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रिटायरमेंट के बाद भी नहीं थमी रफ्तार, दुमका के बुजुर्गों ने बनाया ‘प्रेरणा समूह’, युवाओं को दिखा रहे नई राह

Published: Wed, 30 Sep 2026 07:55 PM (IST)

International Day of Older Persons 2026: दुमका में 'प्रेरणा समूह' के सेवानिवृत्त बुजुर्ग युवा पीढ़ी को शिक्षा, राष्ट्रभक्ति और लोक संस्कृति का ज्ञान दे रहे हैं।

International Day of Older Persons: प्रेरणा समूह के सेवानिवृत्त बुजुर्ग युवा पीढ़ी को शिक्षित करने के साथ दे रहे राष्ट्र भक्ति व लोक संस्कृति का ज्ञान। (फोटो जागरण)

International Day of Older Persons: प्रेरणा समूह के सेवानिवृत्त बुजुर्ग युवा पीढ़ी को शिक्षित करने के साथ दे रहे राष्ट्र भक्ति व लोक संस्कृति का ज्ञान। (फोटो जागरण)

HighLights

  1. प्रेरणा समूह के बुजुर्ग युवाओं को शिक्षित कर रहे हैं।

  2. वे राष्ट्रभक्ति और लोक संस्कृति का ज्ञान देते हैं।

  3. युवाओं को नशे से दूर रहने को प्रेरित करते हैं।

राजीव, दुमका। International Day of Older Persons 2026: बुजुर्गों के हाथ चिकने, कोमल और सुघड़ नहीं होते, फिर भी हर रेखा और हर निशान की अपनी एक कहानी होती है। कुछ ऐसी ही कहानियां अपनी सेवानिवृत्ति के बाद झारखंड की उपराजधानी दुमका के कई बुजुर्ग लिख रहे हैं।

कमी न पैसे की है और न संतान की, लेकिन इन बुजुर्गों की टोली ने युवाओं के बीच एक अलग दुनिया बसा ली है। इन्होंने ठान लिया है कि हार नहीं मानेंगे और समाज, राज्य व देश के समग्र विकास में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। इसी सोच के साथ दुमका में सेवानिवृत्त बुजुर्गों के ‘प्रेरणा समूह’ की नींव पड़ी।

सकारात्मक जीवनशैली को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया 

समूह के अधिकांश बुजुर्ग अलग-अलग सेवाओं से सेवानिवृत्त हुए हैं। सेवानिवृत्ति के बाद सभी ने मिलकर न सिर्फ सकारात्मक जीवनशैली को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया, बल्कि सामाजिक गतिविधियों के जरिए युवाओं के लिए भी प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं।

टीम के कई सदस्य सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, जो बच्चों को अपने अनुभवों से सींच रहे हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराकर उन्हें सफलता के मुकाम तक पहुंचा रहे हैं। इतना ही नहीं, युवा और किशोरों को देशभक्ति से लेकर लोकसंस्कृति की मिट्टी की खुशबू से भी रू-ब-रू करा रहे हैं।

दुमका के डंगालपाड़ा मोहल्ले से कुछ ही दूरी पर ऐतिहासिक हिजला पहाड़ और राजकीय जनजातीय हिजला मेला परिसर स्थित है।

इस परिसर में लगातार 130 वर्षों से प्रत्येक वर्ष जनवरी से मार्च के बीच जनजातीय हिजला मेला लगाने की परंपरा कायम है। इस दौरान दुमका शहर ही नहीं, बल्कि झारखंड और दूसरे प्रदेशों से भी विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों का जुटान होता है।

इसी हिजला पहाड़ की खूबसूरत वादियों में प्रतिदिन प्रातः भ्रमण के लिए आने वाले बुजुर्गों ने मिलकर एक समूह बनाया और इसका नाम रखा ‘प्रेरणा समूह’।

उद्देश्य युवाओं से संवाद 

इसका उद्देश्य युवाओं से संवाद करना, उन्हें नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना, गरीब व जरूरतमंद बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अभिभावकों को जागरूक करना, स्वच्छता और सफाई का संदेश देना, घरेलू हिंसा और अंधविश्वास जैसी कुरीतियों से दूर रहने का भाव पैदा करना तथा बच्चों और बुजुर्गों के साथ निरंतर घुल-मिलकर रहने की सीख देना है।

सबसे अहम, समाज, राज्य और देश की तरक्की के लिए युवाओं को देशभक्ति के रंग में रंगने के लिए प्रेरित करना है। प्रेरणा समूह के एक-एक सदस्य की भावना स्वस्थ समाज के निर्माण से जुड़ी है।

इसके लिए सुबह की सैर के बाद गांव-समाज के लोगों के साथ चौपाल लगाकर विभिन्न सामाजिक विषयों पर चर्चा करना, हंसना-हंसाना और आपसी सौहार्द के साथ सकारात्मक जीवनशैली व दिनचर्या से युवा और किशोरों को जोड़ना तथा उन्हें मोबाइल से दूर रहने के लिए प्रेरित करना इनकी दिनचर्या का हिस्सा है।

समूह की बुनियाद राजभाषा विभाग से सेवानिवृत्त उमेश श्रीवास्तव, शिक्षक काजेश झा, संजीव कुमार, दूरदर्शन से सेवानिवृत्त रामनुज प्रसाद, उद्योग विभाग से सेवानिवृत्त सुनील चौबे के अलावा ऋषिकेश कुमार, लाला उमेश कुमार, विजय मिश्रा एवं विश्वनाथ सिंह ने रखी है।

राजभाषा विभाग से सेवानिवृत्त उमेश प्रसाद श्रीवास्तव बताते हैं कि हिजला मेला परिसर के आसपास अधिसंख्य आबादी आदिवासी समुदाय की है।

सुबह टहलने के क्रम में प्रेरणा समूह के सदस्यों से डंगालपाड़ा, हिजला और आसपास के कई युवक व किशोरों से मुलाकात होती थी। इसी दौरान जान-पहचान बढ़ती चली गई और फिर शुरू हुई सामाजिक चेतना और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के फायदे और नुकसान पर चर्चा।

बुजुर्गों ने दिखाई राह तो युवाओं में भर गया उत्साह

धीरे-धीरे यही चर्चा परिणामों में बदलने लगी और इन बुजुर्गों से प्रेरित युवा योग-अध्यात्म से जुड़ गए। कई ने नशे का सेवन छोड़ दिया। बुजुर्गों के साथ युवाओं ने भी सकारात्मक जीवनशैली जीने का संकल्प लेकर अपनी दिनचर्या बदल ली।

युवा गणेश हेंब्रम ने कहा कि पहले वह देर तक सोता था और दिनभर मोबाइल में उलझा रहता था, लेकिन अब पूरी दिनचर्या बदल गई है। इसका सीधा लाभ मिल रहा है। वह सभी काम सही और सटीक ढंग से पूरा कर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।

सेवानिवृत्त शिक्षक संजीव कुमार कहते हैं कि शिक्षा समग्र विकास का मजबूत हथियार है। उनका प्रयास है कि प्रत्येक वर्ष कुछ चिह्नित बच्चों को न सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाए, बल्कि उन्हें सफलता के मुकाम तक पहुंचाया जाए।

मेहनत का नतीजा है कि अब तक आधा दर्जन से अधिक आदिवासी बच्चों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। संजीव कहते हैं कि भावी पीढ़ी समाज और राष्ट्र के प्रति जवाबदेह बने, यही इस समूह के सदस्यों का संदेश है।

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