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जून 2024 में हुई थी गिरफ्तारी, अब ED ने खोजी मनी ट्रेल; जानिए कैसे ज्ञानचंद ने खड़ा किया फर्जीवाड़े का साम्राज्य

Published: Wed, 30 Sep 2026 08:06 PM (IST)

ईडी ने जमशेदपुर में स्क्रैप कारोबार की आड़ में हुए 750 करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी फर्जीवाड़े और मनी ...और पढ़ें

ज्ञानचंद जायसवाल पर ईडी की कार्रवाई दरअसल पूर्व में जीएसटी खुफिया महानिदेशालय द्वारा पकड़े गए 55.66 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े की आगे की कड़ी है।

ज्ञानचंद जायसवाल पर ईडी की कार्रवाई दरअसल पूर्व में जीएसटी खुफिया महानिदेशालय द्वारा पकड़े गए 55.66 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े की आगे की कड़ी है।

HighLights

  1. ज्ञानचंद जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा हुआ।

  2. काले धन को रियल एस्टेट और बेनामी संपत्तियों में खपाया गया।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। स्क्रैप कारोबार की आड़ में कर चोरी और फर्जीवाड़े के खेल में ईडी की कार्रवाई के बाद कई चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। 
 
कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल पर हुई यह कार्रवाई दरअसल जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI) द्वारा पूर्व में पकड़े गए 55.66 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े की आगे की कड़ी है। 
 
जांच एजेंसियों की पड़ताल में सामने आया है कि कागजों पर चलने वाली बोगस फर्मों के जरिए 750 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा सिंडिकेट तैयार किया गया था।
 

जून 2024 में हो चुकी है गिरफ्तारी 

bablu jaiswal

ज्ञानचंद जायसवाल को डीजीजीआई की जमशेदपुर इकाई ने जून 2024 में 55.66 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। 
 
जांच के दौरान जय भोलानाथ कंपनी, मां शारदा एंडेवर, मेकर्स कास्टिंग, केदारनाथ ट्रैक्सीन और ज्ञानदीप आयरन जैसी शेल (मुखौटा) कंपनियों के तार जुड़े मिले थे। 
 
बिना माल (लौह स्क्रैप) की वास्तविक सप्लाई किए सिर्फ कागजी इनवॉइस जारी कर करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ उठाया गया था। आरोपी को जमानत मिलने के बाद ईडी ने पीएमएलए (PMLA) के तहत मनी ट्रेल की जांच अपने हाथ में ली।
 

रियल एस्टेट व बेनामी संपत्तियां रडार पर 

ईडी की शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि फर्जी आईटीसी से अर्जित काले धन को रियल एस्टेट, जमीन-जायदाद और कोलकाता के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बेनामी रूप से खपाया गया। 
 
इस अवैध कमाई को सफेद करने में शहर के कई सफेदपोशों और वित्तीय सलाहकारों की भूमिका सामने आ रही है। ऑडिटर संजय पारेख के ठिकानों पर भी छापेमारी हुई। 
 
इस दौरान जांच अधिकारियों को शेल कंपनियों के निदेशकों, उनके फर्जी हस्ताक्षरों और बैंक खातों के संचालन से जुड़े अहम दस्तावेज मिले हैं। ईडी अब इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि इस सिंडिकेट से और कौन-कौन से बड़े उद्योगपति व कारोबारी जुड़े हुए हैं।

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