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जमशेदपुर में 1945 से 2015 तक के जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों का होगा डिजिटलीकरण, सात दशक पुराने रिकॉर्ड रहेंगे सुरक्षित

Published: Wed, 14 Oct 2026 08:00 AM (IST)

जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) 1945 से 2015 तक के जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों का डिजिटलीकरण कर रही है। यह ...और पढ़ें

जमशेदपुर में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों से जुड़े पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए जेएनएसी ने डिजिटलीकरण की प्रक्रिया शुरू की है।

जमशेदपुर में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों से जुड़े पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए जेएनएसी ने डिजिटलीकरण की प्रक्रिया शुरू की है।

HighLights

  1. साढ़े दस लाख से अधिक पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाएगा।

  2. यह पहल प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिकों की सुविधा बढ़ाएगी।

मनोज सिंह, जमशेदपुर। जमशेदपुर में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों से जुड़े पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की दिशा में जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) ने एक ऐतिहासिक पहल की है। 

संभवतः झारखंड में यह पहला नगर निकाय है, जिसने सात दशक पुराने अभिलेखों को सहेजने के लिए डिजिटलीकरण की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत वर्ष 1945 से 2015 तक के सभी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों को डिजिटल स्वरूप में बदला जा रहा है।
 

साढ़े दस लाख से अधिक दस्तावेजों का होगा डिजिटलीकरण

जमशेदपुर के नगर आयुक्त योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि अक्षेस क्षेत्र के अंतर्गत वर्ष 1945 से 2015 तक जारी किए गए जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों के कागजी रिकॉर्ड को संरक्षित किया जा रहा है, ताकि समय बीतने के साथ दस्तावेज फटने, खराब होने या गुम होने की आशंका से पूरी तरह सुरक्षित हो सकें।
 
आंकड़ों के अनुसार, जमशेदपुर अक्षेस में हर साल औसतन 15 हजार जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं। इस औसत के आधार पर इन 70 वर्षों में लगभग 10 लाख 50 हजार प्रमाणपत्र जारी किए जाने का अनुमान है। 
 
इन सभी पुराने रिकॉर्ड्स के डिजिटल होने से नागरिकों को भविष्य में अपने या अपने परिजनों के दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी हासिल करने में भारी सहूलियत होगी।
 

प्रशासनिक कामकाज में आएगी पारदर्शिता 

इस महत्वाकांक्षी पहल से नगर निकाय के रिकॉर्ड प्रबंधन को मजबूती मिलेगी। अभी तक पुराने दस्तावेजों को ढूंढने में काफी समय और मशक्कत करनी पड़ती थी। 
 
लेकिन डिजिटल डेटाबेस तैयार हो जाने से एक क्लिक पर पलभर में रिकॉर्ड उपलब्ध हो जाएंगे। इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और कामकाज की गति भी तेज होगी।

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