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धनबाद के सलानपुर साइडिंग के पास अवैध कोयला खनन को लेकर तनाव, गांव वालों को लोगों ने घेरा; भू-धंसान का मंडराया खतरा

Published: Sun, 01 Nov 2026 12:24 AM (IST)

कतरास के सलानपुर साइडिंग में अवैध कोयला खनन को लेकर तनाव गहरा गया है, जहां रोकने गए ग्रामीणों को सैकड़ों लोगों ने घेर लिया।

मौके पर जुटी लोगों की भीड़। (जागरण)

मौके पर जुटी लोगों की भीड़। (जागरण)

HighLights

  1. अवैध खनन रोकने गए ग्रामीणों को सैकड़ों ने घेरा।

  2. सलानपुर साइडिंग में दो बस्तियों के बीच तनाव।

  3. भू-धंसान का खतरा, प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग।

जागरण संवाददाता, कतरास। कतरास थाना क्षेत्र के सलानपुर साइडिंग सिलेक्टड गोविंदपरु के समीप कथित अवैध कोयला खनन को लेकर स्थिति गंभीर बनी हुई है।

अवैध खनन पर रोक लगाने पहुंचे ग्रामीणों को सैकड़ों लोगों द्वारा घेरने का गंभीर मामला सामने आया है, जिससे इलाके में दो बस्तियों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। जानकारी के अनुसार, गुहीबांध तथा आसपास के ग्रामीण जब सलानपुर क्षेत्र में चल रहे अवैध मुहाने पर कोयला काट रहे मजदूरों को रोकने के लिए पहुंचे, तो पास की बस्ती के कुछ लोग उनके विरोध में उतर आए।

आरोप है कि देखते ही देखते सैकड़ों लोगों ने गुहीबांध के करीब 25 ग्रामीणों को चारों तरफ से घेर लिया। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई, हालांकि किसी तरह गुहीबांध के ग्रामीण वहां से जान बचाकर निकल गये।

ग्रामीणों ने बड़ा दावा किया है कि अवैध मुहाने के अंदर करीब 500 मीटर तक सुरंग बनाकर खनन किया जा चुका है। आरोप है कि जमीन को भीतर से सुरक्षित रखने वाले कोयले के बड़े-बड़े पिलरों को भी काटकर निकाल लिया गया है।

जान-माल का हो सकता है खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह अवैध खुदाई जल्द नहीं रोकी गई, तो कभी भी किसी बड़े भू-धंसान जैसी भीषण दुर्घटना हो सकती है, जिससे आसपास के रिहायशी इलाकों की जान-माल को बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

सुरक्षा और अपनी बस्तियों के अस्तित्व को लेकर चिंतित ग्रामीणों ने बीसीसीएल प्रबंधन, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने, अवैध मुहानों को तुरंत सील कराने तथा अंदर की स्थिति की उच्चस्तरीय जांच कराने की गुहार लगाई है।

अब देखना यह है कि प्रशासन समय रहते इस संवेदनशील मामले में कोई ठोस कदम उठाता है या किसी बड़े हादसे के बाद ही नींद से जागता है।

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