CRPF के 2 जवानों के बलिदान के 18 साल बाद बदली तस्वीर, गिरिडीह में 2 हार्डकोर माओवादियों ने किया सरेंडर
Giridih News: दो हार्डकोर माओवादियों, सीताराम सोरेन और पवन कुमार मुर्मू उर्फ शिवलाल मुर्मू ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया है।

गिरिडीह में दो माओवादियों ने किया सरेंडर। (प्रतीकात्मक फोटो)
जागरण संवाददाता,गिरिडीह। देश को माओवाद मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान में गिरिडीह के दो हार्डकोर माओवादियों ने सोमवार को न्यायालय में सरेंडर किया है।
जिला जज वन कंवलजीत चौपड़ा की अदालत में माओवादी सीताराम सोरेन और पवन कुमार मुर्मू उर्फ शिवलाल मुर्मू ने सरेंडर कर दिया। न्यायालय ने दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया है ।
दोनों साल 2008 के एक बड़ी घटना के वांछित अभियुक्त थे। इस कांड के सूचक तत्कालीन एसआइ अहमद अली ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। कहा था कि हजारीबाग जिला में उग्रवादियों के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद माओवादियों ने सात अगस्त 2008 को उत्तरी छोटानागपुर बंद का आह्वान किया था ।
इसी को देखते हुए रेलवे ट्रैक और जीटी रोड पर व अन्य स्थानों पर पुलिस गश्ती चल रही थी। ताकि समाज में दहशत नहीं फैल सके। रात को करीब आठ बजे यह सूचना मिली थी कि भाकपा माओवादी संगठन के सदस्य रेलवे ट्रैक,जीटी रोड पर बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं।
सूचना पर निमियाघाट थाना प्रभारी,सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट समेत जिले के कई पुलिस अधिकारी और जवान लगातार गश्ती करने लगे।
रात करीब ग्यारह बजे लक्ष्मण टुंडा के पास पुलिया के पास पहुंचने पर वहां घात लगाकर बैठे करीब पचास से साठ माओवादी दस्ता ने पुलिस को देखते ही अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
पुलिस की तरफ से चार सौ 57 राउंड फायर किए गए वही माओवादियों ने करीब दो सौ राउंड फायरिंग की थी। इसमें सीआरपीएफ के जवान राम सिंह धामी और कांस्टेबल बिजेंद्र सिंह को गोली लगी। दोनों जख्मी हो गए थे ।
इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई थी। इस मामले में कई माओवादियों की गिरफ्तारी हुई थी, कुछ ने सरेंडर किया था। वहीं नेतृत्वकर्ता नवीन मांझी इस मामले में जेल में बंद है।
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