विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चिट्ठियों से बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं तक, 172 साल में ऐसे बदला डाकघर; कोडरमा में आज भी 85 डाकघरों का नेटवर्क

Published: Thu, 01 Oct 2026 11:26 AM (IST)

डाक विभाग ने चिट्ठियों से लेकर डिजिटल सेवाओं तक का लंबा सफर तय किया है, जिसमें झारखंड की गौरवगाथा भी ...और पढ़ें

डाक विभाग ने चिट्ठियों से डिजिटल सेवाओं तक का सफर तय किया। जागरण

डाक विभाग ने चिट्ठियों से डिजिटल सेवाओं तक का सफर तय किया। जागरण

HighLights

  1. डाक विभाग ने चिट्ठियों से डिजिटल सेवाओं तक का सफर तय किया।

  2. झारखंड की गौरवगाथा डाक टिकटों पर दर्ज है, जैसे बिरसा मुंडा।

अरविंद चौधरी, झुमरीतिलैया (कोडरमा)। दो दशक पहले तक का दौर था जब डाकिया घर की दहलीज पर पहुंचता था तो उसके हाथ में चिट्ठी देखकर चेहरे खिल उठते थे। किसी के लिए वह अपनों की कुशलक्षेम का संदेश होता था, तो किसी के लिए खुशियों और भावनाओं से भरा पत्र।

समय के साथ चिट्ठियों की जगह ईमेल, एसएमएस और मोबाइल संदेशों ने ले ली, लेकिन डाक विभाग की उपयोगिता कम नहीं हुई। चिट्ठियों से शुरू हुआ सफर आज बैंकिंग, बीमा, डिजिटल सेवाओं और पार्सल डिलीवरी तक पहुंच चुका है। 1 अक्टूबर 1854 को भारत में डाक विभाग की स्थापना हुई थी।

वहीं झारखंड के डाक इतिहास में वर्ष 1955 विशेष महत्व रखता है। इसी वर्ष कोडरमा के तिलैया डैम और धनबाद के सिंदरी उर्वरक कारखाने पर डाक टिकट जारी किए गए। इन टिकटों ने राज्य की औद्योगिक और विकास यात्रा को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

डाक टिकटों पर झारखंड की अनेक विभूतियों को भी स्थान मिला। भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, जमशेदजी टाटा, जहांगीर टाटा और दिवंगत आईपीएस रणधीर प्रसाद वर्मा जैसी हस्तियों की स्मृतियां डाक टिकटों के माध्यम से देशभर तक पहुंचीं। इस तरह डाक टिकट केवल संदेश भेजने का माध्यम नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और गौरवशाली विरासत के दस्तावेज भी बने।

झारखंड में डाक सेवाओं के विस्तार की दिशा में 12 जनवरी 2001 महत्वपूर्ण तारीख है। इसी दिन झारखंड डाक सर्किल का गठन हुआ। इसके बाद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में डाक नेटवर्क का लगातार विस्तार हुआ।

चिट्ठियों से आगे बढ़कर बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं तक

डिजिटल युग में डाकघर की भूमिका बदल गई है। अब यहां बैंकिंग, बीमा, बचत योजनाएं, सुकन्या समृद्धि योजना, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, पासपोर्ट और विभिन्न डिजिटल सेवाएं उपलब्ध हैं। शहरों से लेकर दूरदराज के गांवों तक इन सुविधाओं की पहुंच ने डाकघर को आम लोगों की आर्थिक और सामाजिक जरूरतों से जोड़े रखा है।

कोरोना काल में भी निभाई जिम्मेदारी

कोरोना संक्रमण के कठिन दौर में जब सामान्य परिवहन और जनजीवन प्रभावित था, तब डाक विभाग ने आवश्यक दवाइयों, सैनिटाइजर, पीपीई किट और अन्य जरूरी सामग्री की डिलीवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

धार्मिक आस्था से जुड़े मंदिरों के प्रसाद और गंगाजल को भी डाक सेवाओं के माध्यम से घरों तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं गया का प्रसिद्ध तिलकुट, देवघर का पेड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों के स्थानीय उत्पादों को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में भी डाक नेटवर्क उपयोगी साबित हो रहा है।

व्यक्तिगत डाक टिकट से जुड़ रहीं यादें

नवाचार के दौर में व्यक्तिगत डाक टिकट की सुविधा ने डाक टिकटों को यादगार बनाने का नया अवसर दिया है। अब जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और विशेष अवसरों की स्मृतियों को डाक टिकट के रूप में संजोया जा सकता है। डाक टिकट संग्रहकर्ताओं के लिए भी विभाग की ओर से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।

कोडरमा में 85 डाकघरों से पहुंच रही सेवा

कोडरमा जिले में एक मुख्य डाकघर, सात उप डाकघर और 77 शाखा डाकघरों के माध्यम से सेवाएं संचालित की जा रही हैं। डाक निरीक्षक विकास रंजन के अनुसार, स्पीड पोस्ट के जरिए डाक और पार्सल को कम समय में गंतव्य तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। 

यह भी पढ़ें- डाकू सुल्ताना के नाम पर पड़ा उत्तराखंड के इस गांव का नाम, जहां के लोग पंचायत चुनावों में नहीं डाल सकते वोट

यह भी पढ़ें- फर्जी अंकसूची से डाक सेवक की नौकरी पाने वालों पर CBI का शिकंजा, चार आरोपित मुरैना से गिरफ्तार; कई राज्यों में फैला नेटवर्क