अब रेलवे स्टेशनों पर नहीं दिखेगा ओवरफ्लो कचरा, 200 लीटर से अधिक क्षमता के स्मार्ट बिन लगेंगे
रेलवे स्टेशनों पर कचरे के ओवरफ्लो और प्रदूषण को रोकने के लिए हाईटेक वेस्ट कंपैक्टर स्मार्ट बिन लगाए जाएंगे। ये ...और पढ़ें

रेलवे स्टेशन पर डस्टबिन में कचरा डालती युवती। (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
रेलवे स्टेशन पर लगेंगे हाईटेक स्मार्ट वेस्ट कंपैक्टर बिन।
कचरा 80% तक कम होगा, ओवरफ्लो और बदबू रुकेगी।
पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के लिए रेलवे की नई पहल।
तापस बनर्जी, जागरण, धनबाद। रेलवे स्टेशन पर डस्टबिन ताे लगे हैं पर हाई फुटफाल यानी यात्रियों की अधिक आवाजाही वाले स्टेशन पर पुराने डस्टबिन की क्षमता कम होने से कूड़े ओवरफ्लो हो जाते हैं। रेल परिसर और प्लेटफार्म पर बिखरे कूड़े-कचरे से बदबू फैलती है, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है।

हवा में घुलने वाले जहर की रोकथाम के लिए रेलवे ने हाईटेक ग्रीन समाधान ढूंढ़ निकाला है। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बनाए रखने के लिए रेलवे स्टेशन पर वेस्ट कांपैक्टर स्मार्ट बिन लगाए जाएंगे।
स्मार्ट डस्टबिन 200 लीट से अधिक क्षमता का होगा और दिन में 100 बार खुद कचरे को कांपैक्ट यानी दबाएगा। इससे डस्टबिन ओवरफ्लो नहीं होगा और कचरे की मात्रा 80 प्रतिशत तक कम होगी।
रिमार्ट से मानिटरिंग, हर 30 मिनट पर डाटा अपडेट
स्मार्ट डस्टबिन सोलर से संचालित हो सकेगा। कचरा निस्तारण के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा। इसमें सेंसर भी लगा रहेगा, जो हर 30 मिनट पर डाटा अपडेट करेगा। डस्टबिन भरते ही मोबाइल या डेस्कटाप एप पर अलर्ट भेजेगा। इसकी मानिटरिंग रिमाेर्ट आधारित होगी। फ्लीट डैशबोर्ड से पूरे स्टेशन के कचरे पर एक क्लिक में नजर रखी जा सकेगी।
फुट पैडल आपरेशन, कचरा नहीं बिखेर सकेंगे पशु-पक्षी
खुले डस्टबिन के कारण पशु-पक्षियों द्वारा कूड़े बिखेरने की भी संभावना रहती है। स्मार्ट डस्टबिन फुट पैडल से अपरेट होगा। हाथ से छूने या कूड़ा निकालने की समस्या नहीं होगी। पर्यावरण फ्रेंडली होने के साथ ही मजबूत भी होगा।
रेलवे बोर्ड कैंटीन में ट्रायल, देशभर में लगाने की तैयारी
रेलवे बोर्ड की कैंटीन में ऐसे दो स्मार्ट डस्टबिन लगाए गए हैं। इसके साथ ही रेलवे बोर्ड ने मिशन ग्रीन के तहत सभी जोनल रेलवे को वेस्ट कांपैक्टर स्मार्ट बिन लगाने का निर्देश दिया है।
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रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन अमित भल्ला की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि भारतीय रेल में ठोस कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी है। पहले चरण में हाई ड्राई वेस्ट वाले स्थानों पर लगाया जाएगा। प्रदर्शन अच्छा रहा तो सभी स्टेशन पर लगेंगे।
कचरे के सड़ने से पर्यावरण दूषित होता ही है। स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। आनेवाले दिनों में कामगारों की उपलब्धता कितनी हो सकेगी, यह कहना मुश्किल है। एआइ के दौर में अगर स्मार्ट डस्टबिन लगाए जा रहे हैं तो यह यात्री हित में होगा। कारगर हुआ तो वास्तव में पर्यावरण संरक्षण में काफी हद तक मदद मिलेगी।

