Jharkhand News: दीपावली की रात SBMCH का लेबर रूम ठप, प्रसव के लिए भटकती रहीं गर्भवती महिलाएं
दीपावली की रात हजारीबाग के एसबीएमसीएच अस्पताल में डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के कारण लेबर रूम सेवाएं ठप रहीं, जिससे ...और पढ़ें

लेबर वार्ड खाली। फोटो जागरण
HighLights
दीपावली की रात एसबीएमसीएच लेबर रूम सेवाएं बाधित रहीं।
डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार से गर्भवती महिलाएं भटकती रहीं।
सांसद प्रतिनिधि ने तत्काल सेवा बहाली की मांग की।
जागरण संवाददाता, हजारीबाग। दीपावली की रात पूरा शहर रोशनी और खुशियों में डूबा था, लेकिन जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसबीएमसीएच) का लेबर रूम अंधेरे में रहा।
यहां प्रसव संबंधी चिकित्सा सेवाएं बाधित रहने से गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
एक सिजेरियन मरीज की मौत के बाद हुए हंगामे के विरोध में चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार की बात सामने आई है। इसके कारण पिछले दो दिनों से लेबर रूम और लेबर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) की सेवाएं प्रभावित हैं।
अस्पताल में चिकित्सा कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद चिकित्सकों के ड्यूटी पर नहीं पहुंचने से लेबर रूम में सन्नाटा पसरा रहा। प्रसव पीड़ा से परेशान गर्भवती महिलाएं और उनके परिजन इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे।
सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले गरीब परिवारों के सामने दूसरे अस्पतालों का रुख करने की मजबूरी खड़ी हो गई।
मामले को लेकर सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने नाराजगी जताते हुए जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने कहा कि किसी एक घटना के बाद पूरे विभाग की चिकित्सा सेवाओं का बाधित हो जाना चिंताजनक है। इसका खामियाजा उन गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है, जिनका इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निजी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव पर 30 से 35 हजार रुपये तक खर्च करना आसान नहीं है। ऐसे में सरकारी अस्पताल की मातृत्व चिकित्सा सेवाएं ठप होना गरीब परिवारों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन रहा है।
रंजन चौधरी ने कहा कि चिकित्सकों की सुरक्षा और सम्मान भी जरूरी है। चिकित्सकों की समस्याओं का समाधान संवाद और प्रशासनिक पहल से होना चाहिए, लेकिन मातृत्व चिकित्सा जैसी अनिवार्य सेवा को बाधित रखना उचित नहीं है।
मरीजों की जिंदगी किसी भी विवाद से बड़ी है। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं और नवजातों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने इस मामले की जानकारी हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल को भी दी है। उनके अनुसार सांसद जल्द ही संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर समस्या के समाधान की दिशा में पहल करेंगे।
रंजन चौधरी ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन से अविलंब लेबर रूम एवं लेबर ओटी की सेवाएं बहाल कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द व्यवस्था सामान्य नहीं हुई तो जनहित में आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि दीपावली की खुशियां तभी सार्थक होंगी, जब अस्पताल में सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था सुनिश्चित हो और किसी भी मां को इलाज के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े। मातृत्व चिकित्सा जैसी जरूरी सेवा किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए।