जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में धांधली की जांच और दोबारा परीक्षा की मांग तेज, सीएम पर बढ़ रहा दबाव
Ranchi Protest: अभ्यर्थियों ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और पुनर्परीक्षा की मांग की है।

हजारों अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री को दिया सुझाव पत्र, जयपाल स्टेडियम में धरना जारी।
HighLights
जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग।
कई विवादित परीक्षाओं को रद्द कर पुनर्परीक्षा कराने का आग्रह।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच समिति गठित करने का सुझाव।
जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की नियुक्ति परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों ने सरकार के समक्ष सुझाव-पत्र सौंपकर परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। सुझाव-पत्र में गंभीर शिकायतों वाली परीक्षाओं की समीक्षा, आवश्यकता पड़ने पर रद कर पुनर्परीक्षा कराने तथा दोनों आयोगों की परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार की मांग की गई है।
सुझाव-पत्र में कहा गया है कि परीक्षा प्रक्रिया, आरक्षण, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा एजेंसियों की भूमिका, ओएमआर, मूल्यांकन, नार्मलाइजेशन, परिणाम जारी करने और दस्तावेज सत्यापन को लेकर अभ्यर्थियों में लंबे समय से असंतोष और अविश्वास है। इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाने की मांग की गई है।
विवादित परीक्षाओं की समीक्षा की मांग
प्रस्ताव में जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, सिविल सेवा बैकलाग 2023 एवं 2025, 11वीं और 13वीं सिविल सेवा सहित सहायक लोक अभियोजन, झारखंड शिक्षा सेवा, सहायक वन संरक्षक एवं वन क्षेत्र पदाधिकारी, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी जैसी परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने की मांग की गई है।
इनमें 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, सिविल सेवा बैकलाग 2023 एवं 2025 तथा 11वीं और 13वीं सिविल सेवा परीक्षा को रद कर पुनर्परीक्षा कराने की मांग भी की गई है।
पूर्व जेपीएससी छात्र सह सोशल एक्टिविस्ट व आदिवासी नेता अनिल अमिताभ पन्ना ने कहा कि इसी तरह जेएसएससी की जीएल-2023, महिला पर्यवेक्षिका, प्रयोगशाला सहायक, उत्पाद सिपाही, पीजीटी-2023, माध्यमिक आचार्य तथा सहायक आचार्य कक्षा छह से आठ समेत अन्य विवादित परीक्षाओं की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग रखी गई है। सुझाव-पत्र में कहा गया है कि जहां जांच में परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होना प्रमाणित हो, वहां पुनर्परीक्षा कराई जाए।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग
अभ्यर्थियों ने गंभीर मामलों की जांच के लिए झारखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता या निगरानी में स्वतंत्र जांच समिति अथवा विशेष जांच दल गठित करने का सुझाव दिया है। आवश्यकता पड़ने पर सीबीआइ या प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराने की मांग भी की गई है।
जांच के दौरान परीक्षा एजेंसियों के सर्वर, प्रश्नपत्र तैयार करने और छपाई की प्रक्रिया, ओएमआर स्कैनिंग, आंकड़ों और परिणाम प्रसंस्करण, लागिन एवं पहुंच संबंधी विवरण, सीसीटीवी तथा अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का डिजिटल फोरेंसिक और सर्वर ऑडिट कराने की बात कही गई है। महत्वपूर्ण डिजिटल और भौतिक रिकार्ड सुरक्षित रखने की भी मांग की गई है।
परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी सुधार पर जोर
सुझाव-पत्र में परीक्षा परिणाम के साथ अंतिम उत्तर कुंजी, अभ्यर्थी की स्कैन की गई ओएमआर, प्राप्तांक, सामान्यीकृत अंक, श्रेणीवार कटऑफ और मेरिट सूची सार्वजनिक करने का सुझाव दिया गया है।
नार्मलाइजेशन का फार्मूला परीक्षा से पहले जारी करने, बायोमेट्रिक और चेहरे की पहचान आधारित सत्यापन लागू करने तथा शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का डिजिटल सत्यापन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
इसके अलावा जेपीएससी-जेएसएससी में स्थायी परीक्षा सुरक्षा एवं सत्यनिष्ठा प्रकोष्ठ बनाने, प्रश्नपत्र के लिए सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था, बहुस्तरीय पहुंच नियंत्रण, सुरक्षित छपाई और परिवहन व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है। परीक्षा एजेंसियों के चयन में साइबर सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और पूर्व रिकॉर्ड को प्राथमिकता देने की मांग की गई है।
विशेषज्ञ संस्थानों से सहयोग लेने का सुझाव
सुझाव-पत्र में परीक्षा व्यवस्था के व्यापक सुधार के लिए आइआइएम, एक्सएलआरआइ और आइआइटी-आइएसएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति बनाने का सुझाव दिया गया है।
साथ ही केंद्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र की बड़ी कंपनियों और अन्य सक्षम संस्थानों से परीक्षा प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक के विशेषज्ञों को प्रतिनियुक्ति पर लेने की बात कही गई है।
