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JPSC Scam: पूर्व चेयरमैन एलखियांग्ते ने दफ्तर से मिटाने की कोशिश की थी साक्ष्य, सीआइडी ने ऐसे कसा शिकंजा

By Pradeep SinghEdited By: Sanjeev Kumar
Published: Thu, 13 Aug 2026 01:43 PM (IST)

जेपीएससी घोटाले में पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते ने जांच के दौरान कार्यालय से डेटा मिटाने और दस्तावेज ले जाने की ...और पढ़ें

एल खियांग्‍ते अपने साथ पेन ड्राइव में डेटा डाउनलोड करने में सफल भी रहे और आयोग के कार्यालय से कई अहम दस्तावेज अपने साथ ले गए।

एल खियांग्‍ते अपने साथ पेन ड्राइव में डेटा डाउनलोड करने में सफल भी रहे और आयोग के कार्यालय से कई अहम दस्तावेज अपने साथ ले गए।

HighLights

  1. खियांग्ते ने जेपीएससी कार्यालय से डेटा मिटाने का प्रयास किया।

  2. सीआईडी ने उनके आवास से महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए।

  3. कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र ने घोटाले में अहम भूमिका निभाई।

प्रदीप सिंह, जमशेदपुर। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा घोटाले में जेल में बंद राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई का एक मुख्य कारण उनका संदिग्ध आचरण रहा।
 
घोटाले की जांच के सिलसिले में जब अपराध अनुसंधान विभाग (सीआइडी) की टीम ने पहली बार जेपीएससी के रांची स्थित कार्यालय में छापेमारी की, तो उसके ठीक अगले ही दिन 1988 बैच के झारखंड कैडर के सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी एल खियांग्ते खुद दफ्तर पहुंच गए।
 
जांच में सामने आया है कि वे अपने कार्यालय के कंप्यूटर से महत्वपूर्ण डेटा मिटाने का प्रयास कर रहे थे। वे अपने साथ पेन ड्राइव में डेटा डाउनलोड करने में सफल भी रहे और आयोग के कार्यालय से कई अहम दस्तावेज अपने साथ ले गए।
 
जब इस पूरे घटनाक्रम की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, तो प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि खियांग्ते मामले में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास कर रहे हैं। 
 
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सीआइडी की टीम ने तत्काल खियांग्ते के आवास पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को उनके घर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए।
 
इसके बाद सीआइडी ने उन्हें लगातार समन भेजकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान मिले पुख्ता सबूतों के आधार पर अंततः उनकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की गई। 
 
इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का रुख बेहद सख्त रहा। उन्होंने जांच एजेंसियों को निष्पक्ष कार्रवाई की पूरी छूट दी और स्पष्ट कहा था कि यदि कोई उनका करीबी भी इस मामले में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध भी कठोरतम कानूनी कदम उठाए जाएं।
 

परीक्षा एजेंसी से साठगांठ का जरिया बना कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र

मामले में गिरफ्तार कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार पासवान परीक्षा संचालित करने वाली उत्तर प्रदेश की विवादित एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) और तत्कालीन चेयरमैन एल खियांग्ते के बीच संपर्क की मुख्य कड़ी बना। 
 
धर्मेंद्र ने ही एजेंसी के प्रतिनिधियों की पहली बैठक एल खियांग्ते से कराई थी, जिसके बाद अनुचित लेन-देन और कमीशन का खेल तय हुआ।
 
जब इस प्रकरण की जांच आगे बढ़ी, तो धर्मेंद्र को अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा हो गया था। इसके बाद उसने बचने के लिए अपने रसूख और संपर्कों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। 
 
जांच में पता चला है कि एक कोचिंग संचालक भी धर्मेंद्र के संपर्क में था, जिसकी जमीन से जुड़े मामले में धर्मेंद्र ने एक वरिष्ठ अधिकारी के जरिए मदद कराई थी। 
 
इतना ही नहीं, उसने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अपने भाई को भी सेवा में बहाल कराया था। वह अक्सर सेवानिवृत्त अधिकारियों के व्यक्तिगत कार्यों के सिलसिले में दिल्ली भी जाता रहता था।

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