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मानगो में एंबुलेंस कॉरिडोर की मांग तेज, जाम में प्रसव की घटना के बाद फिर उठी आवाज

Published: Thu, 23 Jul 2026 07:12 PM (IST)

मानगो ब्रिज पर लगातार ट्रैफिक जाम के कारण एंबुलेंस कॉरिडोर बनाने की मांग तेज हो गई है। एनएचआरसी ने जमशेदपुर ...और पढ़ें

मानगो में एंबुलेंस कॉरिडोर की मांग तेज, जाम में प्रसव की घटना के बाद फिर उठी आवाज

मानगो में एंबुलेंस कॉरिडोर की मांग तेज, जाम में प्रसव की घटना के बाद फिर उठी आवाज

HighLights

  1. मानगो ब्रिज पर जाम से एंबुलेंस कॉरिडोर की मांग।

  2. गर्भवती महिला ने एंबुलेंस में बच्चे को जन्म दिया।

  3. एनएचआरसी ने झारखंड मुख्य सचिव को नोटिस भेजा।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। मानगो ब्रिज पर लगातार लगने वाले ट्रैफिक जाम के बीच अब एंबुलेंस कारिडोर बनाने की मांग तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और सड़क दुर्घटना के घायलों को जाम में फंसना पड़ता है, जिससे उनकी जान पर बन आती है।

उनका कहना है कि आपातकालीन वाहनों के लिए अलग और निर्बाध मार्ग की व्यवस्था समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। इस मांग के पीछे सबसे बड़ा कारण वह घटना है, जब 3 मई को मानगो ब्रिज पर भीषण जाम में फंसने के कारण गर्भवती महिला माला रानी भगत समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकीं।

लंबे समय तक एंबुलेंस जाम में फंसी रही और आखिरकार महिला ने एंबुलेंस के अंदर ही बच्चे को जन्म दिया। इस घटना ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

जाम बना जान का संकट

मानगो ब्रिज पर रोजाना हजारों वाहनों का दबाव रहता है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में कई किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है। ऐसे में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन वाहन भी सामान्य ट्रैफिक में फंस जाते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता मनोज मिश्रा का कहना है कि कई बार मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।

स्थायी समाधान की उठी मांग

सामाजिक कार्यकर्ता मनोज मिश्रा समेत कई लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मानगो ब्रिज और आसपास के मार्गों पर स्थायी एंबुलेंस कॉरिडोर बनाया जाए, ताकि आपातकालीन सेवाओं को बिना किसी बाधा के रास्ता मिल सके।

लोगों का कहना है कि ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था भी जरूरी है, जिससे भविष्य में किसी मरीज या गर्भवती महिला को जाम के कारण संकट का सामना न करना पड़े।

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