जमशेदपुर दुर्गापूजा 2026: पंडालों में इस बार केदारनाथ मंदिर, बनारस घाट से भगवान विष्णु के दस अवतार तक
जमशेदपुर में दुर्गापूजा की तैयारियां जोरों पर हैं, जहां विभिन्न पूजा पंडालों में केदारनाथ मंदिर, बनारस घाट, ग्रामीण जीवन और ...और पढ़ें

कुमफुटा में काल्पनिक मंदिर से लेकर टुईलाडुंगरी में प्लास्टिक की वस्तुओं की कारीगरी तक।
HighLights
जमशेदपुर में दुर्गापूजा पंडालों की तैयारियां तेज, विविध थीम।
केदारनाथ मंदिर, बनारस घाट, ग्रामीण जीवन जैसे आकर्षक विषय।
विष्णु के दस अवतार और प्लास्टिक कला भी होगी खास।
मनोज सिंह, जमशेदपुर। लौहनगरी जमशेदपुर में दुर्गापूजा केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पंडालों के जरिए अलग-अलग प्रदेशों की संस्कृति, कला और धार्मिक परंपराओं की झलक भी देखने को मिलती है। इस वर्ष शहर के विभिन्न पूजा पंडालों में अलग-अलग थीम को आकार दिया जा रहा है।
कहीं बाबा केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति श्रद्धालुओं का स्वागत करेगी तो कहीं बनारस के घाट और गंगा आरती का दृश्य दिखाई देगा। कुछ पंडालों में झारखंड-बंगाल के ग्रामीण परिवेश को जीवंत किया जाएगा, जबकि कहीं भगवान विष्णु के दस अवतारों की झांकी देखने को मिलेगी।
पंडालों की तैयारियों के साथ विद्युत सजावट, मेला, भोग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी तैयारी शुरू हो गई है। कई समितियों के लिए यह वर्ष विशेष भी है।
आरडी भट्टा सी एरिया में पूजा कमेटी अपनी 60वीं वर्षगांठ मना रही है, जबकि डिमना रोड की शिव शंकर समिति का यह 49वां दुर्गोत्सव होगा। टुईलाडुंगरी में 1934 से चली आ रही ओड़िआ समाज की पूजा परंपरा इस बार भी आकर्षण का केंद्र बनेगी।
कुमफुटा घोड़ाबांधा : संस्थापक की स्मृति में मंदिरनुमा पंडाल
श्रीश्री सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति कुमफुटा घोड़ाबांधा की ओर से इस वर्ष काल्पनिक मंदिर के स्वरूप में भव्य पंडाल बनाया जा रहा है। बंगाल से आए कारीगर पंडाल को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। समिति के महासचिव गुंजन कर्मकार ने बताया कि इस वर्ष की पूजा और पंडाल समिति के संस्थापक स्व. रामदास सोरेन को समर्पित रहेगा।
पूजा और पंडाल निर्माण पर करीब 14 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। श्रद्धालुओं के लिए निश्शुल्क भोग की व्यवस्था भी रहेगी। समिति में मुख्य संरक्षक विधायक मंगल कालिंदी, संरक्षक विधायक सोमेश चंद्र सोरेन, अध्यक्ष अमित गोराई, महासचिव गुंजन कर्मकार व आदित्य शेखर के अलावा राजेश महतो और नंदलाल शाह शामिल हैं।
घोड़ाबांधा : पहाड़ों के बीच रोशनी से सजेगा पूजा परिसर
सार्वजनिक दुर्गापूजा कमेटी घोड़ाबांधा इस वर्ष काल्पनिक मंदिर के स्वरूप में पंडाल तैयार करा रही है। समिति के उपाध्यक्ष जितेंद्र राय ने बताया कि पंडाल के आसपास पहाड़ों के बीच आकर्षक विद्युत सजावट की जाएगी। इससे पूजा परिसर का स्वरूप और आकर्षक होगा।
श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए छोटा मेला भी लगाया जाएगा। ग्रामीणों के लिए निश्शुल्क भोग की व्यवस्था की गई है। पूजा की तैयारियों में अध्यक्ष मीरा मुंडा, उपाध्यक्ष विक्टर सोरेन व जितेंद्र राय, सचिव गणेश सोलंकी, कोषाध्यक्ष संजय गोराई और देबू गोराई जुटे हुए हैं।
आरडी भट्टा सी एरिया : विष्णु के दस अवतारों की झांकी
आरडी भट्टा सी एरिया दुर्गापूजा कमेटी इस वर्ष अपनी 60वीं वर्षगांठ मना रही है। वर्ष 1967 में स्थापित कमेटी की ओर से डायमंड जुबली वर्ष को यादगार बनाने की तैयारी की जा रही है। इस बार पंडाल में भगवान विष्णु के दस अवतारों की झांकी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगी।
महासचिव बीएस प्रकाश राव ने बताया कि पूजा आयोजन पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। पंडाल का उद्घाटन 13 अक्टूबर को होगा। पूजा के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
डिमना रोड : पंडाल में दिखेगा झारखंड-बंगाल का ग्रामीण जीवन
मानगो डिमना रोड स्थित शिव शंकर समिति इस वर्ष 49वां दुर्गोत्सव मनाने जा रही है। पूजा पंडाल में झारखंड और बंगाल के ग्रामीण परिवेश की जीवंत झांकी देखने को मिलेगी। पंडाल परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाने की तैयारी है।
आयोजक अविनाश सिंह राजा ने बताया कि इस बार मां दुर्गा की प्रतिमा भी विशेष आकर्षण होगी। कोलकाता आर्ट कॉलेज के विद्यार्थी पिछले करीब दो माह से मां की वनदेवी स्वरूप की प्रतिमा तैयार करने में जुटे हैं। पूजा आयोजन पर करीब 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
मानगो गांधी मैदान : केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति
मानगो गांधी मैदान में श्रीश्री सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति की ओर से बाबा केदारनाथ मंदिर की थीम पर भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है। पंडाल निर्माण के लिए भूमिपूजन हो चुका है और इसके साथ ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।
समिति के अध्यक्ष नित्यानंद सिन्हा ने बताया कि गांधी मैदान में वर्ष 1964 से लगातार दुर्गापूजा का आयोजन हो रहा है। वर्षों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति तैयार की जा रही है। समिति के अनुसार, आयोजन हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द की मिसाल भी बना हुआ है।
न्यू सिदगोड़ा में दिखाई देगा बनारस के घाट और गंगा आरती का दृश्य
न्यू सिदगोड़ा दुर्गा एवं काली पूजा समिति की ओर से इस वर्ष बनारस के घाट की थीम पर पंडाल तैयार किया जा रहा है। पंडाल में गंगा नदी का स्वरूप दर्शाने की तैयारी है। इसके साथ श्रद्धालुओं के लिए गंगा आरती का आयोजन भी किया जाएगा।
समिति के मुख्य संरक्षक चंद्रगुप्त सिंह ने बताया कि पंडाल का निर्माण बंगाल से आए कारीगर कर रहे हैं। पंडाल की ऊंचाई करीब 80 फीट और चौड़ाई लगभग 150 फीट होगी। इसके निर्माण की तैयारी पिछले करीब दो माह से चल रही है।
टुईलाडुंगरी : प्लास्टिक की वस्तुओं से होगी पंडाल की सजावट
श्रीश्री सार्वजनिक दुर्गापूजा कमेटी टुईलाडुंगरी इस वर्ष पंडाल को प्लास्टिक की वस्तुओं से सजाने की तैयारी में है। बोतल, प्लेट, कटोरी, चम्मच और ग्लास जैसी वस्तुओं से पंडाल में आकर्षक कारीगरी की जाएगी। पंडाल की यह थीम श्रद्धालुओं के लिए अलग अनुभव होगी।
मां दुर्गा की 20 फीट ऊंची राजराजेश्वरी स्वरूप की प्रतिमा उड़ीसा के कारीगर तैयार करेंगे। चांदीपुर की विद्युत सजावट भी पंडाल परिसर को आकर्षक बनाएगी। बच्चों और बड़ों के मनोरंजन के लिए मेले का आयोजन किया जाएगा।
कमेटी के मुख्य संरक्षक राजू गरी, अध्यक्ष मिथिलेश सिंह यादव और महासचिव दिनेश कुमार हैं। वर्ष 1934 से ओड़िआ समाज द्वारा शुरू की गई यह पूजा परंपरा समय के साथ सार्वजनिक रूप ले चुकी है और आज भी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
सात पंडाल, सात अलग थीम
इस वर्ष इन पूजा समितियों की तैयारियों में खास बात यह है कि हर पंडाल का स्वरूप दूसरे से अलग रखा गया है। कुमफुटा में काल्पनिक मंदिर, घोड़ाबांधा में मंदिर के साथ पहाड़ों के बीच विद्युत सजावट, आरडी भट्टा में विष्णु के दस अवतार, डिमना रोड में ग्रामीण परिवेश, गांधी मैदान में केदारनाथ मंदिर, न्यू सिदगोड़ा में बनारस के घाट और टुईलाडुंगरी में प्लास्टिक की वस्तुओं से बनी कारीगरी श्रद्धालुओं को अलग-अलग अनुभव देगी।
पूजा समितियां पंडाल निर्माण के साथ सुरक्षा, रोशनी, भोग, मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियों में भी जुटी हैं। आने वाले दिनों में निर्माण कार्य में तेजी आने के साथ इन पूजा स्थलों का स्वरूप और स्पष्ट होने लगेगा। शहर में दुर्गापूजा के दौरान इन अलग-अलग थीम वाले पंडालों के जरिए धार्मिक आस्था के साथ कला और संस्कृति का संगम देखने को मिलेगा।
