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हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बांग्लादेशी महिला से दुष्कर्म, तीन पुलिसकर्मी निलंबित; हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Published: Mon, 05 Oct 2026 06:15 PM (IST)

हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बांग्लादेशी महिला से दुष्कर्म के आरोप में तीन पुलिसकर्मी निलंबित किए गए हैं। हाई कोर्ट ने ...और पढ़ें

बांग्लादेशी महिला को बरी होने के बाद भी डिटेंशन सेंटर में रखने का मामला।

बांग्लादेशी महिला को बरी होने के बाद भी डिटेंशन सेंटर में रखने का मामला।

HighLights

  1. डिटेंशन सेंटर में महिला से दुष्कर्म, तीन पुलिसकर्मी निलंबित।

  2. हाई कोर्ट ने महिला को आवश्यक सुविधाएं देने का निर्देश दिया।

  3. बांग्लादेश भेजने के प्रयासों पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस अखिल कुमार की अदालत में हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में रखी गई महिला से दुष्कर्म और बरी होने के बाद भी अब नहीं छोड़ने के जाने के मामले में सोमवार को सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया कि इस मामले में आरोपित तीन कांस्टेबल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। डालसा की ओर से अदालत में पेश की गई सीलबंद रिपोर्ट में भी महिला के साथ तीन पुलिसकर्मियों द्वारा दुष्कर्म किए जाने का उल्लेख किया गया है।

अदालत ने सरकार को महिला को डिटेंशन सेंटर में रहने के दौरान आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। अदालत ने प्रार्थी को राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब पर प्रति उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है।


सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि महिला को बांग्लादेश भेजने के लिए वर्ष 2023 से ही विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा जा रहा हैं। अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।

इस पर अदालत ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता से इस बिंदु पर जवाब दाखिल करने को कहा। अदालत ने तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी में लगाई गई धाराओं को लेकर भी सवाल उठाया। इस पर महाधिवक्ता रोहितश्य राय ने अदालत को आश्वस्त किया कि प्राथमिकी में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।

2021 में तीन साल की सजा, फिर भी डिटेंशन सेंटर में क्यों

सुनवाई में अदालत ने महिला को लंबे समय तक हिरासत में रखे जाने को लेकर अदालत ने सरकार से मौखिक रूप से पूछा कि यदि महिला को वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम के मामले में दोषी ठहराकर तीन साल की सजा दी गई थी, तो सजा पूरी होने के बाद उसे बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा गया। उसे डिटेंशन सेंटर में रखने की जरूरत क्यों पड़ी।

अदालत ने यह भी पूछा किया कि वर्ष 2025 में महिला के खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत दोबारा मामला दर्ज किया गया, जबकि वर्ष 2026 में वह उस मामले में बरी हो चुकी है। बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ सरकार ने अपील क्यों नहीं की।

सुनवाई के दौरान मौजूद गृह सचिव ने अदालत को बताया कि महिला को बांग्लादेश भेजने के लिए सरकार की ओर से बांग्लादेश सरकार से संपर्क किया गया था, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि महिला के खिलाफ वर्ष 2018 में दो मामले दर्ज किए गए थे। इनमें एक बच्चे के अपहरण से संबंधित और दूसरा विदेशी अधिनियम से जुड़ा मामला था। बच्चे के अपहरण से संबंधित मामले में महिला को दो साल की सजा हुई थी, जबकि वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम के मामले में उसे तीन साल की सजा सुनाई गई थी।

सजा के बाद महिला को हजारीबाग डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया था। वह वर्ष 2025 के अंत में डिटेंशन सेंटर से भाग गई थी। इसके बाद उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत एक और मामला दर्ज किया गया, जिसमें वर्ष 2026 में उसे बरी कर दिया गया।

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