गढ़वा में शहद से कमाई की मिठास, बिहार से आए लोग कर रहे मधुमक्खी पालन; स्थानीय युवाओं के लिए भी मौका
भवनाथपुर में बिहार से आए लोग मधुमक्खी पालन कर शहद उत्पादन से अपनी आजीविका चला रहे हैं। यह पहल स्थानीय ...और पढ़ें

भवनाथपुर मधुमक्खियों का छत्ता दिखाता किसान। जागरण
HighLights
बिहार के लोगों ने भवनाथपुर में शुरू किया मधुमक्खी पालन।
शहद उत्पादन से स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर।
प्रदीप चौबे, भवनाथपुर (गढ़वा)। भवनाथपुर क्षेत्र में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण जहां स्थानीय युवा दूसरे प्रदेशों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं, वहीं बिहार से आए कुछ लोग मधुमक्खी पालन कर शहद उत्पादन के जरिए अपनी आजीविका चला रहे हैं। उनकी यह पहल क्षेत्र के युवाओं के लिए स्वरोजगार की एक नई राह दिखाती है।
भवनाथपुर की पहचान लौह अयस्क, डोलोमाइट और चूना पत्थर जैसे खनिज संसाधनों से जुड़ी है, लेकिन रोजगार की संभावनाएं केवल खनन तक सीमित नहीं हैं। मछली पालन, लाह उत्पादन, रेशम उद्योग, पशुपालन और वनोपज आधारित व्यवसाय भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।
फूलों के रस से तैयार होता है शहद
मधुमक्खी पालन से जुड़े लोगों के अनुसार, वनतुलसी, सरसों, पलाश, यूकेलिप्टस और सूरजमुखी जैसे पौधों एवं पेड़ों के फूल मधुमक्खियों को रस उपलब्ध कराते हैं। मधुमक्खियों को विशेष बक्सों में पाला जाता है। अनुकूल मौसम और फूलों की उपलब्धता के आधार पर लगभग एक महीने में एक बक्से से ढाई से तीन किलो तक शहद उत्पादन होने का अनुमान है। हालांकि, उत्पादन मधुमक्खियों की संख्या, मौसम और फूलों की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
व्यवसाय से जुड़े लोगों के मुताबिक, थोक बाजार में शहद की कीमत लगभग 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक मिल सकती है। यह कारोबार साल में करीब छह से सात महीने चलता है, जबकि बारिश के मौसम में उत्पादन और मधुमक्खियों के प्रबंधन के कारण काम प्रभावित हो सकता है।
सरकारी सहयोग से बढ़ सकती हैं संभावनाएं
मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन जैसी योजनाओं के तहत प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, प्रसंस्करण और विपणन सुविधाओं को प्रोत्साहित किया जाता है। झारखंड में कृषि विभाग, उद्यान निदेशालय, कृषि विज्ञान केंद्र और संबंधित विभागों के माध्यम से प्रशिक्षण तथा उपलब्ध योजनाओं की जानकारी ली जा सकती है। पात्रता और योजना के प्रावधानों के अनुसार सहायता मिलना संभव है।
स्थानीय युवाओं को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण, बक्से, सुरक्षा उपकरण, शहद निकालने की मशीन और बाजार से जोड़ने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए तो इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से भी सामूहिक कारोबार विकसित किया जा सकता है।
स्थानीय संसाधनों से स्थानीय रोजगार
भवनाथपुर क्षेत्र में वनस्पतियों, फूलों और कृषि आधारित संसाधनों का बेहतर उपयोग कर छोटे व्यवसाय विकसित किए जा सकते हैं। जरूरत है कि प्रशासन, कृषि विभाग और बैंक युवाओं को प्रशिक्षण, ऋण तथा बाजार उपलब्ध कराने में सहयोग करें, ताकि रोजगार की तलाश में बाहर जाने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही आय के अवसर पैदा हो सकें।
