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जो जानते थे वो चले गए, अब कहानियां बचानी हैं... बायोटेक छोड़ लोकगीतों को नया जीवन दे रही हैं झारखंड की प्रियम

Published: Thu, 22 Oct 2026 01:41 PM (IST)

बायोटेक इंजीनियर प्रियम गुप्ता ने अपनी नौकरी छोड़कर भारत की लोक संस्कृति और गीतों को डिजिटल रूप से सहेजने का ...और पढ़ें

जो जानते थे वो चले गए, अब कहानियां बचानी हैं।

जो जानते थे वो चले गए, अब कहानियां बचानी हैं।

HighLights

  1. प्रियम गुप्ता ने लोक संस्कृति संरक्षण के लिए इंजीनियरिंग छोड़ी।

  2. असम के गांव की घटना ने लोक विरासत बचाने को प्रेरित किया।

  3. वह 'कल्चर पार्टी' और कलाकारों का नेटवर्क बना रही हैं।

डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड के चक्रधरपुर की रहने वाली प्रियम गुप्ता ने बायोटेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद लैब का रास्ता छोड़कर लोक संस्कृति की पगडंडी चुनी है। प्रियम द्वारा कवर की गई एक लोक कहानी पर बनी फिल्म 'ह्यूमंस इन द लूप' को बाद में नेटफ्लिक्स पर भी जगह मिली।

इंटरनेट की दुनिया में वह @guptajikiladkee के नाम से जानी जाती हैं और आज उनकी पहचान भारत की लोक विरासत को डिजिटल रूप में सहेजने वाली सबसे सशक्त आवाज के तौर पर बन रही है।

इंस्टाग्राम पर उनके 68 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं। उनके काम को सोशल केचप समेत कई राष्ट्रीय प्लेटफार्म ने सराहा है। राजस्थान के प्रसिद्ध लोक गायक मामे खान तक ने उनके प्रयासों को लेकर व्यक्तिगत रूप से संदेश भेजा है।

बचपन से जुड़ी है लोक से नाता

प्रियम का बचपन संयुक्त परिवार में बीता। वह बताती हैं कि उनके घर में दीपावली, छठ पूजा, बसेड़ा और बचबरस जैसे त्योहार सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि पूरे परिवार और मोहल्ले के मिलने का उत्सव होते थे। यही त्योहार उनके भीतर लोक के प्रति जिज्ञासा का पहला बीज बने।

असम के गुंजुंग गांव ने दिखाया रास्ता

प्रियम के जीवन में निर्णायक मोड़ असम के गुंजुंग नामक एक दूरस्थ गांव में आया। वहां उन्होंने ग्रामीणों को अत्यंत मधुर लोकगीत गाते सुना। उत्सुकतावश जब उन्होंने गीत का अर्थ पूछा तो ग्रामीणों ने उत्तर दिया, "हमें इसका अर्थ नहीं पता।

जो लोग इसका अर्थ जानते थे, वे या तो बहुत बूढ़े हो गए हैं या अब इस दुनिया में नहीं हैं। "प्रियम कहती हैं कि यह वाक्य उनके मन में बैठ गया। उसी दिन उन्होंने निश्चय किया कि लुप्त हो रहे गीतों, भाषाओं और मौखिक इतिहास को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जाए, इससे पहले कि वे हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएं।

स्त्रियों ने बचाए हैं लोकगीत, चार रूपों का किया जिक्र

अपने शोध में प्रियम ने बताया कि भारतीय लोकगीतों को सदियों तक महिलाओं ने ही जीवित रखा है।

  1. पनिहारी गीत : पानी भरने जाते समय गाए जाने वाले गीत।
  2. चरखा गीत : चरखे पर सूत कातते हुए गाए जाने वाले गीत।
  3. विरह गीत : प्रियतम की प्रतीक्षा में गाए जाने वाले गीत, जैसे राजस्थान का प्रसिद्ध गीत 'केसरिया बालम'।
  4. जांतसार गीत : भोजपुरी क्षेत्र में जांता यानी हाथ-चक्की पर गेहूं पीसते हुए गाए जाने वाले गीत, जैसे 'सून-सून लागे गररिया'।

प्रियम लोकप्रिय संस्कृति का सहारा लेकर भी लोक को समझाती हैं। वह बताती हैं कि फिल्मी गीत 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' के बहाने राजस्थान की कृषि, 'बाजरे दा सिट्टा' से पंजाब की भोजन परंपरा और 'बुमरो' से कश्मीर की सर्दियों की कहानी कही जा सकती है।

तीन बड़े विजन पर कर रही हैं काम

प्रियम अब तीन बड़े लक्ष्यों पर काम कर रही हैं। पहला, शहरी अकेलेपन को दूर करने के लिए 'कल्चर पार्टी' का आयोजन। इसमें राजस्थान नाइट में दाल-बाटी और लोक संगीत, कश्मीर इवनिंग में कविता और वसंत के गीत तथा झारखंड गैदरिंग में स्थानीय भोजन और मौखिक कहानियां परोसी जाएंगी।

दूसरा, भाषाविदों, लोक कलाकारों, बुजुर्गों, इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का एक जीवंत नेटवर्क तैयार करना। तीसरा, पूरे भारत में घूम-घूमकर हथकरघा कलाकारों, शिल्पकारों और लोक संगीतकारों के साथ काम कर एक जीवंत अभिलेखागार बनाना।

छोटी-छोटी उपलब्धियां बनीं बड़ी मिसाल

प्रियम ने कई ऐसी चीजों को दर्ज किया है जिनका जिक्र अब कहीं नहीं मिलता। बंजारा आभूषण 'धोलना' की तो इंटरनेट पर तस्वीर तक नहीं थी, एक फॉलोअर ने अपनी दादी का धोलना उन्हें भेजा।

पहाड़ों की लुप्त हो रही लिपि 'टांकरी' को सीखने के लिए उन्होंने 100 से अधिक लोगों को संस्थान से जोड़ा। जम्मू के स्थानीय कृषि उत्सव 'रूत रहदे' को भी उन्होंने युवाओं तक पहुंचाया।

वह राज्य के पर्यटन, संस्कृति और शिक्षा विभागों के साथ मिलकर इस ज्ञान को युवाओं तक ले जाना चाहती हैं। उनका कहना है, "यदि आप किसी ऐसे बुजुर्ग को जानते हैं, जिसे पुराने गीत याद हों, किसी लोक कलाकार को जिसे मंच चाहिए, या किसी ऐसे त्योहार को जो गुम हो रहा है, तो कृपया मुझे बताएं।"

वह कहती हैं - Wear your culture on your sleeve and carry it in your heart. यानी अपनी संस्कृति को आस्तीन पर पहनो और दिल में बसाओ। 

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