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Tata Steel Grade Revision: 7 साल की अवधि पर तो बनी सहमति, लेकिन MGB और DA के प्वाइंट वैल्यू पर फंसा पेंच

Published: Tue, 02 Jun 2026 11:57 PM (IST)

टाटा स्टील में 1 जनवरी 2025 से लंबित वेतन समझौते पर प्रबंधन और यूनियन के बीच वार्ता बेनतीजा रही। एमजीबी ...और पढ़ें

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. वेतन समझौते पर प्रबंधन-यूनियन वार्ता बेनतीजा रही।

  2. एमजीबी और डीए प्वाइंट वैल्यू पर गतिरोध बरकरार।

  3. समझौते की अवधि सात साल रखने पर बनी आम सहमति।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील में 1 जनवरी 2025 से लंबित कर्मचारियों के वेतन समझौते (ग्रेड रिवीजन) को लेकर मंगलवार को प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच हुई दो दौर की मैराथन वार्ता बेनतीजा रही। 
 
पांच घंटे से अधिक समय तक चली लंबी माथापच्ची के बावजूद मिनिमम गारंटीड बेनिफिट (MGB) और महंगाई भत्ते (DA) के प्वाइंट वैल्यू पर पेंच फंसा हुआ है। जहां एक ओर यूनियन कर्मचारियों के हित में 13 प्रतिशत एमजीबी की मांग पर अड़ी है। 
 
वहीं दूसरी ओर कंपनी प्रबंधन फिलहाल 7.5 प्रतिशत से आगे बढ़ने को तैयार नहीं है। हालांकि, राहत की बात यह है कि समझौते की अवधि को सात साल रखने पर दोनों पक्षों में लगभग आम सहमति बन चुकी है।
 

दो सत्रों में हुई 5 घंटे की गंभीर चर्चा 

मंगलवार को टाटा स्टील प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के शीर्ष नेतृत्व ने वार्ता की मेज पर आमना-सामना किया। 

  •     पहला सत्र: सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक चला। 
  •     दूसरा सत्र: शाम 4:00 बजे से 6:30 बजे तक हुआ।
इस गंभीर मंथन के दौरान दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर मजबूती से डटे रहे, जिसके कारण किसी अंतिम सुलह के बिना ही बैठक समाप्त हो गई।
 

MGB और DA को लेकर दोनों पक्षों की शर्तें 

इस बार के ग्रेड रिवीजन में मुख्य मुकाबला एमजीबी और डीए के प्वाइंट वैल्यू को लेकर है। यूनियन सम्मानजनक वेतन वृद्धि की मांग कर रही है, क्योंकि साल 2019 के पिछले ग्रेड रिवीजन समझौते में एमजीबी 12.75 प्रतिशत तय किया गया था। 

  •     MGB पर टकरार: यूनियन की मांग 13% है, जबकि प्रबंधन का ऑफर 7.5% पर अटका है। 
  •     DA प्वाइंट वैल्यू पर पेंच: यूनियन ने महंगाई भत्ते का प्वाइंट वैल्यू 6 रुपये करने का मजबूत प्रस्ताव दिया है, जिसके जवाब में प्रबंधन फिलहाल मात्र 3 रुपये का ऑफर दे रहा है। 
  •     भत्तों पर विवाद नहीं: यूनियन सूत्रों का कहना है कि समझौते की अवधि (7 साल) को लेकर कोई अड़चन नहीं है। जैसे ही एमजीबी और डीए का मुख्य विवाद सुलझेगा, बाकी अलाउंस (भत्तों) और मेडिकल सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर आसानी से मुहर लग जाएगी। अलाउंस को लेकर दोनों पक्षों में कोई खास मतभेद नहीं है।


17 महीने से इंतजार, 10,800 कर्मचारियों में बेचैनी

टाटा स्टील के करीब 10,800 कर्मचारियों का यह वेतन समझौता पिछले 17 महीनों से लंबित है, जिससे कर्मचारियों में उत्सुकता और बेचैनी बढ़ती जा रही है। इन कर्मचारियों में लगभग 7500 न्यू सीरीज के और 3,000 पुराने ग्रेड के कर्मचारी शामिल हैं। 
 
हाल ही में हुई यूनियन की कमेटी मीटिंग में भी इस देरी को लेकर सत्ता पक्ष पर तीखे सवाल उठाए गए थे। इस महत्वपूर्ण वेज रिवीजन वार्ता में कंपनी प्रबंधन की ओर से चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर (CHRO) जुबिन पालिया और राहुल दुबे शामिल हुए। 
 
वहीं, कर्मचारियों का पक्ष रखने के लिए टाटा वर्कर्स यूनियन की तरफ से अध्यक्ष संजीव चौधरी, डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह और महामंत्री सतीश सिंह ने मजबूती से अपनी बातें रखीं। फिलहाल बातचीत का दौर जारी है और हजारों कर्मचारियों की निगाहें अब अगली बैठक के फैसलों पर टिकी हुई हैं।

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