत्र प्राप्त करते सिविल सर्जन। (फोटो: फाइल)
