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तबादला डाड़ी में, दस्तखत चौपारण में! हजारीबाग में सचिव की आईडी से बने 92 जन्म प्रमाण पत्र; फर्जीवाड़े की आशंका 

Published: Wed, 07 Oct 2026 08:50 AM (IST)

हजारीबाग के चौपारण में पूर्व पंचायत सचिव की लॉगिन आईडी से एक ही दिन में 92 जन्म प्रमाण पत्र जारी ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. पूर्व पंचायत सचिव की आईडी से 92 जन्म प्रमाण पत्र जारी।

  2. सभी प्रमाण पत्र निरस्त, बीडीओ ने दर्ज कराई प्राथमिकी।

  3. तबादले के बाद भी पूर्व पंचायत सचिव की ID का इस्तेमाल।

संवाद सूत्र, चौपारण (हजारीबाग)। प्रखंड की सिंघरावां पंचायत में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है। पंचायत सचिव के स्थानांतरण और नए सचिव के प्रभार संभालने के बाद भी पूर्व पंचायत सचिव की लॉगिन आईडी का इस्तेमाल कर एक ही दिन में 92 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

मामले में डिजिटल सिग्नेचर और ओटीपी के इस्तेमाल की बात भी सामने आने के बाद प्रखंड प्रशासन ने सभी प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया है। बीडीओ की ओर से मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सह बीडीओ चौपारण नितेश भास्कर की ओर से थाना प्रभारी को दिए आवेदन के आधार पर कांड संख्या 258/26 दर्ज किया गया है। बीडीओ ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, सिंघरावां पंचायत की पंचायत सचिव अनुरागिनी प्रिया का स्थानांतरण चौपारण से डाड़ी प्रखंड कर दिया गया था। इसके बाद 22 अगस्त को केदार साव को सिंघरावां पंचायत के पंचायत सचिव का प्रभार सौंपा गया। जन्म-मृत्यु निबंधन के लिए नए पंचायत सचिव की लॉगिन आईडी तैयार करने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान पूर्व पंचायत सचिव की लॉगिन आईडी से 92 जन्म प्रमाण पत्र जारी होने की जानकारी सामने आई।

जिला सांख्यिकी कार्यालय से मिली जानकारी के आधार पर प्रखंड प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में पूर्व पंचायत सचिव की लागिन आईडी के इस्तेमाल के साथ प्रज्ञा केंद्र संचालक नौशाद असगर की भूमिका सामने आने की बात कही गई है।

आरोप है कि पूर्व पंचायत सचिव से डिजिटल सिग्नेचर और ओटीपी प्राप्त कर प्रमाण पत्र जारी किए गए। हालांकि मामले की वास्तविकता पुलिस और विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

नियमों की अनदेखी का आरोप

जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों के तहत स्थानीय क्षेत्र में नियुक्त रजिस्ट्रार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर अधिकृत रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु की सूचना दर्ज कर प्रमाण पत्र जारी करता है। सामान्य स्थिति में जन्म के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने का प्रावधान है। विलंब की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है। प्रशासन का आरोप है कि सिंघरावां पंचायत में इन प्रक्रियाओं की अनदेखी कर प्रमाण पत्र जारी किए गए।

एसआईआर के बीच प्रमाण पत्रों की जांच से बढ़ी गंभीरता

वर्तमान में निर्वाचन आयोग के निर्देश पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का कार्य चल रहा है। ऐसे में जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर उठे सवालों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि 92 प्रमाण पत्रों में किन लोगों के नाम दर्ज हैं, उनके आवेदन और संबंधित दस्तावेज क्या थे तथा प्रमाण पत्र जारी करने में किस लॉगिन, डिजिटल सिग्नेचर और ओटीपी का इस्तेमाल किया गया। बीडीओ नितेश भास्कर ने कहा कि मामले में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। पूरा प्रकरण गंभीर है और इसकी जांच कराई जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

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