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गिरिडीह उपचुनाव: राजनीतिक सरगर्मी तेज, झामुमो-भाजपा में घमासान

Published: Mon, 02 Nov 2026 09:54 AM (IST)

Giridih Bypoll: गिरिडीह में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने ...और पढ़ें

झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के कारण गिरिडीह में होगा उपचुनाव। (सांकेतिक फोटो)

झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के कारण गिरिडीह में होगा उपचुनाव। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. गिरिडीह उपचुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कीं।

  2. झामुमो से श्वेता शर्मा की उम्मीदवारी लगभग तय मानी जा रही।

  3. भाजपा में टिकट के कई दावेदार, भीतरघात का खतरा।

जागरण संवाददाता, गिरिडीह। Giridih By-Election झारखंड सरकार के मंत्री सह गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद यहां होने वाले उप चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीति दलों ने कमर कस ली है। इसी के साथ क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।

खासकर झामुमो और भाजपा ने अपनी-अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। साथ ही, दोनों दल एक-दूसरे पर तीखे हमले भी करने लगे हैं। दोनों दलों के बड़े नेताओं का गिरिडीह आगमन भी शुरू हो गया है। हालांकि दोनों दल इसे संगठनात्मक कार्यक्रमों का हिस्सा बता रहे हैं, लेकिन इनके केंद्र बिंदु में उप चुनाव ही है।

प्रत्याशियों की घोाषणा नहीं, झामुमो से श्वेता हो सकती हैं उम्मीदवार

उप चुनाव को लेकर अब तक किसी भी दल ने अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, लेकिन झामुमो से दिवंगत मंत्री सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा को प्रत्याशी बनाना तय माना जा रहा है।

हालांकि, पार्टी के स्तर से इसका खुलासा नहीं किया गया है, पर मंत्री के निधन के बाद श्वेता ने राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हुए क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। वह पार्टी संगठन के कार्यक्रमों में बढ़ चढ़कर भाग ले रही हैं। इससे स्पष्ट होता है कि पार्टी की ओर से उन्हें उप चुनाव में बतौर प्रत्याशी उतारा जाएगा।

उम्मीदवार को लेकर बढ़ सकती हैं भाजपा की मुश्किलें

पार्टी को लेकर उप चुनाव में भी उम्मीदवार को लेकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उप चुनाव में टिकट के लिए पार्टी में एक दर्जन से अधिक दावेदार हैं। इनमें महिला-पुरुष दोनों शामिल हैं। इन्होंने भी पार्टी के कार्यक्रमों से इत्तर अपने स्तर से भी क्षेत्र में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं।

चुनाव के बाद मैदान से गायब हो चुके कई नेता भी मंत्री के निधन के बाद अचानक सक्रिय हो गए हैं। इनमें से कई नेता तो क्षेत्र में जनता के बीच खुद को अभी से ही प्रत्याशी के तौर पर भी प्रस्तुत करने लगे हैं। ऐसी स्थिति में प्रत्याशी चयन को लेकर पशोपेश मे पड़ सकती है। साथ ही, इसको भीतरघात का खतरा इस चुनाव में भी रहेगा।

गत विधानसभा चुनाव में भाजपा के निर्भय शाहाबादी लगभग 3200 वोटों से हारे थे। झामुमो के सुदिव्य कुमार सोनू को जीत के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। भाजपा की हार का एक कारण भीतरघात भी बताया जाता है।

पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता भी मानते हैं कि उस चुनाव में अपनों के कारण ही हार हुई थी। ये अपने वही लोग थे, जो चुनाव लड़ने के लिए पार्टी से टिकट मिलने की आस लगाए बैठे थे।

राजद, जेएलकेएम और आजसू भी उतर सकते मैदान में

उप चुनाव को लेकर राजद भी ताल ठोक रहा है राजद के जिलाध्यक्ष इरफान आलम ने कहा कि उप चुनाव लड़ने की तैयारी है। लोकतंत्र में सभी को चुनाव लड़ने का अधिकार है, लेकिन इसका अंतिम निर्णय पार्टी फोरम ही लेगी। दूसरी ओर उप चुनाव में आजसू और जेएलकेएम की ओर से भी प्रत्याशी देने की चर्चा हो रही है।

तेज हुआ नेताओं का आगमन

मंत्री के निधन के बाद गिरिडीह में भाजपा और झामुमो के बड़े नेताओं का आगमन तेज हो गया है। वे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति भी बनाने में जुट गए है, वहीं विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र में जाकर जनता की नब्ज भी टटोलने का काम कर रहे हैं।

हाल के दिनों में भाजपा के प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्रा, अमर बाउरी सहित कई नेताओं ने गिरिडीह पहुंचकर अलग-अलग कार्यक्रम किए हैं, जबकि नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी गिरिडीह में मोर्चा संभाले हुए हैं। बात यदि झामुमो की करें तो इसने भी पूरे दमखम के साथ मैदान में मोर्चा खोल दिया है।

गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने गत दिनों श्वेता शर्मा सहित पार्टी के अन्य नेताओं के साथ क्षेत्र भ्रमण किया, जबकि दर्जा प्राप्त मंत्री फागू बेसरा, मंत्री योगेंद्र प्रसाद,पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने भी गिरिडीह पहुंच कर कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की है। 

कल्पना और मरांडी पर बड़ी जिम्मेदारी

इस उप चुनाव में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन पर बड़ी जिम्मेवारी रहेगी। अपने-अपने प्रत्याशियों को जीत दिलाने की जिम्मेवारी इनके कंधों पर रहेगी। साथ ही यह इनकी अग्नि परीक्षा भी होगी।

बता दें कि गांडेय विधान सभा उप चुनाव में कल्पना मुर्मू सोरेन को जीताने में दिवंगत मंत्री सोनू का अहम योगदान रहा था। अब कल्पना को भी पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में अपनी इस जिम्मेवारी का निभाना होगा।

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भाजपा के लिए चुनाव से पहले देश प्रथम है। जनसेवा के भाव के साथ जनता की समस्याओं का समाधान पार्टी करती रही है। जन समस्याओं के बीच पार्टी हमेशा जनता के बीच रहती है। पार्टी की अभी जो भी गतिविधियां चल रही हैं, वह उप चुनाव को लेकर नहीं, बल्कि संगठनात्मक कार्यक्रमों का हिस्सा है। भाजपा के कार्यक्रम सालों भर चलते रहते हैं। उप चुनाव में कोई भीतरघात नहीं होगा। पार्टी जिसे उम्मीदवार बनाएगी, सभी कार्यकर्ता उनके लिए काम करेंगे।

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रंजीत राय, भाजापा, महानगर जिलाध्यक्ष, गिरिडीह

संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सीट खाली होने पर वहां छह माह के अंदर चुनाव कराना होता है। ऐसे में चुनाव के समय नेताओं की आवाजाही तेज तो होती ही है, लेकिन झामुमो हमेशा क्षेत्र में रहकर जनता के लिए काम करने वाली पार्टी है। चुनाव अपनी जगह में है और पार्टी-संगठन का काम अपनी जगह। पार्टी पूर्व की तरह ही अभी भी काम कर रही है।

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कृष्ण मुरारी शर्मा, जिला प्रवक्ता, झामुमो, गिरिडीह

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