खनन से बंजर हुई जमीन पर लौटेगी हरियाली, टाटा स्टील ने अपनाई हाइड्रोसीडिंग तकनीक
टाटा स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन ने खनन क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए हाइड्रोसीडिंग तकनीक अपनाई है। यह तकनीक ...और पढ़ें

टाटा स्टील ने वेस्ट बोकारो में हाइड्रोसीडिंग तकनीक अपनाई। जागरण
HighLights
टाटा स्टील ने वेस्ट बोकारो में हाइड्रोसीडिंग तकनीक अपनाई।
यह तकनीक 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में हरियाली बढ़ाएगी।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। खनन के साथ पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने की दिशा में टाटा स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन ने नई पहल की है। खनन क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को रोकने, डंप की ढलानों को स्थिर बनाने और बंजर जमीन पर हरियाली विकसित करने के उद्देश्य से हाइड्रोसीडिंग तकनीक की शुरुआत की गई है।
इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से अब तक खदानों, नर्सरी और माइन डंप सहित 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बीजों के मिश्रण का छिड़काव किया जा चुका है।
क्या है हाइड्रोसीडिंग तकनीक?
हाइड्रोसीडिंग पौधों को उगाने की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें विशेष मशीन की मदद से बीज, पानी, मल्च, खाद और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने वाले अन्य पदार्थों का मिश्रण जमीन पर छिड़का जाता है।
यह तकनीक खास तौर पर खदानों से निकली मिट्टी के ढेर, ऊबड़-खाबड़ जमीन और तीखी ढलानों पर उपयोगी है। ऐसे क्षेत्रों में पारंपरिक तरीके से पौधारोपण करना चुनौतीपूर्ण होता है और इसमें अधिक समय भी लगता है।

ढलानों को मजबूती, मिट्टी के कटाव पर लगेगी रोक
हाइड्रोसीडिंग के जरिए डंप की खुली ढलानों पर वनस्पति विकसित करने में मदद मिलती है। पौधों की जड़ें मिट्टी को बांधकर रखने में सहायक होती हैं, जिससे मिट्टी के कटाव को कम करने और ढलानों की स्थिरता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं, मिश्रण में मौजूद मल्च मिट्टी में नमी बनाए रखने में सहायक होता है, जिससे बीजों के अंकुरण और पौधों की वृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं।
इस तकनीक का एक बड़ा लाभ यह भी है कि दुर्गम और ऊबड़-खाबड़ क्षेत्रों में हाथ से काम करने की जरूरत कम होती है। इससे कठिन स्थानों पर काम करने वाले कर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ बड़े क्षेत्र में कम समय में छिड़काव करना भी संभव होता है।

50 मीटर तक छिड़काव, 80 मीटर तक की ढलानों पर पहुंच
हाइड्रोसीडिंग मशीन की मदद से 50 मीटर तक की दूरी पर मिश्रण का छिड़काव किया जा सकता है। वहीं, डंप की 80 मीटर तक फैली ढलानों को भी प्रभावी ढंग से कवर करने में यह तकनीक सक्षम है। इससे उन स्थानों पर भी हरियाली विकसित करने में मदद मिलती है, जहां पारंपरिक तरीकों से पहुंचना मुश्किल होता है।
पहल के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक बताए जा रहे हैं। विभिन्न ढलानों पर हरियाली विकसित होती दिखाई दे रही है। बड़े क्षेत्रों में मिश्रण का समान रूप से छिड़काव होने से खनन प्रभावित जमीन के पुनर्वास की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।

जैव विविधता को मिलेगा बढ़ावा
खनन के बाद प्रभावित भूमि को दोबारा हरित और उपयोगी बनाने में हाइड्रोसीडिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने, वनस्पति आवरण विकसित करने और स्थानीय पर्यावरण में सुधार लाने में मदद मिलेगी। हरियाली बढ़ने से जैव विविधता को प्रोत्साहन देने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
टाटा स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन की यह पहल आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित खनन पर जोर देती है। हाइड्रोसीडिंग के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से हरियाली विकसित करने का प्रयास सस्टेनेबल माइनिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

