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दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के नए मार्ग को गोड्डा प्रशासन की अनुमति नहीं, पूजा कमेटी ने परिसर में ही तालाब खुदवाना शुरू किया

Published: Thu, 22 Oct 2026 10:39 PM (IST)

Godda News: कालीपीठ में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन मार्ग को लेकर विवाद गहरा गया है, जिससे गुरुवार को प्रतिमा का विसर्जन नहीं हो सका। प्रशासन पुराने मार्ग पर अड़ा है।

गोड्डा के कालीपीठ में प्रतिमा विसर्जन के लिए खोदा जा रहा तालाब। (एआइ फोटो)

गोड्डा के कालीपीठ में प्रतिमा विसर्जन के लिए खोदा जा रहा तालाब। (एआइ फोटो)

HighLights

  1. कालीपीठ दुर्गा प्रतिमा विसर्जन मार्ग को लेकर गहराया विवाद।

  2. प्रशासन पुराने मार्ग पर अड़ा, समिति नए मार्ग की मांग।

  3. पूजा समिति ने मंदिर परिसर में ही तालाब खोदना शुरू किया।

संवाददाता, गोड्डा। झारखंड के गोड्डा जिले के कालीपीठ में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन को लेकर विवाद गहरा गया है। इस विवाद के कारण गुरुवार को प्रतिमा का विसर्जन नहीं हो सका। प्रतिमा फिलहाल कालीपीठ मंदिर परिसर में ही स्थापित है। विवाद का मुख्य कारण विसर्जन मार्ग को लेकर है।

कालीपीठ पूजा समिति की संचालिका वंदना दुबे ने शहर के राजकचहरी तालाब में प्रतिमा विसर्जन की अनुमति के लिए जिला प्रशासन को आवेदन सौंपा था। आवेदन में उल्लेख किया गया था कि पुराने मार्ग से प्रतिमा का विसर्जन इस बार संभव नहीं है, क्योंकि यह मार्ग अत्यंत जर्जर है। इस मार्ग से प्रतिमा ले जाने पर उसके खंडित होने की आशंका है।

हालांकि, जिला प्रशासन ने विधि-व्यवस्था का हवाला देते हुए पुराने मार्ग से ही प्रतिमा विसर्जन करने का निर्देश दिया। इसके बाद विवाद और गहरा गया। प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने पर पूजा समिति ने कालीपीठ परिसर में ही तालाब की खुदाई शुरू करा दी। साथ ही समिति ने पुराने मार्ग से प्रतिमा विसर्जन नहीं करने का निर्णय लिया है।

खबर लिखे जाने तक प्रतिमा विसर्जन को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका था। उधर, रैयती जमीन पर तालाब की खुदाई जोर-शोर से कराई जा रही थी। इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से मौके पर मजिस्ट्रेट और पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती कर दी गई है।

एसडीओ ने हर हाल में 22 अक्टूबर तक विसर्जन करने का दिया निर्देश

एसडीओ ने डीसी के पत्रांक का उल्लेख करते हुए अपने पत्र में कालीपीठ स्थित मां दुर्गा की प्रतिमा को स्थानीय तालाब में ही विसर्जित करने का निर्देश दिया है। इसके लिए उन्होंने हाईवे सहित अन्य मार्गों से जुड़ी समस्याओं का हवाला दिया है।

पत्र में बताया गया है कि हाईवे पर प्रतिमा ले जाने से दुर्घटना की आशंका हो सकती है। इसी आधार पर निर्धारित तिथि तक प्रतिमा विसर्जन कराने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए दंडाधिकारी सहित पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति भी की गई है।

मार्गदर्शन मिलने तक कालीपीठ की प्रतिमा का नहीं होगा विसर्जन : संचालिका

पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए पूजा समिति की संचालिका वंदना दुबे ने कहा कि पुरानी व्यवस्था के तहत स्थानीय तालाब में प्रतिमा विसर्जन करना मुश्किल है। ऐसा करने पर प्रतिमा खंडित हो सकती है। इस संबंध में जिला प्रशासन को पहले ही अवगत कराया जा चुका है, लेकिन बार-बार स्थानीय तालाब में ही प्रतिमा विसर्जित करने का दबाव बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हाईवे और दूरी का हवाला देकर प्रशासनिक अनुमति नहीं दी जा रही है, जबकि कुरमन की प्रतिमा लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय कर मुलर्स टैंक तालाब में विसर्जित की जाती है। ऐसे में अनुमति नहीं मिलना दुखद है।

वंदना दुबे ने बताया कि प्रतिमा विसर्जन के लिए उनके स्तर से कालीपीठ परिसर में ही तालाब की खुदाई कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले में जिला प्रशासन से उचित मार्गदर्शन नहीं मिल जाता, तब तक प्रतिमा पंडाल में ही स्थापित रहेगी और उसे कहीं नहीं ले जाया जाएगा।

पहले छोटी प्रतिमा का होता था निर्माण

जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से कालीपीठ में छोटी प्रतिमा का निर्माण कराया जाता था। इस बार बड़ी प्रतिमा स्थापित की गई और भव्य पंडाल बनाकर पूजा-अर्चना की गई। छोटी प्रतिमा होने के कारण उसे ठेले पर ले जाकर स्थानीय तालाब में विसर्जित कर दिया जाता था।

लेकिन इस बार बड़ी प्रतिमा होने के कारण पुरानी व्यवस्था के तहत विसर्जन करना मुश्किल हो गया। इसी वजह से पुराने और नए मार्ग को लेकर विवाद गहरा गया।

प्रशासन पुराने मार्ग से ही विसर्जन कराने पर अड़ा रहा, जबकि पूजा समिति नए मार्ग से प्रतिमा ले जाने की मांग पर कायम रही। इसके कारण निर्धारित तिथि 22 अक्टूबर को भी प्रतिमा का विसर्जन नहीं हो सका।

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प्रतिमा विसर्जन की जो पुरानी व्यवस्था थी, उसे ही यथावत रखा गया है। एकाएक नया परिवर्तन संभव नहीं है। विधि-व्यवस्था को ध्यान में रखकर सभी कार्य पूरे किए जाएंगे। पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है। वहां पुलिस बल और दंडाधिकारी की तैनाती की गई है। विसर्जन के लिए पूजा कमेटी से बात की जा रही है।

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बैद्यनाथ उरांव, एसडीओ, गोड्डा