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कुएं का पानी हुआ गर्म, चापाकल से अपने आप निकल रहा पानी; जामताड़ा में ECL के प्रोजेक्ट से गांव में दहशत

Published: Sat, 07 Nov 2026 10:22 AM (GMT+05:30)

जामताड़ा के कास्ता गांव में ईसीएल की भूमिगत कोयला गैसीकरण परियोजना के ट्रायल के बाद चापाकलों और बोरिंग से अपने आप पानी निकलने लगा है, जिससे ग्रामीण भयभीत हैं।

HighLights

  1. ईसीएल परियोजना ट्रायल से चापाकलों, बोरिंग से पानी निकला।

  2. ग्रामीणों ने समस्या समाधान या विस्थापन की मांग की।

  3. प्रशासन ने ट्रायल रोककर जांच का आश्वासन दिया।

जागरण संवाददाता, जामताड़ा। ईसीएल की महत्वाकांक्षी भूमिगत कोयला गैसीकरण परियोजना (यूसीजी) के तहत नाला प्रखंड के कास्ता में मीथेन गैस निकालने की तैयारी अब ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गई है। दो दिन पूर्व परियोजना के तहत ट्रायल शुरू होने के बाद कास्ता गांव के चापाकलों और बोरिंग से अचानक अपने आप पानी निकलने लगा है। 

इस अप्रत्याशित स्थिति से ग्रामीण भयभीत हैं। उन्हें आशंका है कि गैस निकालने की प्रक्रिया के कारण जमीन के अंदर जलस्तर या भूगर्भीय स्थिति में बदलाव हो रहा है।

ग्रामीणों को दूसरी जगह बसाने की व्यवस्था 

इस समस्या से परेशान ग्रामीणों ने प्लांट के समीप पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और समस्या का तत्काल समाधान करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर पानी निकलने के कारणों की जांच कराई जाए। 

यदि कंपनी इस समस्या का समाधान नहीं कर पाती है तो प्रभावित ग्रामीणों को दूसरी जगह बसाने की व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों ने मंगलवार को कंपनी के अधिकारियों को बुलाने की मांग की है। साथ ही जिला प्रशासन से भी मामले में हस्तक्षेप कर ग्रामीणों की समस्या का समाधान कराने की अपील की है।

40 वर्ष तक मीथेन निकालने की योजना

गौरतलब है कि ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की पांडेश्वर शाखा की ओर से कास्ता कोयला खदान में भूमिगत कोयला गैसीकरण की पायलट परियोजना संचालित की जा रही है। 

ईसीएल और कनाडा की एर्गो एक्सर्जी टेक्नोलॉजीज इंक के सहयोग से विकसित इस परियोजना के तहत जमीन के नीचे मौजूद कोयले से मीथेन समेत अन्य उपयोगी गैसें निकालने की योजना है। 

परियोजना प्रबंधक मुरारी गौड़ के अनुसार, यहां करीब 40 वर्षों तक मीथेन गैस निकालने की संभावना है। इसके बाद कोयले का खनन किया जाएगा।

रोजगार और विकास की भी जगी उम्मीद

परियोजना के सफल होने से नाला प्रखंड सहित पूरे जामताड़ा जिले में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा कंपनी के सीएसआर मद से आसपास के गांवों में विकास कार्य कराए जा सकेंगे। 

हालांकि, ट्रायल शुरू होने के बाद चापाकलों और बोरिंग से पानी निकलने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। अब ग्रामीण परियोजना की तकनीकी प्रक्रिया के साथ-साथ अपनी सुरक्षा और पेयजल स्रोतों को लेकर भी स्पष्ट जवाब चाहते हैं।

पहले चरण में 2024 से शुरू हुई थी ड्रिलिंग

परियोजना के पहले चरण की शुरुआत 22 जून 2024 को बोरहोल ड्रिलिंग और कोर टेस्टिंग के साथ हुई थी। इसके माध्यम से तकनीकी व्यवहार्यता का आकलन किया जा रहा है। इसके बाद पायलट स्तर पर कोयला गैसीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की योजना है। 

दिसंबर 2015 में कोयला मंत्रालय ने कोयला और लिग्नाइट वाले क्षेत्रों में भूमिगत कोयला गैसीकरण के लिए नीति ढांचे को मंजूरी दी थी। इसी के तहत कास्ता कोयला ब्लॉक का चयन किया गया था।

अब परियोजना के तकनीकी परीक्षण के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा और उनकी बुनियादी सुविधाओं को लेकर कंपनी तथा जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

कुआं का पानी गर्म हो जा रहा है और चापाकल से पानी निकालने की जानकारी मिलने के बाद एकल के ऑपरेशन मैनेजर से बात कर अभी ट्रायल रुकवा दिया गया है। खनन और प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच कराई जाएगी इसके बाद से ऑपरेशन फिर चालू होगा। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। इससे कुछ खास नुकसान होने वाला नहीं है। - अनंत कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी, जामताड़ा

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