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जम्मू-कश्मीर में स्वरोजगार की उम्मीदों पर कैसे फिर रहा पानी? बैंकों में अटके हजारों आवेदन, युवाओं के हाथ अब भी खाली

Published: Wed, 21 Oct 2026 06:08 PM (IST)

सरकारी दावों के बावजूद जम्मू-कश्मीर में स्वरोजगार योजनाएं बैंकों की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण दम तोड़ रही हैं। हजारों युवाओं ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में सरकारी योजनाओं में कर्ज वितरण की रफ्तार सुस्त। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर में सरकारी योजनाओं में कर्ज वितरण की रफ्तार सुस्त। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. बैंकों की सुस्ती से स्वरोजगार योजनाएं प्रभावित, हजारों आवेदन लंबित।

  2. पीएम विश्वकर्मा, पीएमईजीपी जैसी योजनाओं में लक्ष्य से कम उपलब्धि।

  3. कारीगरों-बुनकरों को ऋण वितरण में भारी कमी, स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर।

नवीन नवाज, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी दूर करने और युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के सरकारी दावे बैंकों की सुस्त कार्यप्रणाली के सामने कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं। सरकारी विभाग युवाओं के आवेदन बैंकों तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन ऋण की मंजूरी और वितरण की रफ्तार इतनी धीमी है कि स्वरोजगार की उम्मीद लगाए हजारों आवेदक इंतजार या निराशा के बीच फंसे हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 की समीक्षा में कई प्रमुख योजनाओं का प्रदर्शन असंतोषजनक पाया गया। यह खुलासा अगस्त 2026 में हुई यूनियन टेरिटरी लेवल बैंकर्स कमेटी (यूटीएलबीसी) की समीक्षा बैठक में हुआ है जो सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रायोजित आवेदकों और असल में ऋण प्राप्त करने वालों के बीच एक बड़े अंतर को स्पष्ट करता है।

विश्वकर्मा योजना में 24 हजार से अधिक आवेदक प्रभावित

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत 39,241 मामले बैंकों को भेजे गए, लेकिन 31 मार्च 2026 तक केवल 14,645 लाभार्थियों को 135.50 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। दूसरी ओर, 11,912 आवेदन खारिज कर दिए गए और 12,684 मामले लंबित रहे। 

इसका मतलब 24,500 से अधिक आवेदक या तो बैंकों से निराश हुए या अब भी फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बैंकों ने 18 महीने की ऋण अवधि और करीब 6,000 रुपये की मासिक किस्त को परेशानी की वजह बताया।

पीएमईजीपी में लक्ष्य का एक-तिहाई ही हासिल

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 11,317 मामले प्रायोजित हुए, लेकिन केवल 4,849 लाभार्थियों को 303.23 करोड़ रुपये वितरित किए गए। लक्ष्य 6,225 लाभार्थियों को 926.42 करोड़ रुपये देने का था। इस तरह वित्तीय लक्ष्य का करीब 33 प्रतिशत ही हासिल हो सका। बैठक में योजना का पोर्टल लंबे समय तक काम नहीं करने को प्रमुख कारण बताया गया।

कारीगरों-बुनकरों की उम्मीदों पर सबसे बड़ी चोट

कश्मीर के हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र के लिए आंकड़े और भी चिंताजनक हैं। प्रधानमंत्री वीवर्स मुद्रा योजना में 1,064 लाभार्थियों का लक्ष्य था, लेकिन केवल 142 लोगों को 2.11 करोड़ रुपये मिले। कारीगरों और बुनकरों की क्रेडिट कार्ड योजना में 207 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले महज 27.75 करोड़ रुपये वितरित हुए।

11,500 लाभार्थियों के लक्ष्य के सामने 1,853 लोगों को ऋण मिला। वित्तीय लक्ष्य की उपलब्धि करीब 13 प्रतिशत रही। पारंपरिक कारोबार को सहारा देने वाली योजनाओं की यह स्थिति रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था, दोनों के लिए चिंता का विषय है।

राशि खर्च हुई, लेकिन लाभार्थियों तक पहुंच सीमित

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) में 637.89 करोड़ रुपये वितरित हुए, जो 616.45 करोड़ रुपये के वित्तीय लक्ष्य का करीब 103 प्रतिशत है। लेकिन 28,700 लाभार्थियों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 17,986 लोगों तक मदद पहुंची। जम्मू-कश्मीर ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम में 2,045 मामले प्रायोजित हुए, जबकि ऋण केवल 1,004 लाभार्थियों को मिला।

मिशन युवा भी पूरी चुनौती से पार नहीं

मिशन युवा के तहत जम्मू-कश्मीर बैंक और जम्मू-कश्मीर ग्रामीण बैंक ने 18,753 लाभार्थियों को 930.56 करोड़ रुपये वितरित किए। लेकिन 47,263 प्रायोजित मामलों में 40 प्रतिशत से भी कम आवेदकों को ऋण मिला। जम्मू-कश्मीर बैंक ने नैनो श्रेणी में 30,000 से अधिक युवाओं तक पहुंचने की जानकारी दी और चालू वित्त वर्ष के अंत तक यह संख्या 50,000 से पार होने की उम्मीद जताई।

मुख्य सचिव के निर्देश, अब अमल की परीक्षा

मुख्य सचिव ने बैंकों को पात्र युवाओं को बिना अनावश्यक परेशानी ऋण देने और लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करने के निर्देश दिए। मिशन युवा के तहत भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक को भी जोड़ने को कहा गया।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

चैंबर आफ ट्रेडर्स फैडरेशन के अध्यक्ष नीरज आनंद ने कहा कि स्वरोजगार योजनाओं की स्थिति क्या है, यह सभी को पता है। बैंक अपनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद ही ऋण प्रदान करेंगे, इसलिए आवेदन भेजना और वास्तविक लाभार्थी तैयार करना दो अलग-अलग विषय हैं। इसलिए सवाल यह है कि क्या ऋण की शर्तें तय करते समय छोटे कारीगरों की भुगतान क्षमता को ध्यान में रखा गया था।

पोर्टल की खामियां दूर करना, ऋण प्रक्रिया सरल बनाना, उपयुक्त शर्तें तय करना और आवेदकों को समय पर जवाब देना जरूरी है ओर इसे सुनिश्चित बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। नहीं, तो दिखाने के लिए सरकारी योजनाओं के तहत वित्तीय मदद, ऋण के आवेदकों की संख्या और लक्ष्य दोनों बढ़ते रहेंगे लेकिन स्वरोजगार शुरु करने के इच्छुक युवाओं के हाथ खाली रहेंगे।