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CEC को 'देशद्रोही' कहने पर रांची में IRS अफसर निशा ने जताया दुख, बोलीं- SIR बीमार लोकतंत्र की कड़वी दवाई

Published: Tue, 29 Sep 2026 12:33 PM (IST)

Gyanesh Kumar News: राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 'देशद्रोही' कहे जाने पर विवाद जारी है। झारखंड ...और पढ़ें

राहुल गांधी और IRS अधिकारी निशा उरांव का एक्स पर पोस्ट।

राहुल गांधी और IRS अधिकारी निशा उरांव का एक्स पर पोस्ट।

HighLights

  1. निशा उरांव ने CEC को 'देशद्रोही' कहने का विरोध किया।

  2. SIR को 'बीमार लोकतंत्र के लिए कड़वी, लेकिन जरूरी दवा' बताया।

  3. अतीत में चुनाव आयोग के विवादों का भी उल्लेख किया।

मृत्युंजय पाठक, धनबाद। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठा रहे हैं।
 
हाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ज्ञानेश कुमार को ‘देशद्रोही’ तक कह दिया और उन पर भाजपा के पक्ष में ‘वोट चोरी’ कराने का आरोप लगाया।

राहुल गांधी के आरोपों के बाद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

इसी बीच झारखंड प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोहरदगा विधायक रामेश्वर उरांव की बेटी तथा भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी निशा उरांव ने ज्ञानेश कुमार को ‘देशद्रोही’ कहे जाने का विरोध किया है। निशा उरांव वर्तमान में रांची रेंज-2 में अपर आयकर आयुक्त (छूट) के पद पर कार्यरत हैं।

निशा उरांव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर चुनाव आयोग के भीतर अतीत में हुए विवादों का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि 1990 से 2009 के बीच चुनाव आयोग में कई गंभीर मतभेद हुए, लेकिन पहले कभी ‘देशद्रोह’ का आरोप नहीं लगाया गया।

शेषन से चावला तक आयोग में हुए विवादों का दिया हवाला

निशा उरांव ने अपने पोस्ट में वर्ष 1990 के विवाद का जिक्र करते हुए लिखा कि तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन ने तीन सदस्यीय चुनाव आयोग बनाए जाने के फैसले का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने अपने साथी चुनाव आयुक्तों को अपने समकक्ष मानने से इनकार किया था। यह विवाद बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

उन्होंने वर्ष 2005 के घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, आयोग के भीतर तत्कालीन चुनाव आयुक्तों, विशेष रूप से एन. गोपालस्वामी, ने नवीन चावला की एक राजनीतिक दल के साथ कथित नजदीकियों को लेकर आपत्ति जताई थी।

इसके बाद वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने राष्ट्रपति को सिफारिश भेजकर साथी चुनाव आयुक्त नवीन चावला को राजनीतिक रूप से पक्षपाती बताते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की थी। निशा उरांव ने अपने पोस्ट में यह भी रेखांकित किया कि बाद में नवीन चावला ही मुख्य चुनाव आयुक्त बने।

‘SIR बीमार लोकतंत्र के लिए कड़वी, लेकिन जरूरी दवा’

निशा उरांव ने अपने पोस्ट में SIR को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने इसे ‘बीमार लोकतंत्र के लिए कड़वी और जरूरी दवा’ बताया।

उनका तर्क है कि चुनाव आयोग को लेकर अतीत में भी गंभीर मतभेद और आरोप सामने आए हैं, लेकिन मौजूदा विवाद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ‘देशद्रोह’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल अलग तरह का राजनीतिक विमर्श खड़ा करता है।

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