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खामोशी के सीने पर सुरों से लिखी आशुतोष ने जीत, ऑटिज्म के बावजूद संगीत में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज

Published: Fri, 30 Oct 2026 05:36 PM (IST)

आशुतोष पाणिग्रही ने जन्मजात ऑटिज्म के बावजूद 3 मिनट 47 सेकंड में 50 शास्त्रीय रागों की पकड़ प्रस्तुत कर एशिया ...और पढ़ें

आशुतोष ने 50 शास्त्रीय रागों की पकड़ प्रस्तुत की।

आशुतोष ने 50 शास्त्रीय रागों की पकड़ प्रस्तुत की।

HighLights

  1. आशुतोष ने 50 शास्त्रीय रागों की पकड़ प्रस्तुत की।

  2. ऑटिज्म के बावजूद एशिया और इंडिया बुक में नाम।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। कहते हैं, जब नियति किसी के हिस्से में खामोशी लिखती है, तो हौसले उसमें सुरों का दरिया बहा देते हैं। सुंदरनगर निवासी 20 वर्षीय आशुतोष पाणिग्रही ने इसे सच कर दिखाया है। जन्मजात ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसआर्डर (एएसडी) की बेड़ियां तोड़कर आशुतोष ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में वह मुकाम हासिल किया है, जो सामान्य युवाओं के लिए भी स्वप्न सरीखा है।

उन्होंने महज तीन मिनट 47 सेकंड में 50 शास्त्रीय रागों की ''पकड़'' (विशिष्ट पहचान स्वर) प्रस्तुत कर एशिया बुक आफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है।

गुरु के प्रति अगाध श्रद्धा और मां का संबल

संगीत का जिक्र आते ही आशुतोष श्रद्धा से अपने कान छू लेते हैं। यह आदर उनके गुरु पवन कुमार चौबे के लिए है, जिन्होंने बचपन में एक संगीत प्रतियोगिता के दौरान आशुतोष के भीतर छिपे सुरों के पारसमणि को पहचाना था।

गुरु चौबे बताते हैं कि शुरुआत में सिखाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन आशुतोष की असाधारण याददाश्त ने जटिल रागों को भी सुगम बना दिया। मां निवेदिता ने बेटे की इस मानसिक स्थिति को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। मां के विश्वास और गुरु के मार्गदर्शन की बदौलत आशुतोष ने वाराणसी के अस्सी घाट पर भी शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही बटोरी थी।

गणित से संगीत तक बहुमुखी मेधा

आशुतोष की प्रतिभा केवल सुरों की सरगम तक सीमित नहीं है। वर्ष 2023 में उन्होंने अबेकस पद्धति से 15 मिनट में गणित के 208 कठिन सवाल हल कर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपनी आमद दर्ज कराई थी। आज दोनों प्रतिष्ठित रिकॉर्ड के पदक सीने से लगाए आशुतोष का सपना संगीत शिक्षक बनकर अपने रागों की विरासत को नए बच्चों तक पहुंचाना है। इसके साथ ही वे अबेकस शिक्षण और पावरलिफ्टिंग में भी करियर की नई राह तलाश रहे हैं। 

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