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पति की दिहाड़ी पर निर्भर थीं गोड्डा की चुन्नी देवी, सखी मंडल से जुड़कर सिलाई और सब्जी की खेती से बदली जिंदगी

Published: Mon, 19 Oct 2026 11:07 PM (IST)Updated: Mon, 19 Oct 2026 11:09 PM (IST)

गोड्डा की चुन्नी देवी ने आजीविका महिला समूह से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति बदली है।

सिलाई करतीं चुन्नी देवी। (जागरण)

 सिलाई करतीं चुन्नी देवी। (जागरण)

HighLights

  1. चुन्नी देवी ने आजीविका समूह से जुड़कर जीवन बदला।

  2. सिलाई-कढ़ाई और सब्जी की खेती से बनीं आत्मनिर्भर।

  3. छह बार ऋण लेकर बढ़ाया अपना रोजगार, बनीं प्रेरणा।

अनिल आनंद, मेहरमा (गोड्डा)। कभी परिवार के भरण-पोषण के लिए पति की दैनिक मजदूरी पर निर्भर रहने वाली चुन्नी देवी आज आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं।

आर्थिक तंगी के कारण जहां पहले परिवार की जरूरतों को पूरा करना और बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना चुनौती थी।

वहीं, आजीविका महिला समूह से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। सिलाई-कढ़ाई और सब्जी की खेती को आजीविका का माध्यम बनाकर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

सफलता की चर्चा अब क्षेत्र में होने लगी

मेहरमा प्रखंड के कोंकरा मलिक गांव की रहने वाली चुन्नी देवी पति दिलीप रजक की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की प्रेरक मिसाल है।

समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार में पांच सदस्य थे। परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके पति पर थी।जो दैनिक मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च चलाते थे।

Chunni Devi

सीमित आमदनी के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो जाता था। खाने-पीने और अन्य जरूरी खर्चों के बीच बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना भी आसान नहीं था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

समूह से जुड़ने के बाद मिली नई राह

चुन्नी देवी ने छह अक्टूबर 2018 को गुलाब आजीविका सखी मंडल से जुड़कर अपने जीवन में बदलाव की शुरुआत की।

इसके बाद वह वीरमकित्ता आजीविका महिला ग्राम संगठन से भी जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। उन्होंने इस अवसर का लाभ उठाते हुए अपनी मेहनत और लगन से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।

चुन्नी देवी ने आजीविका के लिए दर्जी का काम यानी कपड़ों की सिलाई और सब्जी की खेती को चुना। इन दोनों कार्यों के माध्यम से वह अपनी आमदनी बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं।

सिलाई का काम उन्हें अपने हुनर का उपयोग करने का अवसर देता है, वहीं सब्जी की खेती ग्रामीण परिवेश में आय का एक अतिरिक्त साधन बन सकती है। इस तरह उन्होंने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में अपनी भागीदारी बढ़ाई है।

छह बार ऋण लेकर बढ़ाया रोजगार

समूह से जुड़ने के बाद चुन्नी देवी ने अपनी जरूरतों और आजीविका संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए छह बार ऋण लिया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने दो हजार और पांच हजार रुपये के दो छोटे ऋण लिए, जिनकी कुल राशि सात हजार रुपये थी।

इसके अलावा 10 हजार, 20 हजार, 25 हजार और 50 हजार रुपये के चार बड़े ऋण लिए, जिनकी कुल राशि एक लाख पांच हजार रुपये है। इस प्रकार उन्होंने कुल एक लाख 12 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया।

समूह के माध्यम से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने रोजगार को आगे बढ़ाने का अवसर दिया। हालांकि, ऋण के साथ उसे समय पर चुकाने की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। ऐसे में आय के साधनों को मजबूत बनाना और आमदनी के अनुसार खर्च का प्रबंधन करना उनके लिए महत्वपूर्ण है।

दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

चुन्नी देवी के जीवन में आया बदलाव यह संदेश देता है कि सही अवसर, मेहनत और आत्मविश्वास के सहारे ग्रामीण महिलाएं भी अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकती हैं।

पहले परिवार की आजीविका के लिए पूरी तरह पति पर निर्भर रहने वाली चुन्नी देवी अब अपनी मेहनत से परिवार को सहारा देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। आत्मनिर्भर बनने की उनकी कोशिश ने उन्हें नई पहचान दी है।

आज चुन्नी देवी जैसी महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों में महिला समूहों की उपयोगिता को सामने ला रही हैं। समूह के माध्यम से महिलाओं को बचत, ऋण और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

चुन्नी देवी की कहानी भी इसी बदलाव की एक झलक है। उनकी यात्रा बताती है कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद यदि महिलाओं को अवसर मिले और वे उसका सही उपयोग करें, तो वे अपने परिवार की स्थिति सुधारने के साथ समाज में भी अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

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