यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 17, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कर्ज लेकर आए थे इलाज कराने, शव ले जाने में बिका खेत
पीएमसीएच से शव ले जाने में परिजनों को खेत बेचकर राशि का इंतजाम करना पड़ा।

दिनेश कुमार, धनबाद। सड़क दुर्घटना में मौत की शिकार गिरिडीह की महिला देवकी देवी का पीएमसीएच से शव ले जाने में परिजनों को खेत बेचकर राशि का इंतजाम करना पड़ा। सड़क दुर्घटना में जख्मी महिला को यहां बेहतर इलाज के लाया गया था।
महिला को टक्कर मारने वाली गाड़ी के मालिक ने अपने खर्च पर उसके इलाज का भरोसा दिया था, लेकिन इस गरीब परिवार को न तो जख्मी महिला को गिरिडीह से धनबाद तक लाने के लिए किसी तरह की राशि दी गई और न ही मौत के बाद शव ले जाने की व्यवस्था की गई।
महिला की मौत के बाद गाड़ी मालिक का आदमी अस्पताल से ही भाग गया। किसी तरह महिला के परिजनों ने गांव में आननफानन में खेत बेचकर रुपये का इंतजाम किया और इसके बाद यहां से उधार पर एंबुलेंस बुक कर शव ले गए।
जानिए, क्या है मामला:
गिरिडीह के हीरोडीह थाना क्षेत्र के करमाटांड़ निवासी लक्ष्मण रवानी की पत्नी देवकी देवी (50 वर्ष) शुक्रवार की शाम सड़क हादसे में घायल हो गई थी। वह बाजार जा रही थी तभी रास्ते में एक बोलेरो ने उसे धक्का मार दिया था। उसे सिर में गंभीर चोट लगी थी। स्थानीय लोगों ने बोलेरो को पकड़ लिया था। इसके बाद बोलेरो के मालिक ने भरोसा दिया था कि वह घायल का अपने खर्च पर इलाज कराएगा।
इसके बाद महिला को परिजन गिरिडीह के स्थानीय अस्पताल ले गए जहां से गंभीर स्थिति के कारण उसे धनबाद रेफर कर दिया गया। लेकिन महिला को धनबाद तक लाने के लिए भी राशि नहीं दी गई। परिजनों ने गांव के ही एक बोलेरो को कर्ज लेकर बुक किया और उससे जख्मी को लेकर देर रात को पीएमसीएच पहुंचे। इलाज का खर्च देने के लिए धक्का मारनेवाली गाड़ी के मालिक ने पीएमसीएच में अपना एक आदमी भेजा था। हालांकि परिजनों के मुताबिक यहां उसने कोई राशि नहीं दी। इलाज के दौरान शनिवार सुबह महिला की मौत हो गई। यह देख गाड़ी के मालिक का आदमी परिजनों को बिना कोई राशि दिए चला गया।
महिला के पति लक्ष्मण रवानी और पुत्र अरूण राम के पास धनबाद से शव को गिरिडीह गांव ले जाने के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं थी। उन्होंने काफी देर तक मदद मिलने का इंतजार किया पर कहीं से मदद नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अपने घर फोन कर परिजनों को खेत बेचने को कहा। तत्काल खेत को बंधक रखकर पैसा का इंतजाम होने के बाद परिजनों ने यहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई। इसके बाद पीएमसीएच से निजी एंबुलेंस को 35 सौ रुपये में बुक किया गया। चालक को कहा गया कि गांव पहुंचने पर पैसा दिया जाएगा। वह इसके लिए तैयार हो गया। तब परिजन शव लेकर धनबाद से निकल सकें।
