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दुलारचंद पर कोरोना टीका का चमत्कार हकीकत या फसाना, बोकारो मेडिकल टीम की रिपोर्ट का इंतजार

Bokaro Corona Vaccination Miracle बोकारो के चिकित्सकों का कहना था कि दुलारचंद के दावे पर वे कुछ नहीं कह सकते हैं। वैक्सीन के प्रभाव का अध्ययन करने पर ही कुछ पता चलेगा। दुलारचंद टीबी व न्यूरो की समस्या से ग्रस्त है। उन्हें संपूर्ण इलाज की जरूरत है।

By MritunjayEdited By: Published: Mon, 17 Jan 2022 06:54 AM (IST)Updated: Mon, 17 Jan 2022 07:09 AM (IST)
घर में खाट पर बैठे दुलारचंद मुंडा ( फोटो जागरण)।

जागरण संवाददाता, बोकारो। Bokaro Corona Vaccination Miracle कोरोना वैक्सीन लेने के कारण पुरानी बीमारी से निजात पाने का दावा करने वाले पेटरवार प्रखंड के सालगीडीह निवासी दुलारचंद ( Dularchand Munda) की जांच करने के लिए रविवार को पेटरवार के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. अलबेल एक्का के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम पहुंची। उनके साथ डा. अजय कुमार चौधरी और डा. विष्णु प्रकाश थे। तीनों चिकित्सकों ने दुलारचंद व उनके परिवार के सदस्यों से पूरी जानकारी ली। अब तक की मेडिकल रिपोर्ट का गहनता से अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि दुर्घटना के बाद दुलारचंद को न्यूरो संबंधी समस्या थी। इसके बाद भी वह काम करते रहे और अपना इलाज ठीक से नहीं करा पाए। इस बीच उन्हें बोन टीबी की बीमारी हो गई। चिकित्सकों के परामर्श पर दवा ली। हालांकि दो माह ही दवा खाई। ऐसा इसलिए किया कि दवा खाने से उन्हें कमजोरी महसूस हो रही थी। पहले से न्यूरो समस्या व टीबी के कारण दुलारचंद के शरीर में झनझनाहट होने लगी। पहले पैर, इसके बाद हाथ ने काम करना बंद कर दिया, आवाज कम निकलने लगी।

दुलारचंद मुंडा की जांच करती मेडिकल टीम ( फोटो जागरण)। 

कोरोना टीकाकरण चमत्कार पर मेडिकल जांच टीम चुप

चिकित्सकों का कहना था कि दुलारचंद के दावे पर वे कुछ नहीं कह सकते हैं। वैक्सीन के प्रभाव का अध्ययन करने पर ही कुछ पता चलेगा। दुलारचंद टीबी व न्यूरो की समस्या से ग्रस्त है। उन्हें संपूर्ण इलाज की जरूरत है। डा. एक्का ने कहा कि तीनों चिकित्सकों की समाहित रिपोर्ट सोमवार को सिविल सर्जन को भेजी जाएगी।

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साल 2015 से बेड पर दुलारचंद

वहीं पत्नी लखी देवी का कहना है कि दुलारचंद वर्ष 2015 में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए। एक माह तक इलाज के बाद ठीक हो गए। दो वर्ष पूर्व पैर-हाथ ने काम करना बंद कर दिया। धीरे-धीरे आवाज चली गई। रिम्स में इलाज कराया, पर बहुत सुधार नहीं हुआ। पेटरवार में एक वैद्य से भी इलाज कराया था। छह जनवरी को वैक्सीन ली। आठ जनवरी से ऐसा महसूस हुआ कि वह बोल सकते हैं। धीरे-धीर आवाज साफ हो रही है। अब वह अपने से उठ रहे हैं। चलने में अभी परेशानी है।

पेटरवार के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के साथ तीन चिकित्सकों की टीम ने जांच की है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सिविल सर्जन निर्णय लेंगे कि दुलारचंद का इलाज कैसे हो। उनके दावे को लेकर राज्य मुख्यालय व आइसीएमआर को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

-डा. एनपी सिंह, प्रभारी पदाधिकारी वैक्सीन, बोकारो


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