Navratri2026: हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा के संकेत; कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
Dhanbad Navratri 2026: धनबाद में शारदीय नवरात्र का शुभारंभ रविवार से हो रहा है, जिसमें मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं, जो सुख-समृद्धि का प्रतीक है।

रविवार से शुरू हो रही नवरात्रि में हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा। (एआइ फोटो)
जागरण संवाददाता, धनबाद। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ रविवार से हो रहा है और समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ होगा। इस दिन दशमी पूजन, जयंती ग्रहण, अपराजिता पूजन, शमी पूजन, देवी विसर्जन और व्रत पारण किया जाएगा।
बैंक मोड़ शांति भवन स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी उदय तिवारी ने बताया कि इस वर्ष मां भगवती हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का हाथी पर आगमन अच्छी वर्षा, अन्न-धन की समृद्धि और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

वहीं, मंगलवार को विजयादशमी होने के कारण मां दुर्गा का विदाई चरणायुध (पैदल) माना गया है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्र के प्रथम दिन रविवार को सुबह 6:31 बजे से शाम 4:30 बजे तक चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के संयोग में पूजा शुभ है। वहीं, कलश स्थापना के लिए विशेष अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:34 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा। श्रद्धालु इस दौरान विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना कर सकते हैं।
दस दिनों तक होगी विशेष पूजा
नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा होगी। रविवार को कलश स्थापन के साथ मां शैलपुत्री, 12 को ब्रह्मचारिणी, 13 को चंद्रघंटा, 14 को कूष्मांडा, 15 को स्कंदमाता और 16 अक्टूबर को कात्यायनी की पूजा होगी।
17 अक्टूबर को कालरात्रि तथा 18 अक्टूबर को महागौरी पूजन, कुमारिका पूजन और महाष्टमी की पूजा होगी। 19 अक्टूबर को महानवमी पर दुर्गा पूजन और हवन होगा। 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ नवरात्र का समापन होगा।
20 अक्टूबर को देवी विसर्जन
पंडित तिवारी के अनुसार, 20 अक्टूबर को सुबह 9:40 बजे से श्रवण नक्षत्र का योग बन रहा है। श्रवण नक्षत्रयुक्त दशमी में विजयादशमी के अवसर पर अपराजिता पूजन, शमी पूजन और भगवती विसर्जन का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद नवरात्र व्रत का पारण करेंगे।
