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टाटा पावर का बड़ा कदम: 18 शीर्ष डेटा सेंटरों को मिलेगी 2.8 GW हरित ऊर्जा, मुंबई ग्रिड में 15,000 करोड़ का निवेश

Published: Wed, 14 Oct 2026 06:22 PM (IST)

Tata Power भारत के डेटा सेंटर कंपनियों को 2.8 गीगावाट से अधिक निर्बाध हरित ऊर्जा और तकनीकी ढांचा प्रदान करने ...और पढ़ें

इंटरनेट व एआई के सर्वर रूम को मिलेगी निर्बाध हरित ऊर्जा।

इंटरनेट व एआई के सर्वर रूम को मिलेगी निर्बाध हरित ऊर्जा।

HighLights

  1. टाटा पावर 18 डेटा सेंटरों को 2.8 GW हरित ऊर्जा देगी।

  2. मुंबई ग्रिड अपग्रेडेशन पर 15,000 करोड़ रुपये का निवेश।

  3. एआई से बिजली मांग 2032 तक 26.3 GW बढ़ेगी।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। इंटरनेट, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का दिमाग कहे जाने वाले विशाल 'डाटा सेंटरों' (कंप्यूटर और सर्वर रूम) को हर सेकंड निर्बाध और भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। भारत की इसी विशाल तकनीकी मांग को पूरा करने के लिए टाटा पावर ने बड़ी तैयारी की है।

कंपनी देश-दुनिया की 18 'ब्लू चिप' (शीर्ष दर्जे की) डाटा सेंटर कंपनियों को 2.8 गीगावाट (2800 मेगावाट) से अधिक की बिजली और पूरा तकनीकी ढांचा मुहैया कराएगी। बिना पलक झपकाए काम करने वाले इन अति-आधुनिक कंप्यूटर रूम्स को अब टाटा पावर की सौर ऊर्जा, कूलिंग सिस्टम और मजबूत ट्रांसमिशन लाइनों से नई ऊर्जा मिलेगी।

29 अलग-अलग मोर्चों पर चल रहा काम

टाटा पावर का लक्ष्य अब केवल तारों में दौड़ती बिजली देना नहीं है, बल्कि वह एक पूरा 'तकनीकी इकोसिस्टम' (पारिस्थितिकी तंत्र) दे रही है। इसमें डाटा सेंटरों के लिए बिजली युक्त जमीन, तारों का संजाल (ग्रिड कनेक्टिविटी), बैटरी स्टोरेज और 24 घंटे चलने वाले सर्वर को गर्म होने से बचाने वाली अत्याधुनिक 'कूलिंग व्यवस्था' शामिल है।

कंपनी इस वक्त 29 अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसमें 430 मेगावाट बिजली का वितरण, 1236 मेगावाट का ट्रांसमिशन और 1150 मेगावाट की हरित (सौर व पवन) ऊर्जा के प्रोजेक्ट शामिल हैं।

बिजली न कटे, इसके लिए अभेद्य नेटवर्क की तैयारी

मुंबई मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में बड़े डाटा सेंटरों (हाइपरस्केलर्स) की बढ़ती तादाद को देखते हुए टाटा पावर अपने नेटवर्क को अभेद्य बना रही है। ''मुंबई ग्रिड अपग्रेडेशन प्लान'' के तहत 15 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इसमें 110 केवी और 220 केवी की लाइनों को मजबूत करने के साथ ही 400 केवी का एक नया ट्रांसमिशन रिंग (गोलाकार नेटवर्क) बनाया जा रहा है।

इसका मुख्य उद्देश्य एक मजबूत बैकअप तैयार करना है, ताकि किसी एक लाइन में तकनीकी खराबी आने पर भी डाटा सेंटरों की बिजली एक सेकंड के लिए भी बाधित न हो।

2032 तक 26.3 गीगावाट तक पहुंच जाएगी मांग

जैसे-जैसे एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है, कंप्यूटरों की बिजली खपत कई गुना तेज हो गई है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2031-32 तक केवल एआई और डाटा सेंटरों के कारण देश में बिजली की मांग में 26.3 गीगावाट (26,300 मेगावाट) का भारी उछाल आएगा।

भारत तेजी से दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल हब बन रहा है, और इस विशाल तकनीकी मांग को पूरा करने में टाटा पावर का यह मजबूत ढांचा एक मील का पत्थर साबित होगा।

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