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टाटा स्टील की कैंटीनों में सुबह 10.30 बजे तक नहीं पहुंचा नाश्ता, नई व्यवस्था से कर्मचारी आक्रोशित

Published: Thu, 15 Oct 2026 12:00 PM (IST)

टाटा स्टील जमशेदपुर प्लांट में नई कैंटीन व्यवस्था के पहले दिन ही नाश्ते की आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे कर्मचारियों ...और पढ़ें

नई व्यवस्था के पहले ही दिन बिगड़ी आपूर्ति, कई कैंटीनों और ट्राली प्वाइंट पर मची अफरा-तफरी।

नई व्यवस्था के पहले ही दिन बिगड़ी आपूर्ति, कई कैंटीनों और ट्राली प्वाइंट पर मची अफरा-तफरी।

HighLights

  1. नई कैंटीन व्यवस्था से नाश्ते की आपूर्ति बाधित।

  2. कर्मचारियों को समय पर नाश्ता न मिलने से नाराजगी।

  3. प्रबंधन के नए बंटवारे से उत्पन्न हुई अव्यवस्था।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में गुरुवार सुबह कैंटीन व्यवस्था चरमरा गई। नई व्यवस्था लागू होने के पहले ही दिन कई कैंटीनों और ट्राली प्वाइंट पर सुबह साढ़े 10 बजे तक नाश्ता नहीं पहुंचा। इससे कर्मचारियों को काफी परेशानी हुई और उनमें नाराजगी देखी गई।

नाश्ता नहीं मिलने से कुछ कर्मचारी गेट पास लेकर प्लांट से बाहर चले गए। वहीं, टाटा वर्कर्स यूनियन के कई कमेटी मेंबरों ने भी इस अव्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में कर्मचारियों के लिए 15 बड़े कैंटीन और 104 ट्राली प्वाइंट हैं।

पहले करीब 80 प्रतिशत कैंटीनों की जिम्मेदारी शौर्य इन और शेष 20 प्रतिशत की जिम्मेदारी सीएसएस एजेंसी के पास थी। अब प्रबंधन ने दोनों एजेंसियों के बीच कैंटीनों की जिम्मेदारी 50-50 प्रतिशत बांट दी है। यह नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू की गई। हालांकि, पहले ही दिन इसका असर नाश्ते की आपूर्ति पर दिखाई दिया।

सीईओ के सामने उठा था खाने की गुणवत्ता का मुद्दा

एक अक्टूबर को आयोजित टाटा स्टील के मासिक कार्यक्रम 'एमडी आनलाइन' में एक कर्मचारी ने कैंटीन की व्यवस्था पर सवाल उठाया था। कर्मचारी ने कंपनी के सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन को बताया था कि कैंटीनों में कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिल रहा है।

कई जगह खाना ठंडा मिलता है, जबकि कुछ कैंटीनों में भोजन की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं रहती। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए टीवी नरेंद्रन ने संबंधित अधिकारियों को कैंटीन व्यवस्था तत्काल दुरुस्त करने का निर्देश दिया था।

इसके बाद प्रबंधन के अधिकारी सक्रिय हुए और प्रोक्योरमेंट विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया। लेकिन, जिम्मेदारी के नए बंटवारे के पहले ही दिन नाश्ते की आपूर्ति प्रभावित होने से कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई।

दोपहर के भोजन को लेकर भी बढ़ी चिंता

एलडी-3, एलडी-2, स्लैब कास्टर समेत कई कैंटीनों और ट्राली प्वाइंट पर नाश्ता समय पर नहीं पहुंचने की शिकायत सामने आई। इससे कर्मचारी यह सोचकर भी परेशान हैं कि दोपहर का भोजन निर्धारित समय पर मिलेगा या नहीं। प्लांट में लंच का समय तय है और उत्पादन कार्य के बीच कर्मचारियों के लिए उसी अवधि में भोजन उपलब्ध होना जरूरी है।

इस मामले को लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबरों के वाट्सएप ग्रुप में भी प्रतिक्रियाएं दर्ज कराई गईं। कमेटी मेंबरों से लेकर कर्मचारियों तक के बीच नई व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रबंधन और संबंधित एजेंसियां आपूर्ति व्यवस्था में कितनी जल्दी सुधार करती हैं, ताकि कर्मचारियों को समय पर नाश्ता और भोजन मिल सके। 

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