चरवाहे का बेटा बना CRPF जवान, रांची में गार्ड की नौकरी करते हुए पास की परीक्षा
किशोर दास ने गरीबी और अभावों के बावजूद अपनी मेहनत से सीआरपीएफ में नौकरी हासिल कर परिवार और गांव का नाम रोशन किया है।

परिवार के साथ किशोर। (जागरण)
HighLights
किशोर दास ने गरीबी के बावजूद सीआरपीएफ में नौकरी हासिल की।
प्रशिक्षण पूरा कर घर लौटने पर ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया।
उनकी सफलता ने परिवार और पूरे गांव का नाम रोशन किया।
संवाद सूत्र, बरोरा। कहते हैं कि हौसला बुलंद हो और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो गरीबी भी सफलता की राह नहीं रोक सकती।
इसे सच कर दिखाया है निचितपुर गांव के चरवाहे बढ़न दास के पुत्र किशोर दास ने। आर्थिक तंगी और अभावों के बीच पले-बढ़े किशोर ने अपनी मेहनत और लगन से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में नौकरी हासिल कर परिवार के साथ पूरे गांव का नाम रोशन किया।
प्रशिक्षण पूरा कर घर लौटने पर ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़े के साथ स्वागत किया। पिता बढ़न दास की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी।
गार्ड की करता था नौकरी
उन्होंने किसी तरह मेहनत-मजदूरी कर बेटे को पढ़ाया। दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद किशोर गार्ड की नौकरी करने रांची चला गया। उन्होंने सीआरपीएफ की भर्ती परीक्षा में भाग लिया और सफलता हासिल की।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी नियुक्ति उत्तर प्रदेश में हुई है। किशोर ने बताया कि गरीबी और परिवार की जिम्मेदारियों ने उन्हें कठिन परिश्रम करने के लिए प्रेरित किया।
मेरी सफलता के पीछे मां बेबी देवी और पिता बढ़न दास का संघर्ष, मेहनत और आशीर्वाद है। उन्हीं की बदौलत आज इस मुकाम तक पहुंच सका हूं। ग्रामीण उपेंद्र दास, शंकर दास, संतोष दास, मणींद्र दास, इंदर रविदास आदि ने बधाई दी।
ग्रामीणों ने कहा कि किशोर ने विपरीत परिस्थितियों में सफलता हासिल कर साबित कर दिया कि मेहनत और दृढ़ संकल्प से कोई भी मंजिल पाई जा सकती है।
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