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बच्चे की लंबी उम्र की कामना में किया था जितिया व्रत, गढ़वा में कुरइन पत्ता लेने गए बेटे की तालाब में डूबने से मौत

Published: Sun, 04 Oct 2026 10:07 AM (IST)

गढ़वा के रमकंडा में जितिया पर्व के लिए कुरइन पत्ता लेने गए संतोष लोहरा की तालाब में डूबने से मौत ...और पढ़ें

तालाब में संतोष लोहरा के शव की खोजबीन करते लोग। जागरण

तालाब में संतोष लोहरा के शव की खोजबीन करते लोग। जागरण

संवाद सूत्र, रमकंडा (गढ़वा)। कहते हैं मां का आंचल संतान के लिए दुनिया का सबसे सुरक्षित कवच होता है। संतान की लंबी उम्र और उसकी सलामती के लिए मां चौबीस घंटे का अखंड निर्जला उपवास रखती है। गढ़वा जिले के रमकंडा थाना क्षेत्र से एक ऐसी ही मर्मस्पर्शी और रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

शनिवार की शाम बैरिया गांव स्थित तालाब में जितिया पर्व के लिए कुरइन (कमल) का पत्ता लेने उतरा 35 वर्षीय संतोष लोहरा गहरे पानी में समा गया। जो बेटा अपनी मां के व्रत को पूरा करने के लिए तालाब में उतरा था, वह खुद काल के गाल में समा गया।

रंका थाना क्षेत्र के चुटिया गांव निवासी संतोष की मौत की खबर जैसे ही उसकी मां तक पहुंची, मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस बेटे की लंबी उम्र के लिए मां ने होंठों पर पानी की एक बूंद तक नहीं ली थी, उसी बेटे का शव देख मां बेसुध हो गई।

भाई को बचाने की जंग, एक को मिला जीवन तो दूसरा हारा सांसें :

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, संतोष लोहरा अकेले नहीं आया था। वह अपने भाई के साथ पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ बैरिया तालाब पहुंचा था ताकि मां की पूजा के लिए पवित्र कुरइन का पत्ता ले जा सके। पत्ता तोड़ने के क्रम में संतोष का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी की ओर चला गया। संतोष को डूबता देख किनारे पर खड़ा उसका भाई अपनी जान की परवाह किए बिना उसे बचाने के लिए पानी में कूद गया।

देखते ही देखते दोनों भाई जिंदगी और मौत के बीच जूझने लगे। तालाब के किनारे मौजूद ग्रामीणों ने जब यह मंजर देखा, तो चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाई और तुरंत पानी में ट्यूब फेंका। ट्यूब के सहारे दूसरे भाई को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन संतोष को गहरे पानी ने अपनी आगोश में ले लिया।

सुरक्षा के अभाव पर भड़के ग्रामीण, तालाब बना डेंजर जोन

घटना की सूचना मिलते ही रमकंडा थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों की कड़ी मशक्कत के बाद संतोष के शव को पानी से बाहर निकाला गया। थाना प्रभारी मुकेश यादव ने बताया कि पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है और मामले की वैधानिक जांच की जा रही है।

इस हादसे के बाद बैरिया गांव के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल जितिया पर्व के दौरान कुरइन पत्ता लेने के लिए इस तालाब पर सैकड़ों लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया जाता। यहां न तो कोई बैरिकेडिंग है और न ही गोताखोरों की तैनाती की जाती है। ग्रामीणों ने त्योहारों के दौरान तालाबों पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने की पुमांग की है।

जिस बेटे के लिए रखा था निर्जला व्रत, उसी का मिला शव

इस हादसे ने त्योहार की खुशियों को चीख-पुकार में बदल दिया है। चुटिया गांव में जहां माताएं जितिया के लोकगीत गा रही थीं, वहां अब सिर्फ संतोष की मां और स्वजन की सिसकियां गूंज रही हैं।

एक मां के लिए इससे बड़ा और क्या दुख हो सकता है कि जिस बेटे की सलामती की मन्नत मांगने के लिए उसने उपवास रखा, उसी का सहयोग करने के क्रम में बेटे ने अपनी जान गंवा दी। इस मार्मिक हादसे ने पूरे गढ़वा जिले की आंखें नम कर दी हैं। 

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