विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हाईकोर्ट के स्टे के बीच हजारीबाग के हुरहुरू खास महल जमीन पर पक्का निर्माण शुरू, उठे सवाल

Published: Sat, 17 Oct 2026 08:22 AM (IST)

हजारीबाग के हुरहुरू स्थित खास महल जमीन विवाद फिर गरमा गया है, जहां हाईकोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश ...और पढ़ें

हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद हुरहुरू खास महल जमीन पर निर्माण। जागरण

हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद हुरहुरू खास महल जमीन पर निर्माण। जागरण

HighLights

  1. हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद हुरहुरू खास महल जमीन पर निर्माण।

  2. पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव और प्रशासन के बीच मालिकाना हक का विवाद।

संवाद सहयोगी, हजारीबाग। शहर के हुरहुरू स्थित कैंटोनमेंट मौजा की खास महल जमीन का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। विगत सितंबर में जिस जमीन पर प्रशासन ने पुलिस बल और जेसीबी की मदद से कार्रवाई करते हुए पीसीसी सड़क और शेड हटाया था, उसी विवादित स्थल पर अब पक्की बाउंड्री वाल का निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है।

गौरतलब है कि इस भूमि पर की गई सरकारी कार्रवाई के विरोध में पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर किया था। जिसके आलोक में विगत पांच अक्टूबर को हाईकोर्ट ने स्टे लगाते हुए यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया था।

बताते चलें कि यह विवाद भूमि की प्रकृति को लेकर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव एवं जिला प्रशासन के बीच है। पूर्व मंत्री जहां इस भूमि पर अपना मालिकाना हक जताते हैं तो प्रशासन के मुताबिक यह खासमहाल की जमीन है, जिस पर सरकार का हक है। इस बीच योगेन्द्र साव के द्वारा जमीन पर शेड एवं पीसीसी पथ का निर्माण कराया जा रहा था।

सूचना मिलने पर प्रशासन के द्वारा किए गए सभी निर्माण को जेसीबी की मदद से तोड कर हटा दिया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई के दौरान पूर्व मंत्री के द्वारा घटनास्थल पर मौजूद सदर अंचलाधिकारी के साथ गाली-गलौज भी किया गया था। वहीं मामले को लेकर जब पूर्व मंत्री ने हाईकोर्ट में याचिक दायर किया तो स्टे दे दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, हाईकोर्ट ने चार सप्ताह का समय देते हुए इस मुद्दे पर अगले माह सुनवाई करने की बात कही। अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन भूमि पर किया जा रहा निर्माण को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं है। लोग सवाल उठा रहे हैं।

विवादित भूमि पर फिर से पक्का निर्माण किए जाने की सूचना मिली है। लेकिन यह मामला हाईकोर्ट के अंतर्गत विचाराधीन है और हाईकोर्ट ने यथास्थिति बरकार रखने का निर्देश दिया है, तो किसी प्रकार की कार्रवाई संभव नहीं है। हालांकि अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष हाईकोर्ट के समक्ष रखा जाएगा।

-आशुतोष, अंचलाधिकारी, सदर प्रखंड, हजारीबाग। 

यह भी पढ़ें- अवैध कोयला खनन पर CISF का शिकंजा: हजारीबाग, लातेहार, चतरा में बड़ी कार्रवाई, ग्रामीणों का हंगामा

यह भी पढ़ें- हजारीबाग में खास महाल की जमीन का होगा पूरा हिसाब, 30 अक्टूबर तक सर्वे रिपोर्ट सौंपने का आदेश