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दुमका जेल में रची गई थी निखार सबलोक की हत्या की साजिश, UP से आए शूटर ने मारी थीं 11 गोलियां

By Jitendra SinghEdited By: Sanjeev Kumar
Published: Wed, 02 Sep 2026 06:25 PM (IST)

होटल कारोबारी निखार सबलोक हत्याकांड में खुलासा हुआ है कि साजिश दुमका जेल में रची गई थी और यूपी से आए शूटर ने 11 गोलियां मारी थीं।

चांडिल में 3.5 एकड़ जमीन का विवाद और भू-माफिया का गठजोड़ है, जिसमें कई सफेदपोश भी पुलिस के निशाने पर हैं।

चांडिल में 3.5 एकड़ जमीन का विवाद और भू-माफिया का गठजोड़ है, जिसमें कई सफेदपोश भी पुलिस के निशाने पर हैं।

HighLights

  1. साजिश दुमका जेल में रची गई, यूपी से आए शूटर ने मारी 11 गोलियां।

  2. चांडिल में 3.5 एकड़ जमीन विवाद हत्या का मुख्य कारण बना।

  3. भू-माफिया और सफेदपोशों पर पुलिस का शिकंजा कसना शुरू।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। होटल कारोबारी निखार सबलोक हत्याकांड की तफ्तीश में जुटी पुलिस एसआईटी (SIT) की जांच में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। 
 
इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस के तार केवल स्थानीय गिरोहों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका अंतरराज्यीय शूटर मॉड्यूल और दुमका जेल से सीधा कनेक्शन सामने आया है। 
 
15 लाख रुपये की सुपारी लेकर वारदात को अंजाम देने वाले पेशेवर शूटरों का संपर्क दुमका जेल के भीतर ही स्थापित हुआ था।


उत्तर प्रदेश से किराए पर बुलाए गए अपराधियों को जमशेदपुर में कई दिनों तक गुप्त ठिकानों पर ठहराया गया और निखार की पूरी रेकी कराई गई थी।

11 गोलियां मारकर रांची भागा था UP का मुख्य शूटर 

वारदात वाले दिन सोनारी निवासी रितेश सिंह ने टाटा-रांची हाईवे स्थित होटल टेंथ माइल स्टोन के बाहर निखार सबलोक की मौजूदगी की पुष्टि की थी, जबकि सुनील रजक गाड़ी चला रहा था। 
 
इशारा मिलते ही यूपी से आए पेशेवर शूटर अंकित सिंह ने निखार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। 11 गोलियां मारकर हत्या करने के बाद शूटर सीधे रांची भाग निकला, जहां से उसने ठिकाने बदले।


मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब के नेतृत्व में गठित एसआईटी की चार अलग-अलग टीमों ने झारखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में ताबड़तोड़ छापेमारी कर इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

चांडिल में 3.5 एकड़ जमीन के लिए खूनी जंग 

चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा-आसनबनी मार्ग पर स्थित 3.5 एकड़ बेशकीमती जमीन निखार सबलोक की हत्या का मुख्य कारण बनी। 
 
निखार पिंजरा पहाड़िया इलाके में एनएच-33 के किनारे एक बड़े ड्रीम होटल प्रोजेक्ट की तैयारी में लगे थे। इस कीमती भूखंड पर स्थानीय भू-माफिया की नजर काफी समय से टिकी थी।
 
जमीन के सौदे को लेकर शुरू हुई तनातनी में शहर के दो कुख्यात आपराधिक गिरोहों- अखिलेश सिंह गिरोह और गणेश सिंह गिरोह की एंट्री हो गई। 
 
एक पक्ष निखार को हटाकर इस कीमती जमीन पर कब्जा जमाना चाहता था, जबकि दूसरा गिरोह निखार के समर्थन में खड़ा था। इसी वर्चस्व की जंग में विरोधियों ने निखार को रास्ते से हटाने का खूनी प्लान तैयार कर लिया। 
 
गौरतलब है कि एनएच-33 का यह बेल्ट पिछले कुछ वर्षों से जमीन सिंडिकेट का गढ़ बन चुका है। इसी वर्ष 13 जनवरी को उद्योगपति कैरव गांधी का अपहरण कांड भी इसी आपराधिक गठजोड़ का नतीजा था।
 

माफिया के पीछे छिपे सफेदपोशों पर कसेगा शिकंजा 

निखार सबलोक हत्याकांड में केवल शूटर ही नहीं, बल्कि शहर के कई प्रभावशाली और सफेदपोश चेहरे पुलिस के निशाने पर आ गए हैं। 
 
इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड अशोक राघव (अशोक सिंह राघव) गैंगस्टर विक्रम शर्मा की मौत के बाद उसके पूरे नेटवर्क की कमान संभाल रहा था। 
 
हिरासत के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उसे पुलिस कस्टडी में टाटा मुख्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा, जांच में मानगो के अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू सिंह और संजीव सिंह हत्याकांड के आरोपी रहे शिबू का नाम भी सामने आया है। 

सिंटू सिंह के चालक सुनील रजक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीमें फरार चल रहे अभिमन्यु और शिबू को दबोचने के लिए लगातार दबिश दे रही हैं। 
 
एसआईटी की जांच अब उन सफेदपोशों पर केंद्रित है, जिन्होंने सुपारी के 15 लाख रुपये का इंतजाम किया और अपराधियों को पनाह दी।

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