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GST Scam: नौकरों के नाम पर बोगस कंपनियां, रिश्तेदारों के खातों में काली कमाई; झारखंड-बंगाल के कई फर्म रडार पर

Published: Fri, 02 Oct 2026 07:30 PM (IST)

ईडी की जांच में 734 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले में ज्ञानचंद जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल द्वारा नौकरों ...और पढ़ें

नौकरों के नाम पर 54 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी आइटीसी खरीदने वाले कारोबारी भी रडार पर।

नौकरों के नाम पर 54 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी आइटीसी खरीदने वाले कारोबारी भी रडार पर।

HighLights

  1. ज्ञानचंद जायसवाल और बेटे राज ने की 54 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग।

  2. नौकरों के पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर बनाईं बोगस फर्में।

  3. फर्जी आइटीसी खरीदने वाली लाभार्थी कंपनियां भी ईडी के रडार पर।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। 734 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) महाघोटाले में ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद अब मनी लांड्रिंग के सिंडिकेट का चौंकाने वाला खेल सामने आया है।

ईडी की विस्तृत जांच में खुलासा हुआ है कि पिता-पुत्र ने काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए अपने कम वेतनभोगी कर्मचारियों और नौकरों तक को नहीं बख्शा। उनके पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर बोगस फर्में बनाई गईं और 54.33 करोड़ रुपये की मनी लेयरिंग कर अकूत संपत्तियां खड़ी की गईं।

कर्मचारियों के नाम पर जय भोले जैसी फर्में

जांच में सामने आया कि गिरोह केवल खुद और परिजनों के नाम पर ही मुखौटा कंपनियां नहीं चला रहा था। परिवार के नाम पर मेसर्स मां शारदा एंडेवर्स, मेकर्स कास्टिंग और केदारनाथ ट्रेक्सिम जैसी कंपनियां तो थीं ही, कर्मचारियों के नाम पर मेसर्स जय भोले एंटरप्राइजेज जैसी कागजी फर्म खोल दी गई।

इन कर्मचारियों को भनक तक नहीं थी कि उनके नाम पर करोड़ों के फर्जी इनवाइस कट रहे हैं। इन बोगस फर्मों के जरिए 54.33 करोड़ रुपये का फर्जी आइटीसी रूट किया गया।

निजी खातों में डायवर्ट की काली कमाई

जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे रैकेट में 135 फर्जी कंपनियों से 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी बिल तैयार कर 734 करोड़ की आइटीसी अन्य कंपनियों को बेची गई। इस कमीशनखोरी से हासिल 54.33 करोड़ रुपये की अपराध की आय (पीओसी) को कई स्तरों पर घुमाया गया।

अंत में इस पूरी रकम को ज्ञानचंद, राज जायसवाल और उनके करीबी रिश्तेदारों के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इस रकम का बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट, जमीन की खरीद और अन्य व्यवसायों में निवेश किया गया।

सीए नेटवर्क और बेनामी संपत्तियों पर नजर

मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) संजय पारेख की भूमिका भी ईडी के रडार पर है, जिनके जमशेदपुर और कोलकाता ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। एजेंसी पूर्व में इस सिंडिकेट से जुड़े चार आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है।

20 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति कुर्क (पीएओ) करने के साथ 70 लाख रुपये नकद व बैंक खाते फ्रीज कर चुकी है। अब ईडी की नजर पिता-पुत्र द्वारा कर्मचारियों के नाम पर खरीदी गई बेनामी संपत्तियों को जब्त करने पर टिकी है।

फर्जी आइटीसी खरीदने वाली शहर की कंपनियां भी जांच के घेरे में

734 करोड़ रुपये के जीएसटी फर्जीवाड़े में मुख्य सरगना ज्ञानचंद जायसवाल और राज जायसवाल की घेराबंदी के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच उन लाभार्थी कंपनियों (बेनिफिशियरी फर्म्स) की ओर मुड़ गई है, जिन्होंने कमीशन देकर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) खरीदा था।

ईडी के अनुसार, कागजी कंपनियों के बोगस बिलों के जरिए अपनी वास्तविक जीएसटी देनदारी छिपाने वाले जमशेदपुर, रांची और कोलकाता के कई औद्योगिक घराने अब सीधे तौर पर जांच एजेंसी की जद में आ गए हैं।

कमीशन पर बेची गई थी फर्जी टैक्स छूट

ईडी की जांच में साफ हुआ है कि 135 मुखौटा कंपनियों के जरिए तैयार किए गए 5,000 करोड़ रुपये के फर्जी इनवाइस सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं थे। सिंडिकेट ने इन बिलों से जुटाए गए 734 करोड़ रुपये के फर्जी आईटीसी को बाजार में नकद कमीशन लेकर अन्य वास्तविक फर्मों को बेचा।

खरीदार कंपनियों ने बिना किसी माल की आवक के इन बिलों को अपने खातों में दिखाकर करोड़ों रुपये के टैक्स की चोरी की।अब ईडी इन लाभार्थी कंपनियों के खरीद-बिक्री रजिस्टर और डिजिटल बही-खातों को खंगाल रही है।

स्पेशल कोर्ट में ट्रायल, खरीदारों पर भी होगी कार्रवाई

इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खिलाफ रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) पर पहले से ही ट्रायल चल रहा है। एजेंसी इस मामले में मई 2025 में भी चार आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें से तीन अभी न्यायिक हिरासत में हैं।

साथ ही 20 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क (पीएओ) की जा चुकी हैं और करीब 70 लाख रुपये नकद व बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, सीए संजय पारेख के यहां से मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर फर्जी आइटीसी का लाभ उठाने वाली कंपनियों के संचालकों पर भी कानूनी फंदा कसना तय है। 

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